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घर में बैठे हैं दरिंदे! 9 साल की बच्ची हुई प्रेग्नेंट, आरोपी निकला सगा भाई; महिला अधिकारी ने सुनाई ऐसी घटना कि हर कोई हैरान

भारत में नाबालिगों के यौन शोषण के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं, जो समाज के लिए गंभीर चेतावनी हैं. हाल ही में सामने आया 9 साल की बच्ची का मामला, जिसमें वह प्रेग्नेंट पाई गई और आरोपी उसका 11 साल का सगा भाई निकला, पूरे देश को झकझोर देने वाला है. यह घटना दिखाती है कि बच्चे कई बार अपने ही घर में असुरक्षित होते हैं. POCSO कानून ऐसे अपराधों से बच्चों की रक्षा के लिए बना है, लेकिन जागरूकता, गुड टच-बैड टच की शिक्षा और समय पर शिकायत बेहद जरूरी है.

घर में बैठे हैं दरिंदे! 9 साल की बच्ची हुई प्रेग्नेंट, आरोपी निकला सगा भाई; महिला अधिकारी ने सुनाई ऐसी घटना कि हर कोई हैरान
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( Image Source:  Create By AI Sora )
रूपाली राय
By: रूपाली राय

Published on: 17 Jan 2026 8:47 AM

भारत में नाबालिगों के यौन शोषण (Child Sexual Abuse) एक बहुत गंभीर और बढ़ती हुई समस्या है. यह बच्चों की मासूमियत, मानसिक स्वास्थ्य और भविष्य को हमेशा के लिए प्रभावित कर देता है. बच्चे 18 साल से कम उम्र वाले समाज का सबसे कमजोर वर्ग होते हैं, इसलिए उनके साथ होने वाला कोई भी यौन अपराध बेहद जघन्य माना जाता है. पिछले कुछ सालों में POCSO के तहत मामलों में तेज वृद्धि हुई है.

एक बेहद दुखद, चौंकाने वाला और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जो भारत में नाबालिग बच्चों के साथ होने वाले यौन शोषण की गहराई को दिखाता है. यह घटना इतनी संवेदनशील है कि सुनकर हर कोई स्तब्ध रह जाता है. इसमें एक मासूम 9 साल की छोटी बच्ची को इतना बड़ा सदमा लगा कि वह प्रेग्नेंट हो गई, और गर्भावस्था के 8वें महीने तक किसी को पता भी नहीं चला खासकर उसकी मां को.

घर में ही हो रहा था शोषण

बच्ची की उम्र सिर्फ 9 साल थी, और आरोपी कोई और नहीं बल्कि उसका सगा 11 साल का छोटा भाई था. दोनों भाई-बहन इतने छोटे थे कि वे शायद पूरी तरह समझ भी नहीं पाते थे कि वे क्या कर रहे हैं, लेकिन यह काम इतना गलत और खतरनाक था कि परिणाम बहुत भयानक निकला. बच्ची के पेट में बच्चा पल रहा था, लेकिन वह खुद इतनी छोटी थी कि शायद उसे समझ ही नहीं आया कि उसके शरीर में क्या बदलाव हो रहा है. वह रोज़ खेलती-कूदती रही, लेकिन धीरे-धीरे उसका पेट बड़ा होने लगा.

मां को कैसे पता चला?

मां को लंबे समय तक कुछ पता नहीं चला. बच्ची का पेट बड़ा हो रहा था, लेकिन मां ने शायद इसे वजन बढ़ना या कोई बीमारी समझा. जब बच्ची को तकलीफ होने लगी या कुछ असामान्य दिखा, तो मां ने उससे पूछताछ की. बच्ची कुछ बता नहीं पाई शायद डर के मारे, शर्म के मारे या समझ न आने की वजह से. आखिरकार मां उसे लेकर पुलिस थाने पहुंची. वहां महिला पुलिस अधिकारियों ने बच्ची से प्यार से बात की, काउंसलिंग की. धीरे-धीरे सच्चाई सामने आई कि यह सब उसके 11 साल के भाई ने किया था.

DNA टेस्ट और इलाज

महिला अधिकारी ने बताया कि बच्ची को कुछ समय तक उनके पास रखा गया. उसका पूरा इलाज कराया गया, क्योंकि इतनी छोटी उम्र में प्रेग्नेंसी बहुत जोखिम भरी होती है. DNA टेस्ट करवाया गया, जिससे 100% कन्फर्म हो गया कि बच्चा किसी और का नहीं, बल्कि उसके सगे भाई का ही है. दोनों बच्चे नाबालिग होने के कारण यह मामला और भी जटिल हो गया. जब पुलिस 11 साल के नाबालिग भाई को गिरफ्तार करने पहुंची, तो उसकी मां (यानी बच्ची की मां) ने विरोध किया. उन्होंने पुलिस को रोका, नहीं होने दिया. शायद मां को लगा कि उनका बेटा इतना छोटा है, उसे जेल नहीं जाना चाहिए, या परिवार की इज्जत का डर था. लेकिन कानून के सामने कोई बचाव नहीं था.

बच्चे का जन्म और परिवार का रवैया

बच्ची ने ऑपरेशन (सिजेरियन) से बच्चे को जन्म दिया. इतनी छोटी उम्र में इतना बड़ा ऑपरेशन उसके लिए कितना दर्दनाक रहा होगा. लेकिन सबसे दुखद बात यह थी कि माता-पिता ने बच्चे को एक बार भी नहीं देखा न उन्होंने बच्ची को गले लगाया, न नवजात बच्चे को छुआ. वे बस चले गए, बिना किसी फिक्र के. यह दिखाता है कि परिवार में कितनी बड़ी भावनात्मक दूरी और असंवेदनशीलता थी.

महिला अधिकारी ने क्या कहा?

एक महिला पुलिस अधिकारी ने राजस्थान की एक यूनिवर्सिटी में इस मामले का जिक्र किया. उन्होंने बहुत दुख से कहा, 'एक मां कैसे इतनी अनजान रह सकती है कि घर में उसकी बेटी के साथ इतना बड़ा हादसा हो रहा है? जब बच्ची प्रेग्नेंट थी, तब भी उसे पता नहीं चला और जब सब सामने आया, तो मां ने बच्ची को हमारे पास छोड़ दिया और चली गई बिना यह सोचे कि अब उसकी छोटी बच्ची कैसे रहेगी, क्या होगा उसका.'

सोशल मीडिया यूजर्स ने उठाया सवाल

इसमें कोई दो राय नहीं है कि यह मामला जितना सवेंदनशील है उतना गंभीर भी. लेकिन सोशल मीडिया यूजर्स महिला अधिकारी के बयान पर सवाल कर रहे है कि 9 साल की उम्र में बच्ची को पीरियड्स शुरू हो चुके थे क्योंकि आम तौर पर 13 से 14 साल की उम्र में लड़कियों को माहवारी शुरू होती है. एक यूजर ने लिखा, 'उम्र का हेर फेर है लेकिन घटना सच्ची है.' दूसरे ने कहा, '9 or 11 साल के बच्चों को क्या ही समझ हो सकती है आजकल जो हर जगह इरोटिक माहौल है उससे बच्चे जो सीख रहें हैं ओर क्या ही परिणाम की उम्मीद हो सकती है. और 8 महीने की प्रेगनेंसी तक घर वालों को कुछ पता ही न चला हो ही नही सकता. नॉर्मली 12 से 13 मे पीरियड स्टार्ट होते है.' एक अन्य ने कहा, 'कुछ फैक्ट्स मिसिंग है लेकिन घटना सच्ची है कोई इतना झूठ क्यों बोलेगा.'

घर में असुरक्षित बच्चे

घर में बच्चे कितने असुरक्षित हो सकते हैं, भले ही परिवार कितना भी करीबी क्यों न हो. बच्चों को गुड टच-बैड टच की शिक्षा बहुत जरूरी है, ताकि वे समझ सकें और तुरंत बताएं. माता-पिता को बच्चों के व्यवहार, शरीर में बदलाव पर नजर रखनी चाहिए. ऐसे मामलों में डर या शर्म की वजह से चुप न रहें पुलिस, चाइल्डलाइन (1098) या किसी भरोसेमंद व्यक्ति से मदद लें. नाबालिगों के बीच ऐसा होना भी गंभीर है, क्योंकि वे खुद बच्चे हैं, लेकिन कानून उन्हें भी जिम्मेदार ठहराता है, और परिवार को सुधारने की जरूरत होती है.

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