दिमाग, हार्मोन और इम्यूनिटी पर प्रहार, और ये घातक बीमारियां- चपेट में आने से पहले जान लें नाइट शिफ्ट के Long Term Side Effects
हमारे देश में काफी लोग नाइट शिफ्ट्स करने पर मजबूर हैं, वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें रात में काम करने में मज़ा आता है, लेकिन आपको बता दें, ये नाइट शिफ्ट आपके शरीर को धीरे-धीरे खोखला कर रही है,
Side Effects of Night Shift: भारत में कई ऐसे सेक्टर्स हैं, जिनमें रात में काम होता है. आईटी सेक्टर, मेडिकल सेक्टर से लेकर सिक्योरिटी और सेफ्टी से जुड़ी नौकरी में रात को काम करना पड़ता है. लेकिन, क्या आपको पता है कि रात में काम करने से आपके शरीर पर क्या प्रभाव पड़ रहा है?
पहले दिन में काम करना ही सामान्य था, लेकिन अब 24‑घंटे वाली दुनिया में नाइट शिफ्ट आम हो गई है. कई लोगों के लिए यह शिफ्ट जरूरी है, लेकिन लंबे समय तक रात में काम करने के कारण शरीर और मन पर गंभीर असर पड़ता है. इससे न केवल थकान होती है, बल्कि शरीर के अंदर गहरे स्तर पर बदलाव होता है.
रात को काम करने से किन चीजों पर पड़ता है प्रभाव?
लंबे समय तक नाइट शिफ्ट काम करने पर नींद, दिमाग, शारीरिक स्वास्थ्य, हार्मोन, पाचन तंत्र और जीवन की गुणवत्ता पर असर देखा गया है. वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि नाइट शिफ्ट को अनदेखा करने पर यह धीरे‑धीरे शरीर को अंदर से कमजोर कर सकता है और कई तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है.
इस मामले को लेकर हमने Dr Shrey Srivastava (Senior Consultant- Internal Medicine, Sharda Hospital) से बात की, उन्होंने हमें विस्तार से बताया कि रात की शिफ्ट शरीर के लिए कितनी नुकसानदे हो सकती हैं. आइये जानते हैं कि रात को लंबे वक्त तक काम करने से क्या होता है?
हमारी अंदर की घड़ी पर क्या पड़ता है असर?
हमारी शरीर एक प्राकृतिक 24‑घंटे की घड़ी पर चलता है, जिसे सर्कैडियन रिदम कहते हैं. यह घड़ी बताती है कि कब हमें जागना है, कब हमें खाना है और कब हमें सोना है. इस घड़ी को अहम तौर पर रोशनी और अंधेरा कंट्रोल करते हैंय जब सूरज निकलता है, शरीर जागने का संकेत पाता है, और जब अंधेरा होता है तब नींद आने का संकेत मिलता है. उसी हिसाब से शरीर में हार्मोन्स का लेवल भी बदलता रहता है.
लेकिन नाइट शिफ्ट में काम करने से यह नेचुरस घड़ी गड़बड़ हो जाती है. रात में रोशनी मिलने से शरीर को लगता है कि अब काम करने का समय है और दिन में जब हम सोते हैं, तो रोशनी और अंधेरे का संकेत उलट हो जाते हैं. इसी वजह से शरीर की अंदर की घड़ी भ्रमित हो जाती है और शरीर को नुकसान होने लगता है.
सर्कैडियन रिदम में गड़बड़ से क्या होता है?
सर्कैडियन रिदम गड़बड़ होने का असर सिर्फ नींद तक नहीं रहता. हार्मोन, पाचन, ऊर्जा बनना, दिमाग की कार्यक्षमता और इम्यून सिस्टम जैसे बहुत से सिस्टम भी प्रभावित होते हैं. जब शरीर का समय दिन‑रात के चक्र से ठीक से मेल नहीं खाता, तब शरीर स्ट्रेस में रहने लगता है और धीरे‑धीरे उसे फिट रहने में कठिनाई होने लगती है.
- नींद की समस्या
नाइट शिफ्ट में काम करने वाले लोगों की नींद की क्वालिटी और समय दोनों प्रभावित होते हैं. कई रिसर्च बताती हैं कि रात में काम करने वाले लोग आम तौर पर केवल पांच से छह घंटे ही सो पाते हैं, जबकि सामान्य व्यक्ति को सात से आठ घंटे नींद की जरूरत होती है.
यह नींद पूरी नहीं होती और कई बार टूट‑टूट कर होती है, इसलिए शरीर को सही आराम नहीं मिल पाता. दिन के समय सोना आसान नहीं होता क्योंकि शरीर दिन को सक्रिय रहने का समय मानता है. इससे गहरी नींद पूरी नहीं हो पाती और शरीर की रिकवरी कम होती है. लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहती है तब थकान रहती है और अगले काम के दौरान भी शरीर थका‑थका सा रहता है. नींद पूरी न होने से दिल पर भी गलत प्रभाव पड़ता है.
- नींद का दिमाग पर क्या है असर ?
नींद में यह कमी सिर्फ शरीर को थका देती है बल्कि दिमाग को भी प्रभावी ढंग से काम नहीं करने देती. दिमाग की याददाश्त, ध्यान, सोचने की शक्ति और फैसला लेने की क्षमता सभी प्रभावित होते हैं.
नाइट शिफ्ट का दिमाग पर क्या असर होता है?
नाइट शिफ्ट में काम करने के कारण दिमाग पर भी गंभीर प्रभाव होता है. रिसर्च में यह पाया गया है कि रात में काम करने वाले लोग चिंता, तनाव और अवसाद जैसे मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों का सामना ज्यादा करते हैं. जब सर्कैडियन रिदम गड़बड़ हो जाती है और नींद सही नहीं मिलती, तब दिमाग को आराम नहीं मिलता. इससे व्यक्ति अक्सर तनाव में रहता है, उसकी मनोदशा प्रभावित होती है, और वह जल्दी चिड़चिड़ा या उदास महसूस कर सकता है. कुछ शोधों में देखा गया है कि लंबे समय तक रात में काम करने वाले लोगों में डिप्रेशन और एंग्जाइटी के लक्षण ज्यादा पाए गए हैं.
दिमाग की एक और समस्या यह है कि थकान के ध्यान और फोकस कम हो जाता है. काम के दौरान छोटी‑छोटी बातों पर ध्यान देना भी मुश्किल लगता है, और गलती की संभावना बढ़ जाती है. यह खासकर उन कामों में खतरनाक हो सकता है जहां सतर्कता जरूरी होती है जैसे ड्राइविंग या मशीन चलाना आदि.
शरीर पर क्या पड़ते हैं प्रभाव?
नाइट शिफ्ट काम करने से शरीर पर कई तरह के स्वास्थ्य जोखिम बढ़ते हैं जो सिर्फ थकान या नींद की कमी से आगे बढ़ता है. सबसे पहले, शरीर में स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है. यह हार्मोन शरीर को तनाव में रखता है और लंबे समय तक बढ़ा रहना ब्लड प्रेशर और हार्ट हेल्थ पर बुरा असर डाल सकता है.
नाइट शिफ्ट में काम करने वाले लोग अक्सर दिन में खाना कम खाते हैं और रात में काम के दौरान खाने की आदत बनाते हैं. शरीर को दिन में भोजन के लिए तैयार बनाया गया है, लेकिन रात को खाना पचाना मुश्किल होता है. यह गलत समय पर भोजन करने से पेट से जुड़ी दिक्कतें, अपच, गैस, पेट में दर्द जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं.
शारीरिक रूप से, नाइट शिफ्ट से मेटाबोलिक सिस्टम भी प्रभावित होता है. इसका मतलब यह हुआ कि शरीर की इंसुलिन और ग्लूकोज सेंसिटिविटी बदलती है, जिससे टाइप‑2 डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है. इसके अलावा, रात की शिफ्ट और लंबे समय तक सर्कैडियन रिदम की गड़बड़ी से शरीर में वजन बढ़ने, उच्च कोलेस्ट्रॉल और मोटापे जैसे जोखिम भी बढ़ सकते हैं जो हृदय रोगों का कारण बनते हैं.
कैसे दूसरी बीमारियों का है खतरा?
कुछ वैज्ञानिक संस्थाओं ने नाइट शिफ्ट को संभावित रूप से कैंसर का जोखिम कारक बताया है. यह इसलिए क्योंकि रात में रोशनी के संपर्क में रहने से शरीर का मेलाटोनिन हार्मोन कम बनता है, और यह हार्मोन शरीर को कैंसर जैसे रोगों से बचाने में मदद करता है. रिसर्च में यह भी कहा गया है कि सर्कैडियन रिदम की गड़बड़ी के कारण सेल्स के डेवलपमेंट और रिपेयर की प्रक्रिया प्रभावित होती है, जिससे एबनोर्मेल सेल्स ग्रोथ हो सकती है जो कैंसर का कारण बन सकती है. हालांकि ऐसा काफी कम केस में देखने को मिलता है.
कुछ स्टडीज़ से पता चला है कि महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर और पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर का जोखिम रात में लंबे समय तक काम करने से बढ़ सकता है, सर्कैडियन रिदम के असंतुलन के कारण DNA रिपेयर और सेल रिप्रोडक्शन प्रभावित होते हैं, जो समय के साथ गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकते हैं.
प्रोफेशनल और सोशल लाइफ पर क्या पड़ता है असर?
नाइट शिफ्ट में काम करना केवल हेल्थ को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि कार्य क्षमता और सामाजिक जीवन पर भी असर डालता है. जब शरीर और दिमाग थका हुआ रहता है, तो व्यक्ति की काम करने की क्षमता कम हो जाती है. फोकस करना मुश्किल होता है, गलती की संभावना बढ़ जाती है और सामान्य कार्य भी कठिन लगने लगते हैं.
नाइट शिफ्ट में काम करते हुए व्यक्ति को दोस्तों, परिवार और जीवन साथी के साथ समय बिताने में भी कठिनाई होती है. समाजिक जीवन और पारिवारिक रिश्तों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, जिससे व्यक्ति अकेला या अलग‑थलग महसूस कर सकता है.
नाइट शिफ्ट से होने वाली समस्याओं से कैसे बचा जाए?
नाइट शिफ्ट के नुकसान को पूरा खत्म करना आसान नहीं है, लेकिन कुछ उपाय अपनाकर इसके प्रभाव को काफी कम किया जा सकता है. सबसे पहले कोशिश करें कि शिफ्ट शेड्यूल को स्थिर रखें ताकि शरीर धीरे‑धीरे उस समय के अनुरूप ढल सके.स्लीप क्वालिटी बेहतर करने के लिए दिन में सोते समय कमरा शांत और अंधेरा रखे. भोजन को हल्का और संतुलित रखें, खासकर रात के समय भारी भोजन से बचें.