T20 World Cup 2026 में बराबरी की टक्कर दे रहीं 'छोटी टीमें', भारत भी फंसा; इंग्लैंड-पाकिस्तान को तो अंतिम ओवर में मिली जीत

T20 वर्ल्ड कप 2026 में एसोसिएट और फुल मेंबर टीमों के बीच का अंतर तेजी से घटता दिख रहा है. पाकिस्तान, भारत और इंग्लैंड जैसी बड़ी टीमें छोटी टीमों के खिलाफ आखिरी ओवर तक जूझती नजर आईं.;

नेपाल की टीम, जिसने इंग्लैंड को दी कड़ी टक्कर(Image Source:  ICC )
By :  अच्‍युत कुमार द्विवेदी
Updated On : 10 Feb 2026 6:06 PM IST

T20 World Cup 2026 Interesting Story: टी-20 वर्ल्ड कप 2026 के शुरुआती मुकाबलों ने एक बात बिल्कुल साफ कर दी है कि क्रिकेट में अब फुल मेंबर और एसोसिएट टीमों के बीच का फासला तेजी से घट रहा है. वो दिन लगभग चले गए हैं जब छोटी टीमें सिर्फ 'भाग लेने' आती थीं. अब वे जीतने और बड़े उलटफेर करने उतर रही हैं.

पाकिस्तान को ही देख लीजिए. नीदरलैंड्स के खिलाफ मुकाबले में वह मैच के आखिरी ओवरों तक फंसा रहा. अगर 19वें मैच में मैक्स ओ डाउड ने फहीम अशरफ का एक आसान कैच न छोड़ा गया होता तो पाकिस्तान की टीम मुकाबला हार सकती थी. उनका कैच छोड़ना पाकिस्तान के लिए लाइफलाइन साबित हुआ और टीम 3 गेंद शेष रहते 3 विकेट से मैच जीत गई.

नीदरलैंड के खिलाड़ियों से हाथ मिलाते पाकिस्तानी खिलाड़ी

 

हारते-हारते जीत गया पाकिस्तान

फहीम अशरफ ने 19वें ओवर में कुल 24 रन बटोरे, जिसमें एक चौका और तीन गगनुचंबी छक्का शामिल रहा. पहली , तीसरी और पांचवीं गेंद पर अशरफ ने छक्का जड़ा, जबकि अंतिम गेंद पर चौका लगाया. इस ओवर की दूसरी गेंद पर उनका कैच छूटा था, जो नीदरलैंड को भारी पड़ा.

अमेरिका के खिलाफ फंसा भारत 

भारत की हालत भी अमेरिका (USA) के खिलाफ कुछ अलग नहीं रही. टीम इंडिया एक समय 77 रन पर 6 विकेट गंवा चुकी थी. सूर्यकुमार यादव का 15 रन पर छूटा कैच अमेरिका को भारी पड़ गया. इसके बाद कप्तान सूर्या ने जिम्मेदारी संभाली और 49 गेंदों में नाबाद 84 रन ठोककर भारत को 29 रन की मुश्किल जीत दिलाई.

मोहम्मद सिराज

 

नेपाल के खिलाफ बमुश्किल जीत पाया इंग्लैंड  

सबसे रोमांचक मुकाबलों में से एक रहा नेपाल बनाम इंग्लैंड... नेपाल की टीम, जिन्हें उनके फैंस ‘Cardiac Kids’ कहते हैं, ने इंग्लैंड से लगभग मुकाबला छीन ही लिया था. आखिरी ओवर में टीम को 10 रन बनाने थे, लेकिन सैम करन की सटीक गेंदबाजी से नेपाल की टीम 4 रन से मुकाबला हार गई. भले ही नेपाल मैच न जीत पाया हो, लेकिन उसने दिखा दिया कि अब उसे हल्के में लेना भारी पड़ सकता है.

 

अब ये ओवरपरफॉर्मेंस नहीं, बराबरी की लड़ाई है

अक्सर कहा जाता है कि एसोसिएट टीमें 'अपने वजन से ज्यादा मुक्का मार रही हैं', लेकिन सच्चाई यह है कि अब वे सही वजन वर्ग में आ चुकी हैं. ज्यादा मैच, ज्यादा एक्सपोज़र और बड़े खिलाड़ियों के साथ खेलने का मौका, इन सबने क्रिकेट का दायरा बड़ा कर दिया है.

इतिहास में कब-कब हुए पलटवार?

  • 1979 में श्रीलंका (तब एसोसिएट) ने भारत को हराकर इतिहास रचा
  • 1983 में जिम्बाब्वे ने ऑस्ट्रेलिया को चौंकाया
  • 1996 में केन्या ने वेस्टइंडीज को हराया
  • 1999 में बांग्लादेश ने पाकिस्तान को मात दी
  • 2007 में आयरलैंड ने पाकिस्तान को हराकर सुपर-8 में जगह बनाई

फर्क ये है कि पहले ऐसे नतीजे अपवाद होते थे, अब ये लगातार हो रहे हैं. T20 ने खेल को सबसे ज्यादा बराबरी वाला बनाया. T20 फॉर्मेट ने इस बदलाव को सबसे ज्यादा रफ्तार दी है.

T20 में कब-कब हुए पलटवार?

  • 2009: नीदरलैंड्स ने इंग्लैंड को लॉर्ड्स में 5 विकेट से हराया
  • 2016: अफगानिस्तान ने वेस्टइंडीज को चौंकाया
  • 2022: नामीबिया ने श्रीलंका और आयरलैंड ने इंग्लैंड को हराया
  • 2024: USA ने पाकिस्तान को दी मात

आखिरी ओवर तक चल रहा मैच

  • 2026 में भले बड़े उलटफेर न हुए हों, लेकिन हर मैच आखिरी ओवर तक जा रहा है. यही इस बदलाव का सबसे बड़ा सबूत है.
  • नेपाल के कप्तान रोहित पौडेल ने कहा, “अब कोई भी टीम किसी को हल्के में नहीं ले सकती. हमारे फैंस की उम्मीदें हमारे साथ थीं और हमें उन पर गर्व है.” 
  • जिम्बाब्वे के कप्तान सिकंदर रज़ा का मानना है कि फ्रेंचाइज़ी क्रिकेट ने इस अंतर को और कम किया है. एसोसिएट देशों के खिलाड़ी दुनिया भर की लीग्स में खेलकर अनुभव लेकर लौटते हैं और पूरी टीम को बेहतर बनाते हैं. उन्होंने कहा कि

क्रिकेट के लिए सुनहरा मौका

इस घटते अंतर में क्रिकेट का भविष्य छुपा है. अगर ICC और बड़ी टीमें एसोसिएट देशों को सिर्फ वर्ल्ड कप तक सीमित न रखें और रेगुलर द्विपक्षीय सीरीज़ दें, तो खेल वाकई ग्लोबल बन सकता है.  सच्चाई ये है कि 'ज्यादा क्रिकेट' की शिकायत भी इसलिए होती है क्योंकि वही गिनी-चुनी टीमें बार-बार एक-दूसरे से खेलती हैं. अगर विपक्ष बदलेगा, तो खेल भी ताजा लगेगा.

अब एसोसिएट टीमों के खिलाफ खेलना एहसान नहीं, बल्कि क्रिकेट के भविष्य में निवेश है. ये टीमें जितना फुल मेंबर टीम के खिलाफ खेलेंगी, उतना ही क्रिकेट को फायदा होगा और मुकाबला टक्कर का होगा. 

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