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ट्रंप का टैरिफ बम हो जाएगा फुस्‍स, मुंह देखता रह गया अमेरिका और भारत ने EU से कर ली ट्रेड डील; चीन को भी मिल जाएगा सबक

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त टैरिफ दबाव के बीच भारत ने यूरोपीय संघ (EU) के साथ ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (FTA) कर बड़ा रणनीतिक दांव खेल दिया है. इस डील से भारत को यूरोप के विशाल बाजार तक आसान पहुंच मिलेगी, जिससे अमेरिकी टैरिफ का असर काफी हद तक कमजोर पड़ सकता है. भारत-EU समझौता न सिर्फ अमेरिका के लिए झटका माना जा रहा है, बल्कि इससे चीन को भी साफ संदेश गया है कि भारत अब वैकल्पिक और मजबूत वैश्विक व्यापार साझेदारियां खड़ी कर रहा है.

ट्रंप का टैरिफ बम हो जाएगा फुस्‍स,  मुंह देखता रह गया अमेरिका और भारत ने EU से कर ली ट्रेड डील; चीन को भी मिल जाएगा सबक
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( Image Source:  @narendramodi-X )
सागर द्विवेदी
Edited By: सागर द्विवेदी

Published on: 26 Jan 2026 11:35 PM

करीब दो दशकों तक चली लंबी बातचीत के बाद भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच व्यापक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर आखिरकार सहमति बन गई है. इसे भारत की व्यापार कूटनीति की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है. इस समझौते से न सिर्फ दोनों पक्षों के बीच व्यापार और निवेश को जबरदस्त बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, बल्कि भारत और EU के आर्थिक रिश्ते भी एक नई ऊंचाई पर पहुंचेंगे.

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने सोमवार को इस ऐतिहासिक घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए कहा कि समझौते पर बातचीत सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है. उनके मुताबिक, यह डील भारत के नजरिए से संतुलित और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था को यूरोपीय संघ के साथ और गहराई से जोड़ने में मदद करेगी. 'वार्ताएं सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी हैं.'

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने साफ शब्दों में कहा कि 'वार्ताएं सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी हैं। समझौते को अंतिम रूप दे दिया गया है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह FTA भारत के लिए दीर्घकालिक फायदे लेकर आएगा और भारतीय उद्योगों को यूरोप के बड़े बाजार तक आसान पहुंच देगा.

भारत को लेकर यूरोपीय आयोग प्रमुख का बड़ा बयान

इससे पहले दिन में, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन, जो इस बार भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि थीं, ने भारत की वैश्विक भूमिका को बेहद अहम बताया. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि 'गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि बनना जीवन का सबसे बड़ा सम्मान है। एक सफल भारत दुनिया को अधिक स्थिर, समृद्ध और सुरक्षित बनाता है, और इससे हम सभी को लाभ होता है.'

लीगल स्क्रबिंग जारी, इसी साल साइन होने की उम्मीद

राजेश अग्रवाल के अनुसार, फिलहाल FTA के टेक्स्ट की लीगल स्क्रबिंग की जा रही है. सभी प्रक्रियागत औपचारिकताओं को जल्द पूरा कर समझौते पर हस्ताक्षर करने की तैयारी है. उम्मीद है कि यह समझौता इसी साल साइन हो जाएगा और अगले साल की शुरुआत में लागू हो सकता है. भारत में इसे लागू करने के लिए केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी जरूरी होगी, जबकि यूरोपीय संघ में इसे यूरोपीय संसद से अनुमोदन मिलना होगा, जिसमें कुछ समय लग सकता है.

इंडिया-ईयू समिट में होगा औपचारिक ऐलान

इस ऐतिहासिक समझौते की औपचारिक घोषणा मंगलवार को नई दिल्ली में होने वाले भारत-EU शिखर सम्मेलन में होने की संभावना है. इस समिट में यूरोपीय आयोग अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा शामिल होंगे. दोनों नेता 27 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात करेंगे. सभी व्यापार समझौतों की जननी. केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत-EU FTA को भारत द्वारा अब तक किया गया “mother of all trade deals” बताया है. यह समझौता न सिर्फ अपने आकार में विशाल है, बल्कि रणनीतिक रूप से भी बेहद अहम माना जा रहा है.

2007 से चल रही थी बातचीत

भारत और यूरोपीय संघ के बीच इस समझौते पर बातचीत 2007 में शुरू हुई थी. यह भारत की सबसे लंबी चली व्यापार वार्ताओं में से एक है. इस FTA में कुल 24 चैप्टर शामिल हैं, जिनमें वस्तुओं का व्यापार, सेवाएं और निवेश प्रमुख हैं. इसके साथ ही निवेश संरक्षण और Geographical Indications (GI) पर अलग-अलग समानांतर बातचीत भी हुई है.

लेबर-इंटेंसिव सेक्टर को मिलेगा बड़ा फायदा

इस समझौते के तहत भारत के कई लेबर-इंटेंसिव सेक्टर को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है. इनमें शामिल हैं:

  • टेक्सटाइल
  • केमिकल्स
  • जेम्स एंड ज्वैलरी
  • इलेक्ट्रिकल मशीनरी
  • लेदर और फुटवियर

फिलहाल EU में भारतीय उत्पादों पर औसतन 3.8% टैरिफ लगता है, लेकिन लेबर-इंटेंसिव प्रोडक्ट्स पर यह शुल्क करीब 10% तक है.वहीं भारत में EU से आने वाले उत्पादों पर औसतन 9.3% टैरिफ है, जिसमें ऑटोमोबाइल और उसके पार्ट्स पर 35.5% तक ड्यूटी लगती है. 90% से ज्यादा वस्तुओं पर टैरिफ में कटौती. आमतौर पर FTA के तहत दोनों पक्ष 90% से ज्यादा वस्तुओं पर आयात शुल्क कम या खत्म करते हैं. इसके अलावा-

  • टेलीकॉम
  • ट्रांसपोर्ट
  • अकाउंटिंग और ऑडिटिंग
  • जैसे सेक्टरों में सेवाओं के व्यापार को भी उदार बनाया जाता है.
  • वैश्विक व्यापार संकट के बीच रणनीतिक अहमियत

अमेरिका द्वारा लगाए गए ऊंचे टैरिफ के कारण वैश्विक व्यापार पहले से ही दबाव में है. भारत को कुछ उत्पादों पर 50% तक का टैरिफ झेलना पड़ रहा है. ऐसे में भारत-EU FTA भारतीय निर्यातकों के लिए नए बाजारों की राह खोलने और पारंपरिक बाजारों पर निर्भरता कम करने में अहम भूमिका निभाएगा. साथ ही, इससे चीन पर निर्भरता घटाने में भी मदद मिलेगी. भारत-EU व्यापार का मौजूदा आंकड़ा वित्त वर्ष 2024-25 में-

  • भारत-EU वस्तु व्यापार: $136.53 अरब
  • भारत का निर्यात: $75.85 अरब
  • आयात: $60.68 अरब

EU फिलहाल भारत का सबसे बड़ा वस्तु व्यापार भागीदार है. सेवाओं का व्यापार $83.10 अरब रहा. भारत ने EU के साथ $15.17 अरब का व्यापार अधिशेष दर्ज किया. भारत के प्रमुख निर्यात और आयात.

  • EU को भारत का प्रमुख निर्यात
  • पेट्रोलियम उत्पाद: $15 अरब
  • इलेक्ट्रॉनिक्स: $11.3 अरब
  • टेक्सटाइल और गारमेंट्स: $6.1 अरब
  • फार्मा, स्टील, जेम्स एंड ज्वैलरी, फुटवियर आदि
  • EU से भारत का प्रमुख आयात
  • मशीनरी और कंप्यूटर: $13 अरब
  • इलेक्ट्रॉनिक्स: $9.4 अरब
  • एयरक्राफ्ट, मेडिकल डिवाइसेज, केमिकल्स, प्लास्टिक
  • NDA सरकार की ट्रेड डिप्लोमेसी

भारत-EU FTA के साथ NDA सरकार ने 2014 के बाद अब तक 8 बड़े व्यापार समझौते फाइनल कर लिए हैं. इनमें शामिल हैं- ऑस्ट्रेलिया, UK, UAE, EFTA ब्लॉक, न्यूज़ीलैंड, ओमान, मॉरीशस.

नरेंद्र मोदी
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