5 राज्यों के चुनाव घोषित, असम से बंगाल-केरल तक; BJP-कांग्रेस समेत TMC-DMK का क्या दांव पर? Details

पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के ऐलान के साथ सियासी सरगर्मी तेज हो गई है. असम से बंगाल तमिलनाडु और केरल तक कांग्रेस, TMC, DMK और वाम दलों के लिए किसकी सियासी प्रतिष्ठा दांव पर है, समझिए पूरा समीकरण.

By :  धीरेंद्र कुमार मिश्रा
Updated On : 15 March 2026 11:20 PM IST

देश की राजनीति में एक बार फिर चुनावी हलचल तेज हो गई है. चुनाव आयोग ने असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुद्दुचेरी में विधानसभा चुनाव की घोषणा कर दी है, जिसके साथ ही इन राज्यों में सियासी सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं. इन चुनावों में सिर्फ सरकार बनाने की लड़ाई नहीं होगी, बल्कि कई बड़े नेताओं और दलों की राजनीतिक प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है. असम में हिमंता बिस्वा सरमा की सत्ता बचाने की चुनौती है, तो पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व की परीक्षा होगी.

तमिलनाडु में M. K. Stalin और Edappadi K. Palaniswami के बीच सियासी मुकाबला अहम माना जा रहा है, जबकि केरल में पी विजयन की सरकार को सत्ता बचाने की चुनौती है. वहीं पुद्दुचेरी में N. Rangasamy की साख भी दांव पर है. ऐसे में पांच राज्यों का यह चुनाव आने वाले समय की राजनीति की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है.

Assam : हिमंता के सामने सत्ता बचाने की चुनौती, विपक्ष की वापसी को बेकरार

असम विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी प्रतिष्ठा राज्य के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की मानी जा रही है. ऐसा इसलिए कि वह कांग्रेस को छोड़कर बीजेपी में आए थे. बीजेपी अमूमन दूसरे पार्टी से आए लोगों को सीएम नहीं बनाती है, लेकिन असम में इस परंपरा को तोड़ते हुए बीजेपी ने हिमंता को 2021 में सीएम बनाया था. यही वजह है कि उनकी प्रतिष्ठा विधानसभा चुनाव में दांव पर है. फिर, सबकी नजर भी उनपर है, इसलिए उनकी परीक्षा इस बात को लेकर भी है कि वह बीजेपी को अपने दम पर चुनाव जिता पाते हैं या नहीं.

उनके नेतृत्व में बीजेपी ने राज्य में लगातार अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की है. 2016 और 2021 के चुनावों में भाजपा गठबंधन ने जीत हासिल कर कांग्रेस के लंबे शासन का अंत किया था. ऐसे में 2026 का चुनाव सरमा के लिए सत्ता बरकरार रखने की बड़ी परीक्षा है.

दूसरी ओर गौरव गोगोई जैसे युवा नेताओं के साथ कांग्रेस अपनी खोई जमीन वापस पाने की कोशिश कर रही है. नागरिकता, अवैध प्रवासन, विकास और रोजगार जैसे मुद्दे चुनावी बहस के केंद्र में रह सकते हैं. इस चुनाव में भाजपा के लिए सत्ता बचाने और कांग्रेस के लिए वापसी करने की प्रतिष्ठा दांव पर मानी जा रही है. गौरव गोगोई को भी हल्के में लेना बीजेपी के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है. ऐसा इसलिए कि गोगोई असम के सबसे बड़े सियासी परिवार के ताल्लुक रखते हैं. उनके पिता तरुण गोगोई लगातार तीन बार सीएम रहे थे.

West Bengal : ममता की सियासी परीक्षा, बीजेपी के लिए सरकार बनाना अस्त्वि का सवाल

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी परीक्षा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की राजनीति की है. वह जमीनी और जुझारू नेता हैं. टीएमसी बंगाल में पिछले एक दशक से ज्यादा समय से राज्य की सत्ता में है. 2021 में भाजपा के कड़े मुकाबले के बावजूद ममता बनर्जी ने लगातार तीसरी बार प्रचंड बहुमत से जीत दर्ज की थी. अगला चुनाव उनके नेतृत्व और सरकार के कामकाज की बड़ी परीक्षा माना जा रहा है.

दूसरी ओर बीजेपी राज्य में सत्ता हासिल करने की कोशिश कर रही है और संगठन को मजबूत करने पर जोर दे रही है. पार्टी के अध्यक्ष नितिन नवीन चुनावी मोर्चा संभाल चुके हैं. बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद से उनकी से पहली चुनावी परीक्षा है. हालांकि, उनके पीएम मोदी, अमित शाह और प्रदेश के दिग्गज नेता भी चुनाव मुहिम में लगे हैं. पिछले पांच साल के दौरान बीजेपी ने टीएमसी पर भ्रष्टाचार के आरोप, विकास, बेरोजगारी और केंद्र-राज्य संबंध जैसे मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया था. इसलिए, बंगाल में यह चुनाव ममता बनर्जी की राजनीतिक पकड़ और भाजपा की सियासी विस्तार रणनीति दोनों के लिए अहम माना जा रहा है.

Tamil Nadu: स्टालिन बनाम पलानीस्वामी - दोनों के लिए आसान नहीं सत्ता में वापसी

तमिलनाडु में चुनावी मुकाबला मुख्य रूप से द्रविड़ मुनेत्र कड़गम और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के बीच माना जा रहा है. मुख्यमंत्री M. K. Stalin के लिए यह चुनाव अपनी सरकार के कामकाज और राजनीतिक नेतृत्व को साबित करने का मौका है. उनकी सरकार सामाजिक कल्याण योजनाओं और विकास को प्रमुख उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है. स्टालिन के लिए यह चुनाव इसलिए भी अहम है कि उनके पिता के करुणानिधि के निधन के बाद दूसरी बार वह विधानसभा चुनाव का सामना कर रहे हैं. 2021 में उनकी जीत को करुणा​निधि के सहानुभूति माना गया था. इस बार वह सत्ता में वापसी करते हैं, ये माना जाएगा कि उन्होंने अपने पिता की तरह खुद की अलग पहचान काम के दम पर बना ली है.

वहीं, विपक्ष की ओर से Edappadi K. Palaniswami भी तमिलनाडु के पूर्व सीएम रहे हैं. एआईडीएमके प्रमुख जयललिता के निधन के बाद वह पार्टी के प्रमुख नेता बनकर उभरे थे. इस बार उन पर अपनी पार्टी को फिर से सत्ता में लाने की जिम्मेदारी है. इसके लिए वह बीजेपी के साथ गठबंधन बनाने की कोशिश में भी जुटे हैं. यही वजह है कि पलानीस्वामि के लिए इस बार का चुनाव करो या मरो जैसी स्थिति वाली है. बीजेपी भी राज्य में अपनी राजनीतिक पकड़ बढ़ाने के लिए सक्रिय है. ऐसे में 2026 का चुनाव तमिलनाडु में द्रविड़ राजनीति के भविष्य और विपक्ष की ताकत दोनों के लिए अहम माना जा रहा है.

Kerala : LDF vs UDF की परंपरागत जंग, दोनों की प्रतिष्ठा दांव पर

केरल की राजनीति में मुख्य मुकाबला एलडीएफ और यूडीएफ के बीच है. यहां का चुनाव हमेशा से एलडीएफ और कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ गठबंधन के बीच रहा है. पिछले दस साल से पी विजयन के नेतृत्व में एलडीएफ सत्ता में है. मौजूदा मुख्यमंत्री Pinarayi Vijayan के नेतृत्व में एलडीएफ ने 2021 में लगातार दूसरी बार सत्ता हासिल कर इतिहास बनाया था. ऐसे में अगला चुनाव उनके लिए अपनी राजनीतिक पकड़ बरकरार रखने की बड़ी चुनौती होगा.

दूसरी ओर कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ सत्ता में वापसी की कोशिश कर रहा है और राज्य में संगठन को मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है. कांग्रेस की ओर से प्रमुख नेता वी. डी. सतीशन उभरकर सामने आए है. उन्हीं को सीएम फेस बनाने की चर्चा है. केरल में कांग्रेस ने विकास, कल्याणकारी योजनाएं, केंद्र-राज्य संबंध और सामाजिक मुद्दे कोा चुनावी बहस में ला खड़ा किया है. इसलिए केरल में यह चुनाव एलडीएफ की सत्ता बचाने और यूडीएफ की वापसी की प्रतिष्ठा से जुड़ा माना जा रहा है. केरल विधानसभा चुनाव में खास बात यह है कि इस बार बीजेपी त्रिकोणीय मुकाबले में आ सकतीस है. ऐसा इसलिए केरल पंचायत, नगर परिषद और निगम के चुनावों में अब तक का सबसे बेहतर प्रदर्शन किया था. कांग्रेस नेता शशि थरूर के गढ़ में बीजेपी अपना मेयर बनाने में सफल हुई थी. यही वजह है कि इस बार केरल विधानसभा का चुनाव पहले से ज्यादा रोचक होने की उम्मीद है.

Puducherry : क्या रंगासामी साख बचा पाएंगे या कांग्रेस करेगी सत्ता में वापसी

पुद्दुचेरी में मुख्यमंत्री N. Rangasamy के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस सरकार के लिए अगला चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल है. रंगासामी राज्य की राजनीति के अनुभवी नेता माने जाते हैं और उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता पार्टी की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है. उनके साथ गठबंधन में बीजेपी भी राज्य में अपना राजनीतिक आधार मजबूत करने की कोशिश कर रही है. वहीं विपक्ष की ओर से कांग्रेस सत्ता में वापसी के लिए प्रयास कर रही है. स्थानीय मुद्दे, विकास, प्रशासन और गठबंधन की राजनीति चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं. ऐसे में पुद्दुचेरी में यह चुनाव रंगासामी की साख और कांग्रेस की वापसी की चुनौती के रूप में देखा जा रहा है.

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