'मियां विरोध' या अस्तित्‍व की लड़ाई! ''सब्‍जी महंगी तो मियां को मारो, किराया ज्‍यादा तो मियां को मारो'', चर्चा में हिमंता का बवाली बयान

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा के एक बयान ने पूरे देश में सियासी भूचाल ला दिया है. ‘सब्जी महंगी हो तो मियां को मारो, किराया ज्यादा लगे तो मियां को मारो’ जैसी टिप्पणी को विपक्ष नफरत फैलाने वाला बता रहा है, जबकि भाजपा समर्थक इसे ‘मूल असमिया के अस्तित्व की लड़ाई’ कह रहे हैं.;

( Image Source:  ANI )
By :  धीरेंद्र कुमार मिश्रा
Updated On : 29 Jan 2026 4:08 PM IST
असम की राजनीति एक बार फिर आग में घी डालने वाला काम हो रहा है. मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा के ‘मियां समुदाय’ को लेकर दिए गए बयान ने राजनीतिक मर्यादाओं की सारी सीमाएं तोड़ दी हैं. ‘सब्जी महंगी हो जाए तो मियां को मारो, किराया ज्यादा लगे तो मिया को पैसा कम दो' जैसी टिप्पणी अब सिर्फ बयान नहीं, बल्कि संविधान, सामाजिक सौहार्द और लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा सवाल बन चुकी है. एक तरफ हिमंता इसे ‘मूल असमिया समाज के अस्तित्व की आखिरी लड़ाई’ बता रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्ष और मानवाधिकार संगठन इसे खुले तौर पर नफरत और अल्पसंख्यक उत्पीड़न की राजनीति करार दे रहे हैं. अब सवाल यह है कि क्या यह अवैध घुसपैठ के खिलाफ सख्ती है या फिर चुनावी फायदे के लिए खड़ा किया गया डर और विभाजन का नैरेटिव?

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने 27 जनवरी को कहा कि राज्य में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान ‘चार से पांच लाख मिया मतदाताओं’ के नाम मतदाता सूची से हटाए जाएंगे. हिमंता बिस्वा शर्मा और भाजपा सीधे तौर पर 'मियां समुदाय के खिलाफ हैं.’ उन्होंने प्रदेश के लोगों से मिया समुदाय को परेशान करने की अपील की. इसके पीछे वह मानते हैं, "जब तक उन्हें परेशानी नहीं होगी, वे असम नहीं छोड़ेंगे."

मूल असमिया के हक पर चोट

‘मियां’ बांग्ला भाषी मुसलमानों के लिए इस्तेमाल होने वाला एक अपमानजनक शब्द है. असम की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी अक्सर इस समुदाय को ‘घुसपैठिए’ कहती रही है. इन पर आरोप लगाया जाता रहा है कि वे मूल निवासियों के संसाधनों, नौकरियों और जमीन पर कब्जा कर रहे हैं.

घुसपैठियों को वोट डालने की इजाजत क्यों?

तिनसुकिया के डिगबोई में हिमंता बिस्वा शर्मा ने कहा कि 'मियां' परेशान करना उनकी जिम्मेदारी है. ‘वोट चोरी का मतलब यह है कि हम कुछ मिया वोट चुराने की कोशिश कर रहे हैं. सच तो यह है कि असम में वोट डालने की इजाजत नहीं होनी चाहिए, बल्कि बांग्लादेश में वोट देना चाहिए.’ सीएम ने ये भी कहा, ‘हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि वे असम में वोट न कर सकें.’

4 से 5 लाख वोट हटेंगे

असम के सीएम के मुताबिक, "एसआर शुरुआती है. जब असम में एसआईआर आएगा, तब चार से पांच लाख मिया वोट असम में हटाने होंगे. कांग्रेस मुझे जितना चाहे गाली दे, मेरा काम मिया लोगों की जिंदगी मुश्किल बनाना है."

बांग्लादेशी मुसलमानों को परेशान करो

सीएम पे पहले की टिप्पणियों को दोहराते हुए कहा कि भाजपा-नेतृत्व वाली सरकार कानून के दायरे में रहते हुए समुदाय के लिए परेशानियां खड़ी करेगी. जितनी भी शिकायतें हुई हैं, वे मेरे आदेश पर हुई हैं. मैंने खुद भाजपा के लोगों से कहा है कि वे मिया समुदाय के खिलाफ लगातार शिकायतें करते रहें. इसमें छिपाने जैसा कुछ नहीं है. मैंने बैठकें की हैं, वीडियो कॉन्फ्रेंस की हैं और लोगों से कहा, "जहां संभव हो, फॉर्म-7 भरें. ताकि उन्हें थोड़ा इधर-उधर भागना पड़े, उन्हें परेशानी हो और उन्हें समझ आए कि असमिया लोग अभी भी मौजूद हैं. अगर कांग्रेस को आपत्ति है, तो होने दें."

सहानुभूति न दिखाएं, घर में लव जिहाद हो जाएगा

उन्होंने आगे कहा, 'रिक्शा में अगर किराया 5 रुपये है, तो उन्हें 4 रुपये दीजिए. जब तक उन्हें परेशानी नहीं होगी, वे असम नहीं छोड़ेंगे… ये कोई मुद्दे नहीं हैं. हमें यह बताने का क्या मतलब कि ये मुद्दे हैं? अगर आप उन्हें परेशान नहीं करेंगे, तो कल मैंने देखा कि वे दुलियाजन (पूर्वी असम का एक शहर) तक पहुंच गए हैं. इसलिए आप सभी भी उन्हें परेशान करें और ऐसी खबरें न करें जो उनके प्रति सहानुभूति दिखाएं. आपके अपने घर में लव जिहाद हो जाएगा.’

जनसांख्यिकी बदलने की कोशिश

सीएम हिमंता बिस्वा शर्मा पहले भी बांग्ला भाषी मुसलमानों को निशाना बनाते रहे हैं. उनका दावा किया था कि राज्य के मूल निवासी समुदाय ‘एक धर्म’ के लोगों के ‘आक्रमण’ का सामना कर रहे हैं, जो कथित तौर पर अलग-अलग इलाकों की जमीनों पर अतिक्रमण कर उन इलाकों की जनसांख्यिकी बदलने की कोशिश कर रहे हैं.

निशाने पर बांग्लाभाषी मुसलमान

सीएम शर्मा ने 25 जनवरी 2026 को दावा किया कि राज्य में केवल ‘मिया’ यानी बांग्ला भाषी मुसलमानों को ही बेदखली अभियान के तहत निशाना बनाया जा रहा है, असमिया लोगों को नहीं.

जनगणना से होगी बांग्लादेशियों की पहचान

जुलाई 2025 में उन्होंने कहा था कि जनगणना में असमिया की बजाय बांग्ला भाषा चुनने वालों से बांग्लादेशियों की पहचान में मदद मिलेगी. यह बात उन्होंने राज्य में अल्पसंख्यक समुदाय के एक वर्ग द्वारा बांग्ला को जनगणना में अपनी मातृभाषा के रूप में सूचीबद्ध करने की मांग का जवाब देते हुए कहा था.

अल्पसंख्यकों के खिलाफ लड़ाई सही

जुलाई 2025 में धुबरी ज़िला प्रशासन ने धुबरी ज़िले के बिलाशीपारा में असम सरकार द्वारा प्रस्तावित 3,400 मेगावाट के थर्मल पवार प्लांट स्थल पर 2,000 से ज़्यादा मिया मुसलमानों के घरों को गिरा दिया. शर्मा ने अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ ‘लड़ाई’ को उचित ठहराया था, भले ही वे ‘विदेशी’ न हों, जब उन्होंने एक एक्स पोस्ट में लिखा था, ‘हमें अपने हक़ के लिए लड़ने से मत रोको. हमारे लिए यह हमारे अस्तित्व की आखिरी लड़ाई है.’

मूल निवासियों’ को बंदूक का लाइसेंस देना गलत नहीं

मई 2025 में हिमंता के नेतृत्व वाली कैबिनेट ने मुस्लिम बहुल इलाकों में रहने वाले ‘मूल निवासियों’ को बंदूक के लाइसेंस देने की योजना लाई थी. इस कदम को उचित ठहराते हुए, शर्मा ने कहा था, "बंदूक ज़रूरी है. बंदूक के बिना, आप दक्षिण सलमारा और मनकाचर जैसी जगहों पर कैसे रह पाएंगे? जब आप वहां जाएंगे तो आपको समझ आ जाएगा."

जुमे की नमाज के लिए 2 घंटे के ब्रेक पर रोक

फरवरी 2025 में असम विधानसभा ने 90 वर्षों से चली आ रही मुस्लिम विधायकों को शुक्रवार (जुमे) को नमाज पढ़ने के लिए दिए जाने वाले दो घंटे के ब्रेक को खत्म कर दिया था.

सब्जियों की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए मियां जिम्मेदार

जुलाई 2023 में असम में सब्जियों की बढ़ी कीमतों के लिए ‘मिया’ लोगों को दोषी ठहराने के लिए हिमंता बिस्वा शर्मा की काफी आलोचना की गई थी. उन्होंने कथित तौर पर सब्जियों की आसमान छूती कीमतों के लिए ‘मिया’ किसानों और व्यापारियों के एकाधिकार को जिम्मेदार ठहराया था. साथ ही असमिया युवाओं से ‘मिया’ को व्यवसाय से बाहर करने के लिए खेती और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों को अपनाने का आग्रह किया था.

किसने क्या कहा?

असम के लोगों को बेवकूफ बनाने की कोशिश

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा सीएम के बयान पर कहा कि हिमंता बिस्वा सरमा एक बार फिर असम के लोगों को बेवकूफ बनाने की कोशिश कर रहे हैं. "मियां" को ₹5 की जगह ₹4 देने से असम के लोग अमीर नहीं हो जाएंगे, लेकिन सिक्स्थ शेड्यूल से सुरक्षित 1.5 लाख बीघा से ज़्यादा ज़मीन और असमिया पहचान को कॉरपोरेट कंपनियों को बेचकर, उस भूमि-विक्रेता हिमंता ने असम को ज़रूर गरीब बना दिया है.

रायजोर दल के अध्यक्ष और विधायक अखिल गोगोई ने कहा कि असम के लोगों ने शर्मा को मियां समुदाय को लगातार दबाव में रखने के लिए नहीं चुना है.

असम में सविंधान पूरी तरह से ठप

कांग्रेस नेता अमन वदूद ने मुख्यमंत्री पर राज्य में संविधान को निष्प्रभावी करने का आरोप लगाया और कहा, ‘मुख्यमंत्री ने असम में संविधान को पूरी तरह से निष्क्रिय बना दिया है.’

इन दलों नें की EC से की शिकायत

25 जनवरी 2026 को कांग्रेस, रायजोर दल, असम जातीय परिषद, सीपीआई, सीपीआई(एम) और सीपीआई(एम-एल) समेत छह विपक्षी दलों ने राज्य के सीईओ से की शिकायत में कहा कि उन्होंने एसआर कवायद के दौरान व्यापक कानूनी उल्लंघनों, राजनीतिक हस्तक्षेप और वास्तविक मतदाताओं को चुनिंदा रूप से निशाना बनाए जाने का आरोप लगाया और इसे ‘मनमाना, गैरकानूनी और असंवैधानिक’ बताया.

61 लाख घरों में वेरिफिकेशन का कामा पूरा

चुनाव अधिकारियों का दावा है कि 61 लाख से अधिक घरों का सत्यापन पूरा किया गया है, जिससे शत-प्रतिशत कवरेज हुआ है.

सोशल मीडिया रिएक्शन

बात में दम तो है, नए युग की शुरुआत

द जाट एसोसिएशन ने एक्स पर लिखा हिंदुओं की एकता और जागरूकता को भांपते हुए अब हिंदुत्ववादी नेता भी दमदारी वाली बात करने लगे हैं. हिमंत बिस्वा शर्मा द्वारा राष्ट्रीय स्तर के मीडिया के सामने अवैध घुसपैठियों को लात मार कर देश से बाहर निकालने की बात कहना एक नए युग की शुरुआत है. बस यही हिंदू जागरूकता टिकी रही तो वो दिन दूर नहीं जब करोड़ों की संख्या में रह रहे घुसपेंठियें इसी व्यक्ति के नेतृत्व में लात मार कर देश से बाहर निकाले जाएंगे.

BJP-RSS की नफरती सोच

मनु जैन ने सीएम के बयान पर एक्स पर कहा कि 'कोई मुसलमान रिक्शावाला अगर 5 रुपए मांगे, तो उसे 4 रुपए दो... खूब परेशान करो'- ये घटिया बयान असम के मुख्यमंत्री और नरेंद्र मोदी के लाडले हिमंता बिस्वा सरमा का है. हिमंता बिस्वा सरमा संविधान की शपथ लेकर, संविधान की धज्जियां उड़ा रहे हैं, देश में नफरत के बीज बो रहे हैं. ये BJP-RSS की नफरती सोच है.

असम में 2.51 करोड़ मतदाता

बता दें कि चुनाव आयोग 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों का एसआईआर कर रहा है, वहीं असम में एसआर कवायद चल रही है, जो नियमित अपडेट जैसी है. 27 दिसंबर को प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची के अनुसार, असम में फिलहाल 2.51 करोड़ मतदाता हैं. इसमें 4.78 लाख नाम मृत के रूप में चिह्नित किए गए, 5.23 लाख लोगों के स्थानांतरण दर्ज किए गए और 53,619 डुप्लीकेट प्रविष्टियां हटाई गईं.

Similar News