Mamata Banerjee Vs Suvendu Adhikari: किसमें कितना है दम- कौन होगा इस बार का धुरंधर? समझिए सोशल से सियासत तक की Equation
पश्चिम बंगाल की राजनीति में Mamata Banerjee और Suvendu Adhikari के बीच सियासी मुकाबला लगातार चर्चा में बना हुआ है. 15 मार्च को Election Commission of India ने विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है. EC के मुताबिक इस बार पश्चिम बंगाल में इस बार दो चरणों में मतदान होगा. पहला चरण 23 अप्रैल को और दूसरा चरण 29 अप्रैल को आयोजित किया जाएगा.
Mamata Banerjee Vs Suvendhu Adhukari: पश्चिम बंगाल की राजनीति में Mamata Banerjee और Suvendu Adhikari के बीच सियासी मुकाबला लगातार चर्चा में बना हुआ है. 15 मार्च को Election Commission of India ने विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है. चुनाव कार्यक्रम के अनुसार पश्चिम बंगाल में इस बार दो चरणों में मतदान होगा. पहला चरण 23 अप्रैल को और दूसरा चरण 29 अप्रैल को आयोजित किया जाएगा, जबकि 4 मई को मतगणना के साथ नतीजे घोषित होंगे.
अगर पिछले विधानसभा चुनाव की बात करें तो उस समय राज्य में 8 चरणों में मतदान कराया गया था, लेकिन इस बार चुनाव आयोग ने इसे घटाकर सिर्फ दो चरणों में कराने का फैसला लिया है. इसी वजह से यह चुनाव और भी ज्यादा चर्चा और राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है.
ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी के बीच मुकाबला केवल चुनावी मैदान तक सीमित नहीं है, बल्कि सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक दोनों नेताओं के बीच तीखी बयानबाजी और रणनीतिक टकराव देखने को मिल रहा है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इस बार जनता किस नेता पर भरोसा जताएगी. इस लेख में हम जानेंगे कि दोनों नेताओं की राजनीतिक ताकत क्या है और जनता की नजर में इस चुनाव में कौन बन सकता है असली धुरंधर.
ममता बनर्जी के बारे में क्या जानते हैं आप?
ममता बनर्जी, वर्तमान में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री हैं और 20 मई 2011 से इस पद पर काबिज हैं. वे पहली महिला मुख्यमंत्री हैं जो इस पद पर रही हैं. ममता बनर्जी ने 1998 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से अलग होकर आकाशवाणी ट्रिनामूल कांग्रेस (AITC या TMC) की स्थापना की और 2001 में पार्टी की अध्यक्ष बनीं. उन्होंने इतिहास रचते हुए एक मुख्यमंत्री के रूप में सर्वोच्च न्यायालय में वकील के रूप में बहस की. उन्होंने दो बार रेल मंत्रालय संभाला, जो उन्हें इस पद पर पहुंचने वाली पहली महिला मंत्री बनाता है. इसके अलावा, उन्होंने कोयला, मानव संसाधन विकास, युवा मामले एवं खेल, महिला एवं बाल विकास मंत्रालयों में भी कार्य किया.
ममता बनर्जी का राजनीतिक उदय 2006-2007 के दौरान तब हुआ जब उन्होंने सिंगुर में कम्युनिस्ट सरकार की विशेष आर्थिक क्षेत्र के लिए भूमि अधिग्रहण नीतियों का विरोध किया. 2011 में, उन्होंने TMC गठबंधन के लिए भारी जीत दर्ज की, 34 साल लंबे वाम मोर्चा शासन को हराया. भवानिपुर विधानसभा क्षेत्र से 2011 से 2021 तक विधायक रही ममता बनर्जी ने 2021 में नंदीग्राम विधानसभा सीट पर भाजपा के सुवेंदु अधिकारी से हार का सामना किया, हालांकि उनकी पार्टी ने राज्य में बड़ी बहुमत हासिल किया. इस चुनाव के परिणाम को ममता बनर्जी ने कोलकाता उच्च न्यायालय में चुनौती दी है. 2021 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने फिर से भारी जीत दर्ज की और ममता भवानिपुर सीट से विधायक बनीं.
सुवेंदु अधिकारी के बारे में कितना जानते हैं आप?
सुवेंदु अधिकारी 15 दिसंबर 1970 को जन्मे, वर्तमान में भाजपा के पश्चिम बंगाल इकाई के नेता और विपक्ष के नेता हैं. वे 2016 से 2020 तक पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री रहे. उन्होंने 2016 और 2021 में नंदीग्राम से विधानसभा सदस्य के रूप में चुनाव जीता. इसके पहले वे 2005 में साउथ कॉनटाई से विधायक और 2009 और 2014 में तामलुक से सांसद रहे. अधिकारी ने 2016 से 2020 तक परिवहन मंत्री और 2018 से 2020 तक सिंचाई और जल संसाधन मंत्री के रूप में कार्य किया. 2020 से 2021 तक वे जूट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष भी रहे. सुवेंदु अधिकारी पहले TMC और उससे पहले भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य रह चुके हैं. वे सांसद और पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री सिसिर अधिकारी के पुत्र हैं.
दोनों ही नेता ऐसे हैं जिनकी जमीन पर अच्छी खासी पकड़ है. उन्हें ग्रास रूट लेवल पर काफी पसंद किया जाता और दोनों ही अपनी तेज़ तर्रार भाषण के लिए जाने जाते हैं. एक तरफ ममता के कोर वोटर वेस्ट बंगाल की मूल जनता है वहीं सुवेंदु अधिकारी अपने प्रो हिंदू छवि बनाएं हुए हैं. आइये जानते हैं कि दोनों का सोशल मीडिया परस कितना दबदबा है.
सोशल मीडिया पर किसका दबदबा?
सोशल मीडिया पर दोनों नेताओं की मौजूदगी भी काफी मजबूत है. ममता बनर्जी के पास फेसबुक पर 5.4 मिलियन, ट्विटर पर 7.5 मिलियन और इंस्टाग्राम पर 495 हजार फॉलोवर्स हैं. वहीं, सुवेंदु अधिकारी के पास फेसबुक पर 1.2 मिलियन, ट्विटर पर 305.8 हजार और इंस्टाग्राम पर 99.2 हजार फॉलोवर्स हैं.
इस तरह, राजनीतिक अनुभव, लोकप्रियता और सोशल मीडिया प्रभाव के आधार पर यह मुकाबला पश्चिम बंगाल की राजनीति में बेहद दिलचस्प और निर्णायक माना जा रहा है. जनता के बीच किस नेता की पकड़ ज्यादा मजबूत है, यह आगामी चुनावों में ही स्पष्ट होगा.




