राहुल गांधी ने नहीं पहना नॉर्थ-ईस्ट का पटका! 'एट होम रिसेप्शन' की फोटो पर बवाल, यूजर्स बोले– राजनाथ सिंह ने भी क्यों नहीं पहना?
राष्ट्रपति भवन के ‘एट होम’ रिसेप्शन में नॉर्थ-ईस्ट पटका न पहनने पर राहुल गांधी घिरे, कांग्रेस-बीजेपी में तीखी बयानबाजी तेज हो गई है.
राष्ट्रपति भवन में सोमवार को आयोजित ‘एट होम रिसेप्शन’ इस बार नॉर्थ-ईस्ट की सांस्कृतिक झलक के नाम रहा, जहां परंपरा और प्रतीकात्मकता को खास तौर पर उभारा गया. प्रधानमंत्री से लेकर यूरोपीय संघ के प्रतिनिधि, विदेशी राजदूत और तमाम अतिथि सभी को नॉर्थ-ईस्ट की पहचान माने जाने वाले पारंपरिक पटका/गमोसा भेंट किए गए. इस आयोजन का उद्देश्य क्षेत्रीय विविधता और सांस्कृतिक सम्मान को एक साझा मंच पर लाना था. तस्वीरों में अधिकांश मेहमानों ने इसे पहनकर समारोह की थीम को अपनाया दिखाया.
इसी मंच पर राहुल गांधी का पटका न पहनना चर्चा का केंद्र बन गया. सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने पटका स्वीकार तो किया, लेकिन पहनने के बजाय हाथ में ही रखा. यह भी दावा किया गया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें दो बार इसे पहनने का संकेत दिया, पर उन्होंने इसे नजरअंदाज किया. कार्यक्रम से सामने आई तस्वीरों ने इस फैसले को और अधिक उजागर किया, जिससे राजनीतिक हलकों में सवाल खड़े हो गए.
तस्वीरों में दिखा फर्क, खड़गे ने पहना पटका
उसी फ्रेम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पटका पहने नजर आए, जो राहुल गांधी के बिल्कुल पास खड़े थे. यह दृश्य अपने-आप में तुलना का आधार बन गया और राजनीतिक व्याख्याओं को हवा मिली. समर्थकों और आलोचकों दोनों ने तस्वीरों के आधार पर अपने-अपने तर्क पेश किए. एक ओर इसे व्यक्तिगत पसंद बताया गया, तो दूसरी ओर इसे सांस्कृतिक प्रतीक के अपमान के रूप में देखा गया.
कांग्रेस ने लगाया ‘फर्जी ड्रामा’ का आरोप
कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने पूरे विवाद को “फर्जी ड्रामा” करार देते हुए कहा कि राहुल गांधी का नॉर्थ-ईस्ट के प्रति लगाव जगजाहिर है. उन्होंने भारत जोड़ो यात्रा का हवाला देते हुए कहा कि राहुल गांधी ने नफरत की राजनीति के खिलाफ संदेश दिया है. टैगोर का आरोप था कि राष्ट्रपति भवन जैसे गरिमामय स्थान से जुड़ी घटनाओं पर राजनीति करना गैर-जिम्मेदाराना है और इसे राजनीतिक रंग देना गलत है.
बीजेपी का पलटवार
बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि राष्ट्रपति के अनुरोध के बावजूद पटका न पहनना नॉर्थ-ईस्ट की संस्कृति और आदिवासी समाज का अपमान है. बीजेपी ने इसे एक प्रतीकात्मक अस्वीकार के तौर पर पेश किया और कांग्रेस नेतृत्व पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया. यह बयानबाजी देखते ही देखते सियासी बहस में बदल गई.
प्रोटोकॉल, राजनीति और असम का संदर्भ
इस बीच सोशल मीडिया यूजर दिब्येंदु के. दास की टिप्पणी ने एक नया एंगल जोड़ दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि इसे “नॉर्थ-ईस्ट गमोसा” कहना ही गलत है, क्योंकि गमोसा असम की विशिष्ट पहचान है. उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा गमोसा न पहनने पर भी सवाल उठाए और असम चुनावों के संदर्भ में राजनीतिक संदेश तलाशने की बात कही. कुल मिलाकर, एक सांस्कृतिक प्रतीक पर शुरू हुई चर्चा अब प्रोटोकॉल, क्षेत्रीय पहचान और चुनावी राजनीति के जटिल समीकरणों तक पहुंच गई है.
इसके बाद सोशल मीडिया पर एक और वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें राहुल गांधी को पहनाया गया पटका/गमोसा उनकी कुर्सी पर रखा दिख रहा है.





