Gen Millennials को कैसे समझें? कब देते हैं बेस्ट रिजल्ट और क्या हैं उनकी छिपी कमजोरियां
अगर आप Millennials को सही तरीके से समझ लें, तो वे किसी भी संगठन की ग्रोथ का सबसे मजबूत स्तंभ बन सकते हैं. यह रिपोर्ट बताती है कि उनकी सोच, चाहत और कमजोरियों को कैसे मैनेज किया जाए.
आज के तेजी से बदलते कॉर्पोरेट माहौल में मिलेनियल्स (Gen Millennials) सबसे प्रभावशाली वर्कफोर्स बनकर उभरे हैं. यह पीढ़ी न पूरी तरह पारंपरिक है और न ही पूरी तरह आधुनिक, बल्कि दोनों के बीच एक ऐसा संतुलन बनाती है जो कार्यस्थल की दिशा तय कर रहा है. टेक्नोलॉजी के साथ सहज, सीखने के लिए हमेशा तैयार और अपने काम में “पर्पज” तलाशने वाली यह जनरेशन लीडर्स के लिए अवसर भी है और चुनौती भी.
अगर किसी संगठन को तेज ग्रोथ, इनोवेशन और स्थिरता चाहिए, तो Millennials को समझना और सही तरीके से लीड करना बेहद जरूरी हो जाता है. उनकी सोच, अपेक्षाएं, ताकत और कमजोरियों को पहचानकर ही एक लीडर टीम से बेहतर प्रदर्शन निकाल सकता है और बदलते वर्क कल्चर में खुद को प्रासंगिक बनाए रख सकता है.
Millennials कौन होते हैं, अहम क्यों?
मिलेनियल्स वे लोग हैं जिनका जन्म 1981 से 1996 के बीच हुआ. यह पीढ़ी पारंपरिक और आधुनिक सोच के बीच का पुल है. आज के वर्कप्लेस में इनकी भूमिका बेहद अहम हो चुकी है, क्योंकि ये बदलाव को अपनाने और तेजी से सीखने में आगे रहते हैं.
सबसे बड़ी खासियत क्या?
Millennials महत्वाकांक्षी, टेक-सेवी और एडॉप्टिव होते हैं. ये बदलाव से घबराते नहीं बल्कि उसे अवसर के रूप में देखते हैं. टीमवर्क, सीखने की इच्छा और फीडबैक लेने की आदत इन्हें दूसरों से अलग बनाती है.
टीम लीडर जेन एम को कैसे समझें?
मिलेनियल्स को समझने के लिए लीडर को उनके साथ कनेक्ट करना होगा. ये सिर्फ आदेश नहीं, बल्कि काम के पीछे का कारण जानना चाहते हैं. ओपन कम्युनिकेशन और उनकी राय को महत्व देना इनके मोटिवेशन को बढ़ाता है.
प्रभावी तरीके से कैसे लीड करें?
इनके साथ माइक्रोमैनेजमेंट काम नहीं करता. इन्हें जिम्मेदारी के साथ स्वतंत्रता चाहिए. एक लीडर को बॉस नहीं बल्कि कोच की तरह काम करना चाहिए. मार्गदर्शन देना लेकिन कंट्रोल कम रखना चाहिए.
बेहतर रिजल्ट कब देते हैं?
जब Millennials को अपने काम में “पर्पज” दिखता है, तब वे सबसे बेहतर प्रदर्शन करते हैं. ग्रोथ, सीखने के अवसर और पॉजिटिव वर्क कल्चर इन्हें ज्यादा एंगेज और प्रोडक्टिव बनाते हैं.
कमजोरियां क्या, कैसे करें कंट्रोल?
इनकी सबसे बड़ी कमजोरी है, तुरंत रिजल्ट की उम्मीद. इसके लिए छोटे-छोटे गोल सेट करना जरूरी है. साथ ही, ये फीडबैक को लेकर संवेदनशील होते हैं, इसलिए कंस्ट्रक्टिव फीडबैक देना ज्यादा प्रभावी होता है.
इनका लाइफस्टाइल डिजिटल और फ्लेक्सिबल होता है. पारंपरिक 9-5 जॉब की बजाय ये आउटपुट-बेस्ड वर्क पसंद करते हैं. सही बैलेंस और फ्लेक्सिबिलिटी मिलने पर ये ज्यादा लॉयल और प्रोडक्टिव रहते हैं.
क्या होती है चाहत?
Millennials सिर्फ सैलरी नहीं, बल्कि एक बेहतर करियर चाहते हैं. ये ग्रोथ, पहचान, फ्लेक्सिबिलिटी और अच्छा वर्क कल्चर चाहते हैं. साथ ही, मेंटल हेल्थ और वर्क-लाइफ बैलेंस इनके लिए बेहद अहम है.
Gen Z और Gen M में कॉमन क्या?
Gen Z और मिलेनियल्स दोनों डिजिटल-नेटिव हैं. ये तेजी से सीखते हैं, बदलाव को अपनाते हैं और काम में पर्पज ढूंढते हैं.
दोनों में अंतर क्या?
Millennials टीमवर्क और वर्क-लाइफ बैलेंस को प्राथमिकता देते हैं, जबकि Gen Z ज्यादा इंडिपेंडेंट और प्रैक्टिकल होते हैं। दोनों पारदर्शिता और ओपन कम्युनिकेशन को अहम मानते हैं.