26 जनवरी 2026 को भारत अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है. इस मौके पर संविधान को लेकर एक जो सबसे बड़ा सवाल है, वो है है कि आज़ादी के 77 साल बाद भी हमारा संविधान आम तौर पर “Constitution of India” के नाम और अंग्रेज़ी भाषा में ही जाना-पढ़ा जाता है, जबकि इसे “भारत का संविधान” कहा जाना चाहिए. सवाल है कि जब देश स्वतंत्र है, तो फिर संविधान को अब भी ब्रिटिश भाषा और शब्दावली में क्यों देखा जाता है, और क्यों हम अपनी भाषा (हिंदी) में उसे पूरी तरह अपनाने में असफल रहे हैं. देश की राजनीति के शोर में दबे इन गंभीर और बेचैन कर देने वाले सवालों के जवाब तलाशने के लिए State Mirror Hindi ने दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस एस.एन. ढींगरा से विशेष बातचीत की.