Ground Report: तरुण की हत्या के 15 दिन बाद भी काली बस्ती वीरान, उत्तम नगर का ऐसा है आंखों देखा हाल
तरुण की हत्या के बाद काली बस्ती में जिंदगी थम सी गई है. पुलिस नाकेबंदी, बंद कारोबार और लोगों के बीच बढ़ती दूरी ने इलाके का माहौल बदल दिया.
दिल्ली के उत्तम नगर की काली बस्ती, जो कभी सुबह से देर रात तक रौनक और चहल-पहल से भरी रहती थी, वह अब खामोशी में डूबी नजर आती है. तरुण की हत्या के बाद यहां का माहौल पूरी तरह बदल गया है. गलियां सूनी हैं, दुकानें आधी खुली या बंद पड़ी हैं और लोगों के चेहरों पर 'डर' साफ झलक रहा है. पुलिस की सख्त पहरेदारी ने जहां सुरक्षा का अहसास दिलाने की कोशिश की है, वहीं रोजमर्रा की जिंदगी को थाम भी दिया. स्थानीय कारोबार लगभग ठप पड़ गया है, छोटे दुकानदार और ठेले वाले नुकसान झेल रहे हैं.
इस घटना से सबसे सबसे बड़ी चोट लोगों के भरोसे पर लगी है. पड़ोसियों के बीच शक की दीवारें खड़ी हो गई हैं. बच्चे घरों में कैद हैं और महिलाएं बाहर निकलने से हिचक रही हैं. यह सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि एक पूरे इलाके की रफ्तार, रिश्तों और विश्वास के टूटने की कहानी बन गई है. जानिए, जब स्टेट मिरर के प्रतिनिधि ने काली बस्ती के जिस गली में तरुण कुमार रहता, वहां नाकेबंदी को तोड़कर पहुंचा तो पुलिस वालों ने उनके परिजनों से क्यों नहीं करने दी बात, क्या बोलकर वहां उन्हें चलता कर दिया.
तरुण हत्याकांड के 15 दिन बाद काली बस्ती में कैसा है माहौल?
दरअसल, दिल्ली के उत्तम नगर के काली बस्ती में होली के दिन यानी चार मार्च को मुस्लिम परिवार के लोगों ने गुब्बारा विवाद की आड़ में देर रात को धोखे में लेकर तरुण कुमार की हत्या कर दी. उसके बाद से क्षेत्र में तनाव फैला हुआ है. इस घटना को लेकर मुस्लिम और हिंदू पक्षों में असंतोष है. जिसका जिक्र दबे सुर में वहां के रहने वाले करते हैं. 15 दिन बाद भी काली बस्ती के चारों तरफ दिल्ली पुलिस और आरएएफ की ऐसी नाकेबंदी है कि परिंदा भी पर न मार सके. लोगों से बातचीत में साफ संकेत मिला कि दशकों से भरोसे के साथ रह रहे दोनों समुदाय के बीच, इस घटना से आपसी विश्वास की मजबूत दीवारें दरक गई हैं. यही वजह है कि पुलिस ने ईद और रामनवमी के मद्देनजर अभी कॉलोनी नाकेबंदी नहीं खोली है.
होली के दिन क्या हुआ था, जिसने पूरे इलाके को हिला दिया?
मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों का कहना है कि मुझे ऊपर से किसी को अंदर न घुसने देने का आदेश है. केवल यहां रहने वाले पहचान पत्र दिखा कर बाहर जा सकते हैं और वापस घर लौट सकते हैं. अहम सवाल, आखिर होली के दिन क्या हुआ, जिससने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया.
स्टेट मिरर का प्रतिनिधि कैसे पहुंचा तरुण के घर तक?
यहां पर इस बात का जिक्र कर दें कि तरुण की हत्या के 15वें दिन दोपहर के समय स्टेट मिरर का प्रतिनिधि काली बस्ती दोपहर के समय पहुंचा था. वहां पहुंचे के बाद प्रतिनिधि ने हर मुमकिन कोशिश की कि वो वहां तक पहुंच जाए और पीड़ित के परिजनों से बात करे कि आखिर उस दिन हुआ क्या था? कई तरफ से काली बस्ती जाने की कोशिश की, लेकिन चारों तरफ पुलिस की नाकेबंदी का सामना करना पड़ा. काली बस्ती में एंट्री के हर मुंहाने पर दिल्ली पुलिस, आरएएफ और महिला पुलिसकर्मी अलर्ट मोड में डटे मिले. लाख समझाने के बाद भी पुलिस वालों ने अंदर जाने की इजाजत नहीं दी.
अंत में काली बस्ती के एक छोर पर जाकर लोगों से बात की कि आखिर कोई तो रास्ता होगा, जिससे होकर वहां पहुंचा जा सकता है. इसके जवाब में अधिकांश लोगों ने कहा कि ऐसा संभव नहीं है. लेकिन एक महिला सामने पतली गली खड़ी थी, जिसकी मुझ पर नजर थी. वो पास में आकर हंसते हुए बोली. आप परेशान क्यों हो रहे हैं? वहां नहीं जा सकते. वापस चले जाइए. जब उनसे कहा कि काली बस्ती तीन तरफ से उत्तम नगर से और एक तरफ हस्तसाल गांव और विकासपुरी से घिरा है. ऐसे कैसे हो सकता है कि कोई पतली गली न हो, जहां से पुलिस को चकमा देकर वहां पहुंचा जा सके. इस पर महिला बोली, हां, एक विकल्प है. जिसके जरिए आप वहां तक जा सकते हैं, लेकिन वहां पर भी पुलिस मिल गई तो आपको निराशा हाथ लगेगी.
इतना कहने के बाद महिला ने 12 से 13 साल के अपने बेटे को आवाज देते हुए बुलाया. फिर उसे कहा - इन्हें इस सात फुट वाले गली से ले जाकर गुरुद्वारा वाले पार्क साइड से अंदर जाने का रास्ता बता दो. महिला का बेटा तो पार्क के एक छोर पर अंदर जाने का रास्ता बताकर चला गया. डीडीए पार्क के दूसरे छोड़ तक पहुंचने पर कुछ बच्चे हंसने लगे. कहा, अंकल कहां जा रहे हो, पुलिस वाला रोक देगा. तपाक से दूसरे बच्चे ने कहा, जाओ, अभी इस गेट पर पुलिस वाला नहीं है. प्रतिनिधि ने दोनों से कहा, जाने दो, लौटा ही देगा न. इस पर दोनों बच्चे ने कहा, फिर जाओ अंकल.
काली बस्ती के गलियों में घुसते ही जो नजारा देखने को मिला वो सकते में डालने वाली थी. पुलिस की नाकेबंदी सिर्फ काली बस्ती के बाहरी इलाके में नहीं, बल्कि तरुण के घर के चारों साइड की गलियों के मुंहाने पर भी था. गलियां भले ही संकरी थीं, लेकिन पुलिस वालों की तैनाती काफी संख्या में दिखाई दी.
तरुण के घर के पास क्या नजारा देखने को मिला?
पुलिस के नाकेबंदी से बचते हुए जैसे ही प्रतिनिधि तरुण के घर तक पहुंचा, तो मोहल्ले वालों के मुताबिक पिछले दशकों में ऐसी नाकेबंदी कभी दिखाई नहीं दी. ऐसी घटनाएं भी कभी काली बस्ती नहीं हुई. स्टेट मिरर के प्रतिनिधि ने देखा कि तरुण का घर जिस गली में है, वो मुश्किल से आठ से फुूट चौड़ी थी. उस गली में दोनों किनारे से कुछ आए हुए रिश्तेदार व करीबी बैठे थे. सभी लोग दो पंक्तियों में नीचे बैठे हुए थे.
क्या काली बस्ती में भरोसे की दीवारें टूट चुकी हैं?
स्टेट मिरर के संवाददाता ने जब उनसे बात करने की कोशिश की तो मौके पर तैनात महिला और पुरुष पुलिसकर्मियों ने नाराजगी जताई. इससे पहले तक उन लोगों को लगा था कि ये भी गली मोहल्ले का आदमी हैं. लेकिन कुछ जानने की कोशिश करते हुए वो पहचान गए कि कोई गैर कानूनी तरीके से नाकेबंदी को भेदकर यहां तक पहुंच गया. तुरंत आरएएफ और पुलिसकर्मियों ने संवाददाता को पकड़ लिया. यहां तक आप कैसे आ गए? क्यों आए, किसने आने दिया. संवाददाता को ऐसा लगा, जैसे कि वो कोई बांग्लादेशी घुसपैठिया हो.
पुलिसकर्मियों ने सख्त नाराजगी जताई. एक जवान ने कहा कि पुलिसिया रौब में कहा, तुम यहां आ कैसे गए? चुपचाप यहां से रफ्फूचक्कर हो जाओ. चलो भागो यहां से. भागते हो की नहीं. पुलिसकर्मियों ने संवाददाता का मोबाइाल भी ले लिया. कहा, तुमने फोटो कैसे ली. हालांकि, तब तक स्टेट मिरर का प्रतिनिधि फोटो ले नहीं पाया था, लेकिन उसकी मंशा तरुण की गलियों में बैठे दर्जनों लोगों की फोटो लेने की जरूर थी. इस बीच पुलिसकर्मी ने मोबाइल चेक करने के बाद, बिना पलक झपके सामने वाली गली से चले जाओ.
आप तो बात कर लोगो, हमारी तो नौकरी चली जाएगाी!
जब, पुलिस के इस रवैये पर संवाददाता ने ऐतराज करते हुए कहा कि मुझे पता है, नाकेबंदी है. तो क्या हो गया. मैं कोई विदेश से नहीं आया. इसी इलाके रहने वाला हूं. जानकारी लेने आ गया तो क्या हो गया? तुम्हें किसी को यहां नहीं पहुंचने देने का आदेश है, इसका मतलब यह तो नहीं, कोई पास के कॉलोनी का इंसान आ जाए, तो तुम बदतमीमी से बात करो. तुम्हें किसने दिया ये आदेश. कोई आर्डर है. इस पर थोड़ा सकपकाते हुए उक्त जवान ने कहा, आपको पता है न! चारों तरफ नाकेबंदी है. उपर से आदेश है. अगर ये बात उपर तक चली गई न तो हमारी नौकरी चली जाएगी.
सख्ती नहीं करूंगा, आप ही सवाल पूछोगे, पुलिस कहां थी
भाई साहब आप चले जाओ. यह कहते हुए, उसने मुझसे पहचान पत्र मांगा. मैंने जेब से निकालकर से स्टेट मिरर की ओर जारी अपना आईकार्ड उसके हाथों में सौंप दिया. इसको गहरी नजर से देखते हुए पुलिसकर्मी ने कहा कि भाई साहब, अभी आप यहां चले जाओ. मुझे कोई शौक नहीं है, यहां से आपको भगाने की. हम तो बस, अपनी ड्यूटी पूरी कर रहे हैं. सख्ती नहीं करूंगा तो आप ही सवाल पूछोगो, पुलिस कहां थी, क्या कर रही थी? हालांकि, इसके अलावा, पुलिसकर्मियों ने कोई बदतमीजी नहीं की. बस तत्काल वहां से चले जाने का अनुरोध किया. ऐसा पुलिसवालों ने विश्वास के साथ अधिकारपूर्वक जरूर कहा. साथ ही ये भी कहा कि ये उपर से आदेश है. हम कुछ नहीं कर सकते.
मामला ठंडा होने के बाद आना, चाट खिलाऊंगा और चाय भी पिलाऊंगा
आप मामला ठंडा पड़ने के बाद यहां आना, हम आपको चाय पिलाएंगे और चाट भी खिलाएंगे. आप जो कहोगे, आपकी खातिरदारी करेंगे. बस आप अभी यहां से चले जाओ. ऐसा कहते समय पुलिसवालों की मजबूरी उनके चेहरे पर साफ झलक रही थी. इससे पहले पुलिसकर्मी की ओर से तैनात एक फोटोग्राफर ने कहा कि मैं सरकार की ओर से यहां ड्यूटी पर लगाया गया हूं. भाई साहब! मैं, वही फोटो लेता हूं, जिसकी तस्वीर लेने का इशारा पुलिस वाले करते हैं. इस पर मैंने, कहां, भाई दूर से आया हूं. तुम्हारे पास कोई फोटो है तो है तो व्हाटसऐप कर दो. उसने कहा कि, क्या बात करते हो आप, बस आप यहां से चले जाओ. जैसा ये लोग कहते हैं. अभी तक यहां पर कोई मीडिया वाला नहीं आ पाया है. उसके बाद मैं तरुण के घर के चारों ओर फैले नाकेबंदी को पार करते हुए बाहर निकल गया. लेकिन मौके पर काली बस्ती में वीरानगी छाई हुई थी, और लोग एक-दूसरे को अजनबी की तरह देख रहे थे, उससे साफ था कि शांति के बीच कुछ भी सहज नहीं है.
काली बस्ती की आबादी 25 हजार से ज्यादा
यहां पर इस बात का जिक्र कर दूं कि काली बस्ती की आबादी 25 हजार से ज्यादा है. काली बस्ती के चारों तरफ नाकेबंदी है. पुलिस और आरएएफ के जवाब खड़े हैं. काली बस्ती किले में तब्दील है. सिर्फ काली बस्ती में रहने वालों को पहचान पत्र के आधार पर जाने आने का अधिकार है.
संघ के दस्ते सक्रिय, पुलिस ने आक्रोश रैली में बोलने पर लगाई रोक
बीजेपी के एक नेता ने नाम न बताने पर कहा कि काली बस्ती में अभी संघ के नेता और कार्यकर्ता सक्रिय हैं. बीजेपी इसे सियासी मुद्दा नहीं बनाना चाहती. इसलिए संघ ने खुद कमान संभाल ली है. 14 मार्च को काली बस्ती से करीब एक किलोमीटर दूर अयप्पा पार्क में हिंदू संगठनों से विशाल आक्रोश सभा का आयोजन किया था. इस सभा में पुलिस अफसरों ने किसे कुछ नहीं बोलने दिया. पुलिस वालों कहा कि यहां पर सिर्फ सदभावना की बातें कीजिए. जिसने भी कुछ बोलने की कोशिश की पुलिस वाले उन्हें मंच से उतार कर वहां जाने को कह देते थे. इस आक्रोश रैली में संघ के जिला और क्षेत्रीय स्तर के नेता खास रणीनीति के तहत ही शामिल हुए थे. काली बस्ती ई ब्लॉक के एक दुकानदार ने कहा कि पुलिस वालों ने सभी नेताओं को मंच से भगा दिया. इस बात को लेकर लोगों में सख्त नाराजगी है. हालांकि, क्षेत्र में चारों तरफ हिंदू संगठनों के झंडे लगे दिखाई दिए.
किसने क्या कहा?
लोगों में गहरा आक्रोश
स्थानीय नेता मनोज खंडेलवाल ने कहा कि जो कुछ हुआ वो इस इलाके में पहले कभी नहीं हुआ. इस बात को लेकर हिंदुओं में गहरा आक्रोश है. लोग सख्त कारठवाई चाहते हैं.
क्या कहूं, वक्त-वक्त की बात है साहब!
उत्तम नगर थाना नजफगढ़ रोड पर है. मेन रोड से थाने को छावनी में तब्दील कर दिया गया है. थाने के अंदर आरएएफ और दिल्ली पुलिस के जवान डेरा जमाए हुए हैं. थाने की किलेबंदी और लोगों की आवाजाही पर नजर रख रहे दूसरे थाने के पुलिसकर्मी ने यह पूछने पर कि अब ये दिन भी देखने पड़ रहे हैं कि पुलिस थाना भी सुरक्षा घेरे में हैं. इस पर उन्होंने कहा कि, 'क्या कहूं साहब, वक्त वक्त की बात है. जब तक ऊपर यही आदेश है माहौल भी बदल गया है.' उक्त जवान ने कहा कि मैं, पास के मोहन गार्डन थाने में तैनात हूं, लेकिन मेरी ड्यूटी यहां पर लगाई गई. दूसरे थानों से भी पुलिसकर्मियों को यहां ड्यूटी पर तैनात किया गया है.
विश्व हिंदू परिषद के जिला प्रमुख रहे और तरुण के पड़ोसी मोहन लाल शर्मा का कहना है कि अभी तक इस इलाके में ऐसा कभी नहीं हुआ. इस बार होली की दिन जो हुआ, उसने सभी को चौंका दिया. उन्होंने कहा कि घटना के बाद से सभी के मन में एक-दूसरे के प्रति अविश्वास का भाव घर कर गया है. उनके इस बयान में दम भी है. ऐसा इसलिए कि जब उनके ही पड़ोसी व मुस्लिम परिवार के सदस्य से स्टेट मिरर के प्रतिनिधि ने पूछा कि मोहन लाल शर्मा कहा हैं, वह, उन्हें जानता था, पर न बताने का भाव चेहरे पर लाते हुए कहा कि मुझे नहीं पता वो कौन हैं?
टूटा भरोसा, यूपी के मंत्री को रेखा गुप्ता ने दिया भरोसा
मोहन लाल शर्मा ने अपने स्टेशनरी की दुकान पर मुलाकात के दौरान बातचीत में बताया कि अभी तक सभी लोग साथ साथ रहते आए हैं. पर इस घटना ने एक—दूसरे के बीच भरोसे में दरार डाल दी है. उन्होंने कहा कि तरुण के परिजन यूपी सरकार में मंत्री दिनेश खटीक के साथ मिलकर दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता से मिले हैं. प्रतिनिधिमंडल ने सीएम से पीड़ित परिवार के सदस्य को नौकरी देने, एक करोड़ रुपये मुआवजा देने और हत्या में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने सजा दिलाने की मांग की है. उन्होंने यह पूछे जाने पर कि सीएम रेखा गुप्ता ने पीड़ित से क्या कहा? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि सीएम ने भरोसा दिया है कि पुलिस आरोपियों को कानून के अनुसार सख्त से सख्त सजा दिलाने का काम करेगी. नौकरी और मुआवजे के बात पर कहा कि इस पर विचार को सरकार अंतिम फैसला लेगी.
एमसीडी ने किया आरोपियों के घर को सील
बतौर, मोहन लाल शर्मा के मुताबिक आरोपियों के घरों को एमसीडी के सील कर दिया है. आरोपियों के परिवार के अधिकांश सदस्य यहां से अपने रिश्तेदारों के यहां शरण ले चुके है. अधिकांश सदस्य को जेल में डाला जा चुका है. पूरा इलाका छावनी में तब्दील है. यहां के हिंदुओं को भी अब सुरक्षा का डर सताने लगा है.
ईद मनाने की बात पर कहा - इस बार माहौल में बदल गया
तरुण के पड़ोसी सोएब उर्फ सोनू जो सारे काम बंद होने के बीच ईद से पहले आने घर की साफ सफाई करा रहे थे, ने कहा कि जो हुआ गलत हुआ है. जिसने भी ऐसा किया है, वो नहीं होना चाहिए. हमारा परिवार दशकों से यहां रह रहा है. यहां पर हिंदु और मुसलमानों की मिली जुली आबादी है. हमेशा से लोग होली मनाते आए हैं. कभी ऐसा नहीं हुआ. सरकार दोषियों खिलाफ कार्रवाई करे. हिंदू लोग हमेशा से होली मनाते आए हैं. इस बार उनका होली मनाना कोई नई बात नहीं. कभी ऐसा नहीं हुआ. इस बार जो हुआ सभी को सकते में डालने वाला है.
यह पूछे जाने पर कि 21 मई को ईद है. उसकी तैयारी कैसी है. इस पर उन्होंने कहा कि ईद जैसा पहले मनाते थे, उसी तरह इस बार भी मनाएंगे. लेकिन, इस बार माहौल में फर्क है. सभी अपने अपने घरों में कैद हैं. इस घटना के वहज से सभी चुप है. लेकिन यह चुप्पी बहुत कुछ संकेत दे रही है. हालांकि, किसी को कोई खतरा नहीं है.
अब्बासी जी से पूछ लो, वही बताएंगे
सोएब के पास में बैठी उनकी अम्मा ने, नाम तो नहीं बताया, लेकिन इतना जरूरत बताया कि पहले वाली बात नहीं है. पुलिस ने ईद को लेकर क्या कुछ कहा है, इस पर उन्होंने पास के अब्बासी की ओर इशारा करते हुए कहा कि वही बताएंगे. वही यहां पर मुसलमानों की गतिविधियों को लेकर एक्टिव हैं. अब्बासी कम्युनिकेशन और सीएससी सेंटर खुला था, लेकिन अंदर से ग्लास का डोर बंद था और कोई अंदर था भी नहीं.
क्या कारोबार और रोजमर्रा की जिंदगी ठप पड़ गई है?
उन्हीं के घर के सामने वाली गली में मुकेश परचून की दुकान खोलकर बैठे थे. उन्होंने कहा कि जब घटना हुई है, तब कोई खरीददार नहीं है. घर चलाना है, इसलिए दुकान खोलकर बैठे हैं, पर मन नहीं लगता. कोई दुकान पर कुछ लेने नहीं आता. उनके बातों में दम है. पुलिस ने दुकान खोलने पर रोक नहीं लगाई है.
उत्तम थाने के सामने वाले इलाके में भी वीरानी छाई हुई थी. यहां के मुस्लिम दुकानदार अहमद ने कहा कि इस घटना से 1000 से ज्यादा दुकानदारों पर रोजी रोटी पर फर्क पड़ा है. एमसीडी ने कई घरों को तोड़ दिए हैं. इसे मुसलमानों में काफी असंतोष है. लोगों का कहना है कि उन्होंने क्या गलती की? दिन और रात हर समय थाने के सामने वाला इलाका हमेशा गुलजार रहता था, लेकिन इस मरघट जैसा यहां पर माहौल है. हालात यह है कि खुलकर कोई बात नहीं करना चाहता. किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए थाने के अंदर और बाहर पुलिस वाले भारी संख्या में जमा दिखाई दिए. संभवत: इन्हें किसी भी अनहोनी को ध्यान में रखते हुए रिजर्व पुलिस के रूप में यहां बुलाया गया है.
काली बस्ती में नाकेबंदी कब तक रहेगी? DCP द्वारका ने दिया ये जवाब
द्वारका जिले के डीसीपी अंकित कुमार सिंह ने उत्तम नगर में तरुण की होली के दिन हत्या के बाद उपजे तनाव पर कहा कि पुलिस ने इसे गंभीरता से लिया है. अब स्थिति पूरी तरह से कंट्रोल में है. क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए शांति कमेटी की बैठक हुई है. शांति समिति से जुड़े सभी लोगों से कहा गया है कि वे अपने मोहल्ले व इलाके में शांति बनाए रखें. किसी तरह की अवांछित गतिविधियों की सूचना तत्काल पुलिस को दें. मामले बिगड़े नहीं, इसके लिए हर स्तर पर खुद कदम उठाएं.
उन्होंने कहा कि इस मामले में अभी तक 16 लोगों के खिलााफ कार्रवाई की गई है. पुलिस की टीमें इस मामले की जांच में जुटी है. किसी ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की तो पुलिस कोई नरमी नहीं बरतेगी. आगामी ईद और रामनवमी को देखते हुए सभी पुलिस अधिकारियों को क्षेत्र में शांति बनाए रखने को कहा गया है. क्षेत्र में मंदिर के संचालकों और मस्जिदों के नामचीन लोगों से कहा गया है कि वो खुद भी सतर्कता बरतें. पुलिस के संपर्क में रहें. फिलहाल, किसी भी धार्मिक गतिविधियों पर कोई रोक नहीं है.
अंकित कुमार सिंह ने ये भी कहा कि पुलिस की ओर से भी अपील की जा रही है, कि लोग किसी तरह के विवाद व तनाव को बढ़ावा देने से बचें. अफवाहों पर ध्यान न दें. थाने के अफसरों व पुलिसकर्मियों से हर गतिविधि पर पैनी नजर रखने को कहा गया है. जहां तक पुलिस नाकेबंदी और सख्ती से काली बस्ती के लोगों को हो रही परेशानियों की बात है, वो हमारे संज्ञान में है. इस दिशा में भी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन पूरी तरह से नरमी ईद के बाद हालात को देखते हुए बरती जाएंगी. फिलहाल, सुरक्षा के मद्देनजर प्रभावित इलाकों में विशेष सुरक्षा बलों के जवान भी मौके पर तैनात है.




