Assam Congress पर संकट! कौन हैं सीनियर नेता Pradyut Bordoloi जिन्होंने पार्टी को कहा अलविदा, जानें इस्तीफे के पीछे की पूरी कहानी
असम विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है, जब प्रद्युत बोर्डोलोई ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया. उनके इस फैसले के पीछे टिकट विवाद, अंदरूनी कलह और गंभीर आरोपों की लंबी कहानी जुड़ी हुई है. इस्तीफे के बाद अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या असम में कांग्रेस और कमजोर होगी और क्या बोर्डोलोई BJP का रुख करेंगे.
Assam Pradyut Bordoloi Resigns Reason: अगले महीने होने वाले असम विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है. असम के कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोर्डोलोई ने मंगलवार को अपने पदों, सभी सुविधाओं और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया.
बोर्डोलोई ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को लिखे पत्र में कहा, "आज भारी दुःख के साथ मैं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सभी पदों, सुविधाओं और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देता हूं." बीती शाम उन्होंने पार्टी से बाहर निकलने का फैसाल किया है.
असम में कांग्रेस पर क्या आ गया है संकट?
नागांव संसदीय क्षेत्र से दो बार सांसद और पूर्व राज्य मंत्री रह चुके बोर्डोलोई के इस्तीफे का असर पार्टी में दिख रहा है. उनका इस्तीफा उस महीने आया है जब पूर्व असम कांग्रेस प्रमुख भूपेन कुमार बोरा ने भी पार्टी छोड़ दी थी, उन्होंने वर्तमान राज्य इकाई प्रमुख गौरव गोगोई के "उच्च हाथ का रवैया" बताकर पार्टी छोड़ी थी. कांग्रेस मीडिया प्रमुख बेदब्रत बोरा ने बताया कि गोगोई और असम प्रभारी AICC महासचिव जितेंद्र सिंह इस मुद्दे पर दिल्ली में बोर्डोलोई से मिल रहे हैं. "वे बोर्डोलोई से मिल रहे हैं. चर्चा का विवरण अभी आना बाकी है."
कौन हैं Pradyut Bordoloi?
- बोर्डोलोई कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI से जुड़े रहे हैं और 2016 तक मारघेरिटा निर्वाचन क्षेत्र से चार बार विधायक रहे हैं. वे विधानसभा चुनावों के लिए घोषणापत्र समिति के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. उनके बेटे प्रतीक बोर्डोलोई इस बार इसी सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार हैं.
- प्रद्युत बोर्डोलोई का जन्म 28 अप्रैल 1959 को हुआ था. वे असम के कांग्रेस नेता हैं और साल 2019 से नागांव लोकसभा सीट से सांसद हैं. इससे पहले वे 1998 से 2016 तक मारघेरिटा विधानसभा क्षेत्र से चार बार विधायक रहे हैं. साथ ही, वे 2001 से 2015 के बीच असम सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं.
- प्रदीप बोरदोलोई को 1998 में असम के मार्घेरिटा विधानसभा क्षेत्र से उपचुनाव में पहली बार विधायक चुना गया था. इसके बाद वे 2001, 2006 और 2011 में भी लगातार जीतकर विधायक बने.
- 2001 से 2006 तक तरुण गोगोई की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार में वे राज्य मंत्री रहे. बाद में 2006 से 2015 के बीच उन्होंने उद्योग, वाणिज्य, बिजली और पब्लिक एंटरप्राइज जैसे अहम विभागों की जिम्मेदारी एक वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री के रूप में संभाली.
- 2015 में कैबिनेट फेरबदल के दौरान उन्होंने मंत्री पद छोड़ दिया और इसके बाद उन्हें मुख्यमंत्री का वरिष्ठ प्रवक्ता और सलाहकार बनाया गया।
- साल 2019 में वे नागांव से लोकसभा सांसद चुने गए और 2024 में भी इसी सीट से दोबारा जीत हासिल की.
क्या है इस्तीफे के पीछे की पूरी कहानी?
बोर्डोलोई का इस्तीफा उस महीने आया जब भूपेन कुमार बोरा भाजपा में शामिल हुए. इसी दिन एक और वरिष्ठ असम कांग्रेस नेता और बोर्डोलोई के करीबी सहयोगी नवज्योति तालुकदार ने भी पार्टी छोड़ दी.
बोर्डोलोई ने हाल ही में जितेंद्र सिंह को पत्र लिखा था कि अगर लाहोरीघाट विधायक आसिफ मोहम्मद नज़र को फिर से विधानसभा चुनाव के लिए नामांकित किया गया तो वह पार्टी छोड़ सकते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि नज़र के करीबी सहयोगी एम्दादुल इस्लाम ने अप्रैल 2025 में उन पर और अन्य पार्टी नेताओं पर हमला किया था और इस मामले में पुलिस ने चार्जशीट भी दर्ज की थी.
बोर्डोलोई ने यह भी दावा किया कि बाद में इस्लाम को गोगोई के घर ले जाकर 11 जनवरी को एक कार्यक्रम में सम्मानित किया गया, जहां उन्हें गोगोई के बगल में बैठा देखा गया.
क्या BJP में होंगे शामिल?
वहीं, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बोर्डोलोई को भाजपा में शामिल होने का सार्वजनिक न्योता दिया, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उनका बोर्डोलोई से कोई व्यक्तिगत संपर्क नहीं हुआ. चुनाव आयोग ने आगामी असम विधानसभा चुनाव की तारीखें घोषित कर दी हैं. मतदान एक चरण में होगा और 9 अप्रैल 2026 को शुरू होगा, जबकि मतगणना 4 मई 2026 को होगी.