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नंदीग्राम छोड़ क्या Mamata Banerjee ने Suvendu Adhikari को फंसा दिया, BJP को उल्टा पड़ेगा दांव?

ममता बनर्जी ने भवानीपुर से चुनाव लड़ने का ऐलान कर बंगाल की सियासत गरमा दी है. नंदीग्राम में TMC की नई चाल और सुवेंदु अधिकारी की चुनौती ने मुकाबले को हाई-प्रोफाइल बना दिया है.

नंदीग्राम छोड़ क्या Mamata Banerjee ने Suvendu Adhikari को फंसा दिया, BJP को उल्टा पड़ेगा दांव?
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( Image Source:  ANI )
सागर द्विवेदी
By: सागर द्विवेदी5 Mins Read

Published on: 17 March 2026 9:50 PM

पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर हाई-वोल्टेज टकराव की तरफ बढ़ चुकी है. Mamata Banerjee ने 2026 विधानसभा चुनाव को लेकर ऐसा दांव चला है, जिसने सियासी पारा अचानक चढ़ा दिया है. उन्होंने साफ कर दिया है कि इस बार वह कोलकाता की भबानीपुर सीट से चुनाव लड़ेंगी. वही सीट जहां से उन्होंने पहले भी बड़ी जीत दर्ज की थी. लेकिन इस बार मुकाबला आसान नहीं होने वाला, क्योंकि सामने होंगे बीजेपी के दिग्गज नेता Suvendu Adhikari. ऐसे में यह लड़ाई अब सिर्फ एक सीट की नहीं, बल्कि बंगाल की सियासत की सबसे बड़ी जंग बन चुकी है.

इस पूरे समीकरण को और दिलचस्प बनाता है नंदीग्राम का खेल. ममता बनर्जी ने इस बार नंदीग्राम सीट छोड़ दी है. वही सीट जहां 2021 में उन्हें सुवेंदु अधिकारी ने करीब 2,000 वोटों से हराया था. लेकिन यह फैसला सिर्फ पीछे हटना नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति माना जा रहा है. ताजा घटनाक्रम में Pabitra Kar ने टीएमसी जॉइन की है और उन्हें नंदीग्राम TMC ने टिकट दे दिया है. जो सुवेंदु अधिकारी के करीबी माने जाते हैं. ऐसे में माना जा रहा है कि ममता ने नंदीग्राम छोड़कर एक तरह से सुवेंदु के ही गढ़ में ‘सियासी जाल’ बिछा दिया है, ताकि उनके समीकरण बिगाड़े जा सकें.

भबानीपुर की बात करें तो यह सीट ममता के लिए मजबूत किला रही है. 2021 के उपचुनाव में उन्होंने यहां से 58,000 से ज्यादा वोटों से जीत हासिल की थी. यही वजह है कि उन्होंने एक बार फिर इस सुरक्षित सीट पर दांव खेला है. दूसरी तरफ बीजेपी ने सुवेंदु अधिकारी को यहां उतारकर मुकाबले को सीधा और हाई-प्रोफाइल बना दिया है.

दरअसल, सुवेंदु अधिकारी वही नेता हैं जो कभी ममता सरकार में मंत्री थे और टीएमसी के मजबूत स्तंभ माने जाते थे. लेकिन बाद में उन्होंने बगावत कर पार्टी छोड़ दी और बीजेपी में शामिल हो गए. 2021 के चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हराकर बड़ा राजनीतिक उलटफेर किया था. अब 2026 की जंग में तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है. एक तरफ ममता बनर्जी अपनी मजबूत सीट से चुनाव लड़कर सुरक्षित जीत चाहती हैं, तो दूसरी तरफ बीजेपी ने उनके सामने उसी नेता को उतार दिया है, जिसने उन्हें सबसे बड़ा राजनीतिक झटका दिया था. ऐसे में भबानीपुर और नंदीग्राम, दोनों सीटें इस बार बंगाल की सियासत की दिशा तय करने वाली बन चुकी हैं.

नंदीग्राम में TMC का क्या प्लान है?

नंदीग्राम, जहां से Suvendu Adhikari मौजूदा विधायक हैं, वहां TMC ने Pabitra Kar को मैदान में उतारा है. दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने उम्मीदवार घोषित होने से ठीक पहले ही पार्टी जॉइन की और पहले बीजेपी से जुड़े रहे हैं. इसे TMC की रणनीतिक चाल माना जा रहा है, जो सीधे विरोधी खेमे में सेंध लगाने की कोशिश है.

क्या भबानीपुर Mamata का सबसे मजबूत किला है?

भबानीपुर सीट ममता बनर्जी की पारंपरिक मजबूत सीट रही है. 2011 से अब तक वह यहां तीन बार जीत चुकी हैं. 2021 में नंदीग्राम हारने के बाद उन्होंने यहीं से उपचुनाव जीतकर वापसी की थी और 58,000 से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की थी. हालांकि इस बार मुकाबला पहले से ज्यादा कड़ा माना जा रहा है.

क्या भाजपा का दांव उल्टा पड़ सकता है?

बीजेपी को उम्मीद है कि भबानीपुर में TMC की पकड़ कमजोर हुई है. 2024 लोकसभा चुनाव में यहां TMC की बढ़त घटकर सिर्फ 8,297 वोट रह गई, जबकि 2021 में यह अंतर 28,000 से ज्यादा था. बीजेपी इसे अवसर मान रही है, लेकिन ममता की जमीनी पकड़ अब भी मजबूत मानी जाती है.

ममता बनर्जी ने बीजेपी और चुनाव आयोग पर क्या कहा?

226 सीटों का बड़ा दावा

ममता बनर्जी ने भरोसा जताया है कि उनकी पार्टी इस बार 226 सीटें जीतकर फिर से सत्ता में वापसी करेगी. उन्होंने चुनाव को बेहद अहम बताते हुए विपक्ष और चुनावी प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए.

TMC की उम्मीदवार सूची में क्या खास है?

TMC ने 294 में से 291 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि 3 सीटें सहयोगी BGPM के लिए छोड़ी हैं. पार्टी ने 53 महिलाओं, 95 SC/ST और 48 अल्पसंख्यक उम्मीदवारों को टिकट दिया है. साथ ही एंटी-इनकंबेंसी को ध्यान में रखते हुए 74 मौजूदा विधायकों के टिकट काटे गए हैं.

कौन-कौन हैं TMC के बड़े चेहरे?

इस बार TMC ने कई चर्चित चेहरों को मैदान में उतारा है, जिनमें

  • Soham Chakraborty (करीमपुर)
  • Madan Mitra (कमरहाटी)
  • Sayantika Banerjee (बरानगर)
  • Raj Chakraborty (बैरकपुर)
  • Kunal Ghosh (बेहाला)
  • Debangshu Bhattacharya (चिनसुरा)

जैसे नाम शामिल हैं. संदेशखाली सीट भी खास चर्चा में है, जहां 2024 में जमीन कब्जे और महिलाओं के उत्पीड़न के आरोपों ने सियासी माहौल गर्म कर दिया था.

क्या यह चुनाव ‘अस्तित्व की लड़ाई’ बन चुका है?

ममता बनर्जी ने इस चुनाव को पश्चिम बंगाल के ‘अस्तित्व की लड़ाई’ का नाम दिया है. उनके मुताबिक, यह सिर्फ सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि राज्य की पहचान और स्वाभिमान का सवाल है. 23 और 29 अप्रैल को होने वाली वोटिंग और 4 मई को आने वाले नतीजों से पहले ममता का नंदीग्राम छोड़ना बड़ा गेमचेंजर माना जा रहा है. अब सबसे बड़ा सवाल यही है. क्या यह रणनीति बीजेपी पर ही भारी पड़ेगी?

विधानसभा चुनाव 2026ममता बनर्जी
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