Begin typing your search...

इस्तीफे पर इस्तीफे, UGC के नए नियम पर क्यों हो रहा बवाल, आज दिल्ली की सड़कों पर उतरेंगे छात्र; सवर्ण समाज की आबादी कितनी?

UGC द्वारा लागू नए इक्विटी नियमों के खिलाफ जनरल कैटेगरी के छात्रों का गुस्सा अब देशव्यापी आंदोलन में बदलता दिख रहा है. 27 जनवरी को दिल्ली में UGC मुख्यालय के बाहर बड़े प्रदर्शन की तैयारी है. इसी के साथ आइए जानते हैं UGC बवाल को लेकर अब तक कितने लोगों को इस्तीफा हुआ तो वहीं भाजपा अंदर क्या कलह पैदा हो रही है कि नहीं.

इस्तीफे पर इस्तीफे,  UGC के नए नियम पर क्यों हो रहा बवाल, आज दिल्ली की सड़कों पर उतरेंगे छात्र; सवर्ण समाज की आबादी कितनी?
X
( Image Source:  @Ramanand06X- X )
सागर द्विवेदी
By: सागर द्विवेदी

Updated on: 27 Jan 2026 7:10 AM IST

करीब दो हफ्ते पहले लागू किए गए UGC के नए इक्विटी नियम अब देशव्यापी सियासी और सामाजिक टकराव का रूप लेते जा रहे हैं. पहले छात्र, फिर शिक्षक और अब प्रशासनिक व राजनीतिक हलकों तक पहुंच चुकी यह नाराजगी मंगलवार को एक नए मोड़ पर पहुंचने वाली है, जब जनरल कैटेगरी के छात्र 27 जनवरी यानी आज UGC मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन करने जा रहे हैं.

छात्र संगठनों ने इस विरोध को 'छात्र अधिकारों की रक्षा की लड़ाई' बताते हुए देशभर के विद्यार्थियों से बड़ी संख्या में दिल्ली पहुंचने की अपील की है. सोशल मीडिया पर चल रहे संदेशों में इसे शांतिपूर्ण घेराव बताया गया है, लेकिन जिस तरह से इस्तीफों और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आई है, उससे साफ है कि मामला अब सिर्फ कैंपस तक सीमित नहीं रहा.

27 जनवरी को UGC मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन

UGC के नए दिशा-निर्देशों के खिलाफ जनरल कैटेगरी के छात्र मंगलवार को यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) मुख्यालय का शांतिपूर्ण घेराव करेंगे. आयोजकों का कहना है कि यह विरोध किसी समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि 'एकतरफा और असंतुलित नियमों' के खिलाफ है. छात्र समूहों का आरोप है कि नए नियम सामाजिक संतुलन को बिगाड़ सकते हैं और कैंपस में अविश्वास का माहौल पैदा कर सकते हैं.

सरकार बनाम आलोचक: इक्विटी या नया विवाद?

सरकार का दावा है कि UGC के नए नियम उच्च शिक्षा में न्याय, समानता और जवाबदेही लाने की दिशा में बड़ा कदम हैं. वहीं आलोचकों का कहना है कि ये नियम सामाजिक विभाजन को और गहरा कर सकते हैं. शिक्षाविदों के मुताबिक, शिक्षा में किसी भी बड़े सुधार के लिए व्यापक परामर्श और स्पष्ट संवाद की आवश्यकता होती है और फिलहाल यही सबसे बड़ी कमी नजर आ रही है.

क्या है UGC का नया नियम?

बरेली: सिटी मजिस्ट्रेट ने दिया इस्तीफा

इस विवाद ने तब और तूल पकड़ लिया, जब उत्तर प्रदेश के बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने UGC के नए नियमों पर नाराजगी जताते हुए जनरल कैटेगरी के बच्चों के अधिकारों को लेकर चिंता व्यक्त की. इस्तीफे में उन्होंने प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों की चोटी खींचे जाने की घटना का भी जिक्र किया, जिससे धार्मिक संगठनों में भी नाराजगी फैल गई.

अफसर के इस्तीफे के बाद क्या होता है?

प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत किसी सिटी मजिस्ट्रेट का इस्तीफा पहले जिलाधिकारी के माध्यम से राज्य सरकार के नियुक्ति विभाग तक पहुंचता है. इसे स्वीकार या अस्वीकार करने का फैसला पूरी तरह सरकार के विवेक पर होता है और इसकी कोई तय समय-सीमा नहीं है.

क्या हो रहा है विरोध? जनरल कैटेगरी के छात्रों की क्या मांगे हैं

नोएडा: BJP युवा मोर्चा नेता का विद्रोह

नोएडा में BJP युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष राजू पंडित ने भी नए UGC नियमों के विरोध में अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने इसे जनरल कैटेगरी के लिए काला कानून” बताया. यह सत्तारूढ़ दल के भीतर से सामने आया दुर्लभ विरोध माना जा रहा है, जिसने सरकार की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं.

हाजीपुर: सवालों से बचते दिखे केंद्रीय मंत्री

बिहार के हाजीपुर में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय UGC नियमों पर सवालों से बचते नजर आए. पत्रकारों द्वारा बार-बार पूछे जाने पर उन्होंने सीधे जवाब देने के बजाय धार्मिक नारे लगाने शुरू कर दिए. इस घटना को लेकर विपक्ष और छात्र संगठनों ने सरकार पर जवाबदेही से बचने का आरोप लगाया है.

13 जनवरी को लागू हुए नए UGC नियम

UGC ने 13 जनवरी को 'उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम, 2026' लागू किया था. इसके तहत हर कॉलेज और विश्वविद्यालय में 9 सदस्यीय इक्विटी कमेटी बनाना अनिवार्य किया गया है, जिसमें- संस्थान प्रमुख तीन प्रोफेसर, एक कर्मचारी, दो सामान्य नागरिक, दो विशेष आमंत्रित छात्र, एक को-ऑर्डिनेटर शामिल होंगे.

नियमों के अनुसार कम से कम 5 सदस्य SC, ST, OBC, EWS, दिव्यांग और महिला वर्ग से होंगे. आलोचकों का कहना है कि इस कमेटी में जनरल कैटेगरी के लिए कोई अनिवार्य प्रतिनिधित्व नहीं रखा गया है, जबकि भेदभाव के आरोपों की आशंका अक्सर इसी वर्ग के खिलाफ जताई जाती है. छात्रों और शिक्षकों को डर है कि झूठी शिकायतों पर कोई सजा या जुर्माने का प्रावधान नहीं होने से कैंपस में मनमानी कार्रवाई हो सकती है.

UGC का दावा बनाम आंकड़ों की सच्चाई

UGC के मुताबिक, 2019-20 में भेदभाव की 173 शिकायतें, 2023-24 में बढ़कर 378 शिकायतें, 5 साल में कुल 1160 शिकायतें. वहीं देश में- 1153 विश्वविद्यालय, 48 हजार से ज्यादा कॉलेज. 4.20 करोड़ से अधिक छात्र. इस अनुपात में शिकायतों का प्रतिशत 0.0018% के आसपास बैठता है, जिसे लेकर सवाल उठ रहे हैं.

जातिगत भेदभाव से बड़ी समस्या: मानसिक तनाव

विशेषज्ञों का कहना है कि भेदभाव गंभीर मुद्दा है, लेकिन उससे भी बड़ी समस्या छात्रों में बढ़ता मानसिक तनाव है. आंकड़ों के अनुसार- 2019–2023 के बीच 62,886 छात्रों की आत्महत्या, 2021–2025 के बीच 65 IIT छात्रों की मौत. आलोचकों का मानना है कि नए नियम कैंपस में अविश्वास और टकराव बढ़ा सकते हैं.

BJP के भीतर भी बढ़ रहा विरोध

UGC नियमों को लेकर अब बीजेपी के अंदर से भी विरोध सामने आने लगा है. लखनऊ में बीजेपी के 11 पदाधिकारियों का इस्तीफा. नोएडा में युवा मोर्चा नेता का त्यागपत्र. पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजय सिंह की नाराजगी. डॉ. संजय सिंह ने कहा कि 'न्याय तभी सार्थक होता है, जब वह सभी के लिए समान और निष्पक्ष हो.' छात्र आंदोलन, अफसरों के इस्तीफे और राजनीतिक असहजता के बीच UGC के नए नियम अब राष्ट्रीय बहस का विषय बन चुके हैं. अब सवाल सिर्फ नियमों का नहीं, बल्कि सरकार की संवेदनशीलता, संवाद और जवाबदेही का भी है.

2011 के जनगणना के मुताबिक

India News
अगला लेख