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'गमोसा' का नॉर्थ ईस्‍ट में क्‍या है महत्‍व जिसके राहुल गांधी के न पहनने को लेकर मचा है बवाल?

भारत के नॉर्थ-ईस्ट प्रांत खासकर असम की राजनीति और संस्कृति में 'गमोसा' सिर्फ कपड़ा नहीं, बल्कि अस्मिता, सम्मान और परंपरा का प्रतीक है. इसी वजह से राहुल गांधी के गमोसा न पहनने को लेकर अचानक सियासी बवाल खड़ा हो गया. आइए, इस मुद्दे को समझें.

गमोसा का नॉर्थ ईस्‍ट में क्‍या है महत्‍व जिसके राहुल गांधी के न पहनने को लेकर मचा है बवाल?
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( Image Source:  Aman Sharma @AmanKayamHai_ )

रिपब्लिक डे के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में सोमवार को आयोजित 'एट होम रिसेप्शन' में नॉर्थ ईस्‍ट की राजनीति में एक बार फिर संस्कृति बनाम सियासत की बहस तेज हो गई है. इस बार इसकी वजह है कि 'गमोसा'. असम और पूर्वोत्तर भारत की पहचान माने जाने वाले इस पारंपरिक वस्त्र को लेकर उस वक्त बवाल मच गया, जब एक सार्वजनिक कार्यक्रम में राहुल गांधी ने गमोसा नहीं पहना. सोशल मीडिया से लेकर सियासी मंचों तक सवाल उठने लगे-क्या यह सिर्फ कपड़ा है या पूर्वोत्तर की आत्मा? क्या किसी राष्ट्रीय नेता द्वारा गमोसा न पहनना सांस्कृतिक असंवेदनशीलता है या फिर इसे राजनीतिक रंग दिया जा रहा है?

दरअसल, नॉर्थ ईस्‍ट में गमोसा वही महत्व रखता है, जो पंजाब में पगड़ी, तमिलनाडु में वेष्टी या उत्तर भारत में साफा रखता है। यही कारण है कि राहुल गांधी के गमोसा न पहनने का मामला केवल एक तस्वीर या पल भर की घटना न रहकर अस्मिता, सम्मान और पहचान की सियासी लड़ाई में बदल गया.

'गमोसा' क्या है?

'गमोसा' (Gamusa/Gamosa) असम और नॉर्थ-ईस्ट की सबसे पवित्र और पहचान से जुड़ी परिधान में शामिल है. यह आमतौर पर सफेद सूती कपड़ा होता है, जिसके किनारों पर लाल पारंपरिक डिजाइन बने होते हैं. असमिया समाज में गमोसा सम्मान, स्वागत, आशीर्वाद और शुद्धता का प्रतीक है. बिहू, पूजा-पाठ, विवाह, सामाजिक समारोह या किसी अतिथि के स्वागत में गमोसा पहनाना या ओढ़ाना सम्मान देने का तरीका है. जैसे उत्तर भारत में पगड़ी या दक्षिण भारत में अंगवस्त्रम, वैसे ही नॉर्थ-ईस्ट में गमोसा की भावनात्मक अहमियत है.

गमोसा का सांस्कृतिक महत्व

भारत के हर क्षेत्र में अतिथि देवो भवः की भावना वहां की जीवन शैली किसी न किसी रूप में है. 'गमोसा' असमिया पहचान (Cultural Identity) का प्रतीक है. कलाकार, खिलाड़ी, नेता—सबको गमोसा पहनाकर सम्मानित करने की परंपरा है. इसे पहनने से अस्वीकार करना कई बार अपमान के रूप में देखा जाता है. यही वजह है कि 'गमोसा' से जुड़ा कोई भी मामला वहां भावनात्मक रूप से बहुत संवेदनशील हो जाता है.

राहुल गांधी बनाम 'गमोसा' विवाद

दरअसल, राष्ट्रपति भवन में सोमवार को आयोजित 'एट होम रिसेप्शन' में नॉर्थ-ईस्ट की सांस्कृतिक पहचान 'गमोसा' के नाम रहा.'एट होम रिसेप्शन' जिसमें प्रधानमंत्री से लेकर यूरोपीय संघ के प्रतिनिधि, विदेशी राजदूत और तमाम अतिथि सभी को नॉर्थ-ईस्ट की पहचान माने जाने वाले पारंपरिक पटका/गमोसा भेंट किए गए. राहुल गांधी ने इसे नहीं पहना. अभी तक जो तस्वीरें सामने आई हैं उससे साफ है कि अधिकांश मेहमानों ने इसे पहनकर समारोह की थीम को अपनाया दिखाया.

वहीं, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे पहना था. राहुल गांधी का पटका न पहनना सियासी चर्चा का केंद्र बन गया. उन्होंने पटका स्वीकार तो किया, लेकिन पहनने के बजाय हाथ में ही रखा. यह भी कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें दो बार इसे पहनने का संकेत दिया, पर उन्होंने इसे नजरअंदाज किया.

यह मामला मीडिया में तुलना का आधार बन गया.सोशल मीडिया पर यह मामला सामने आते ही इस राजनीतिक रंग भी दे दिया गया. समर्थकों और आलोचकों दोनों ने तस्वीरों के आधार पर अपने-अपने तर्क पेश किए. एक ओर इसे व्यक्तिगत पसंद बताया गया, तो दूसरी ओर इसे सांस्कृतिक प्रतीक के अपमान के रूप में देखा गया.

BJP और असम सरकार

बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि ऐसा कर राहुल गांधी ने असमिया संस्कृति और गमोसा का अपमान किया. कुछ नेताओं ने कहा कि जो नेता स्थानीय संस्कृति का सम्मान नहीं कर सकता, वह नॉर्थ-ईस्ट की भावनाएं कैसे समझेगा?

कांग्रेस की सफाई

कांग्रेस ने पलटवार करते हुए कहा कि यह जानबूझकर मुद्दा बनाया जा रहा है. पार्टी का कहना है कि राहुल गांधी किसी संस्कृति का अपमान नहीं करते, यह केवल राजनीतिक प्रोपेगेंडा है. कुछ कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि 'गमोसा' को लेकर भावनाओं का राजनीतिक इस्तेमाल किया जा रहा है.

इतना बड़ा मुद्दा क्यों बना?

नॉर्थ-ईस्ट, खासकर असम में संस्कृति और पहचान को लेकर लोग बेहद सजग हैं. लंबे समय तक मुख्यधारा की राजनीति से उपेक्षा का भाव रहा है. ऐसे में राहुल गांधी जैसे नेताओं द्वारा राष्ट्रपति के कहने पर भी गमोसा नहीं पहनना, किसी बड़े राष्ट्रीय नेता का व्यवहार सीधा भावनाओं से जुड़ जाता है. जैसे तमिलनाडु में भाषा, पंजाब में पगड़ी, या कश्मीर में कश्मीरी पोशाक, वैसे ही असम में 'गमोसा.'

कांग्रेस ने नॉर्थ-ईस्ट का भरोसा खो दिया - हिमंत बिस्वा सरमा

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने राहुल गांधी को निशाने पर लेते हुए कहा कि 'बेहद असंवेदनशील और अपमानजनक' होने का आरोप लगाया और बिना शर्त माफी की मांग की. सरमा ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से लेकर विदेशी मेहमानों तक, सभी ने सम्मान और गर्व के साथ पटका पहना. अकेले मिस्टर गांधी अलग दिखे, जिससे नॉर्थ ईस्ट के प्रति अनादर की भावना और मजबूत हुई." उन्होंने आगे कहा कि ऐसे बर्ताव से पता चलता है कि कांग्रेस ने इस क्षेत्र का भरोसा क्यों खो दिया है.

पवन खेड़ा - तो, ये तस्वीर क्या कहती है?

इसके जसाब में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने राहुल गांधी को गमोसा के लिए निशाने पर लेने और विवाद को तूल वालों से पूछा, 'और यह तस्वीर क्या कहती है?'

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