Republic Day 2026: कर्तव्य पथ पर गूंजी भारत की ताकत, पहली बार दिखी हाइपरसोनिक मिसाइल, ‘OP सिंदूर’ ने बढ़ाया देश का गौरव
Republic Day 2026: भारत ने आज 77वां गणतंत्र दिवस पूरे गौरव और भव्यता के साथ मनाया. राजधानी दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित ऐतिहासिक परेड में देश की सांस्कृतिक विविधता, सैन्य शक्ति और तकनीकी प्रगति की झलक एक साथ देखने को मिली.
Republic Day 2026
Republic Day 2026: भारत ने आज 77वां गणतंत्र दिवस पूरे गौरव और भव्यता के साथ मनाया. राजधानी दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित ऐतिहासिक परेड में देश की सांस्कृतिक विविधता, सैन्य शक्ति और तकनीकी प्रगति की झलक एक साथ देखने को मिली. इस साल का समारोह खास इसलिए भी रहा क्योंकि मुख्य अतिथि के रूप में यूरोपीय संघ और यूरोपीय काउंसिल का प्रतिनिधित्व शामिल हुआ, जो भारत-यूरोप संबंधों की मजबूती का प्रतीक बना.
गणतंत्र दिवस परेड 2026 ने भारत की बदलती सैन्य रणनीति और स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को वैश्विक मंच पर मजबूती से प्रस्तुत किया. अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों से लेकर पारंपरिक घुड़सवार टुकड़ियों और रंग-बिरंगी राज्य झांकियों तक, हर दृश्य ने देशवासियों के मन में गर्व और आत्मविश्वास भर दिया.
1. पहली बार दिखी भारत की हाइपरसोनिक मिसाइल
77वें गणतंत्र दिवस परेड में भारत ने पहली बार अपनी हाइपरसोनिक मिसाइल को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया. डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) द्वारा विकसित लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल (LRAShM) को भारतीय नौसेना के लिए तैयार किया जा रहा है. हाइपरसोनिक गति (मैक 8-10) से उड़ान भरने वाली यह मिसाइल लगभग 1500 किलोमीटर की रेंज में दुश्मन के जहाजों को 15 मिनट से भी कम समय में नष्ट करने में सक्षम है.
2. आसमान में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ फॉर्मेशन
कर्तव्य पथ के ऊपर ‘प्रहार फॉर्मेशन’ में हेलिकॉप्टरों की गर्जना ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया. इस दौरान भारतीय सेना का ध्रुव एडवांस लाइट हेलिकॉप्टर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का झंडा लेकर उड़ा. इसके साथ भारतीय सेना का ‘रुद्र’ एएलएच-डब्ल्यूएसआई और भारतीय वायुसेना का एएलएच मार्क-IV हेलिकॉप्टर भी शामिल रहा. राजपूत रेजिमेंट के मार्च के दौरान ड्रोन वॉरफेयर और सूर्यास्त्र की झलक भी दिखाई गई, जो ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में इस्तेमाल किए गए प्रमुख हथियार हैं.
3. 61वीं कैवेलरी का ऐतिहासिक शौर्य प्रदर्शन
परेड में 61वीं कैवेलरी कंटिन्जेंट ने अपनी शाही परंपरा और साहस से सबका ध्यान खींचा. इस दल का नेतृत्व कैप्टन अहान कुमार ने किया. 61वीं कैवेलरी दुनिया की एकमात्र सक्रिय घुड़सवार रेजिमेंट है, जो आज भी वीरता, अनुशासन और घुड़सवारी की सदियों पुरानी परंपराओं को जीवित रखे हुए है.
4. हिम योद्धाओं और स्वदेशी पशु दस्तों की झलक
गणतंत्र दिवस परेड के दौरान हिम योद्धाओं की टुकड़ी विशेष आकर्षण का केंद्र रही. उनके साथ बैक्ट्रियन ऊंट, ज़ानिस्करी टट्टू और काले चील (शिकारी पक्षी) भी प्रदर्शित किए गए. इसके अलावा, मुधोल हाउंड, रामपुर हाउंड, चिप्पिपराई, कोम्बई और राजपालयम जैसी पांच स्वदेशी नस्लों के कुत्तों को आक्रमण और गश्ती दल के रूप में प्रशिक्षित कर परेड में शामिल किया गया.
5. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में इस्तेमाल हथियारों का शक्ति प्रदर्शन
कर्तव्य पथ पर भारत की सैन्य शक्ति का व्यापक प्रदर्शन देखने को मिला. मिसाइल प्रणालियों, नवगठित सैन्य टुकड़ियों और विशिष्ट परेड दस्तों के साथ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान इस्तेमाल की गई विभिन्न स्वदेशी हथियार प्रणालियों को भी प्रदर्शित किया गया, जिसने आत्मनिर्भर भारत की रक्षा क्षमताओं को रेखांकित किया.
6. यूरोपीय संघ के दस्ते की ऐतिहासिक भागीदारी
इस वर्ष की परेड में यूरोपीय संघ का दस्ता भी शामिल हुआ. यूरोपीय संघ का सैन्य प्रतिनिधित्व ईयू मिलिट्री स्टाफ के डायरेक्टर जनरल की ओर से कर्नल फ्रेडरिक साइमोन स्प्रुइट ने किया, जो एक जिप्सी में सवार होकर कर्तव्य पथ से गुजरे.
7. ‘वंदे मातरम्’ थीम पर सजी राज्यों की झांकियां
77वें गणतंत्र दिवस समारोह की थीम ‘वंदे मातरम्’ रही. कर्तव्य पथ पर मणिपुर, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों की झांकियों ने देश की सांस्कृतिक विरासत, लोककला और विकास की गाथा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया चारों ओर गूंजता ‘वंदे मातरम्’ हर भारतीय के मन में राष्ट्रप्रेम की भावना और भी प्रबल करता नजर आया.





