केरल में सबसे ज्यादा कैंसर? बीफ खाने को लेकर डॉक्टर के दावे पर छिड़ी बड़ी बहस, जानिए सच्चाई
एक सीनियर कैंसर विशेषज्ञ केरल में ज्यादा कैंसर के पीछे बीफ खाने को वजह बता रहे हैं, लेकिन अन्य डॉक्टरों ने इसे आंकड़ों की गलत व्याख्या कहा है. WHO और IARC की रिपोर्ट क्या कहती है, जानिए पूरी पड़ताल.
कैंसर के बारे में जब हम सोचते हैं, तो ज्यादातर लोगों के दिमाग में सबसे पहले धूम्रपान, बहुत ज्यादा रेडिएशन का संपर्क, या परिवार में किसी को पहले कैंसर होना जैसे कारण आते हैं. लेकिन हाल ही में एक सीनियर कैंसर विशेषज्ञ डॉ. राजीव विजयकुमार ने एक पॉडकास्ट में कुछ ऐसा दावा किया. जिसने काफी विवाद खड़ा कर दिया.
उनका कहना था कि केरल में कैंसर के मामले भारत में सबसे ज्यादा हैं और इसका मुख्य कारण वहां के लोगों का लाल मांस (खासकर गोमांस) बहुत ज्यादा खाना है. उन्होंने खासतौर रूप से बीफ करी और परोठा का जिक्र किया. डॉ. राजीव ने अपनी बात को मजबूत करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और IARC (कैंसर रिसर्च की अंतरराष्ट्रीय एजेंसी) का हवाला दिया. WHO के अनुसार:
- प्रोसेस्ड मांस (जैसे सॉसेज, बेकन, हैम आदि जिन्हें नमक, धुआं या अन्य तरीकों से तैयार किया जाता है) को ग्रुप 1 में रखा गया है, यानी यह इंसानों के लिए पक्का कैंसर पैदा करने वाला माना जाता है.
- बिना प्रोसेस किया हुआ लाल मांस (जैसे ताजा गोमांस, भेड़, बकरी का मांस) को ग्रुप 2A में रखा है, यानी यह संभावित रूप से कैंसर पैदा कर सकता है, खासकर कोलोरेक्टल कैंसर (आंतों का कैंसर) के लिए.
क्या सच है दावा?
यह वर्गीकरण 800 से ज्यादा स्टडी की समीक्षा के बाद किया गया था. इस दावे का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, और लोगों में खान-पान को लेकर नई बहस छिड़ गई. लेकिन इस दावे पर एक हेपेटोलॉजिस्ट (लीवर के विशेषज्ञ) और मेडिकल टीचर ने एक्स हैंडल पर एक लंबी पोस्ट करके इसका खंडन किया. उन्होंने कहा कि डॉ. राजीव का दावा महामारी विज्ञान (एपिडेमियोलॉजी) की गलत समझ पर आधारित है. उन्होंने इसे सिम्पसन पैराडॉक्स (Simpson's Paradox) से जोड़ा.
सिम्पसन पैराडॉक्स क्या है?
यह एक आंकड़ों का ऐसा विरोधाभास है. जिसमें अलग-अलग ग्रुप में एक ट्रेंड दिखता है. लेकिन जब सभी ग्रुप को मिलाकर देखें तो ट्रेंड उल्टा हो जाता है. आसान उदाहरण: कुछ अस्पतालों में मृत्यु दर ज्यादा दिखती है. लेकिन ऐसा इसलिए क्योंकि वे बेहतर ICU वाले होते हैं और सबसे गंभीर मरीजों को ही संभालते हैं. वहीं कम सुविधा वाले अस्पतालों में मामूली मरीज आते हैं, इसलिए मृत्यु दर कम दिखती है. लेकिन वास्तव में बेहतर अस्पताल ज्यादा जानें बचा रहे होते हैं. इसी तरह केरल के कैंसर के आंकड़ों में:
- केरल में कैंसर के मामले सबसे ज्यादा दर्ज होते दिखते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वहां कैंसर सबसे ज्यादा फैल रहा है.
- कारण: केरल में भारत के सबसे पुराने और सबसे अच्छे कैंसर रजिस्ट्री (जनसंख्या आधारित कैंसर रजिस्टर) हैं. ये दशकों से चल रहे हैं और बहुत सारे कैंसर केसों को ठीक से ट्रैक करते हैं.
- दूसरे राज्यों में रजिस्ट्री कमजोर हैं, स्क्रीनिंग और डायग्नोसिस की सुविधा कम है, इसलिए कई केस पता ही नहीं चल पाते या रिपोर्ट नहीं होते.
- नतीजा: वहां कम मामले दर्ज होते हैं, लेकिन वास्तविक बोझ ज्यादा हो सकता है.
- एक बहुत महत्वपूर्ण बात: जिस चीज का पता नहीं चलता, उसकी रिपोर्ट कैसे की जा सकती है?.
इसके अलावा केरल में:
- जीवन प्रत्याशा (औसत उम्र) सबसे ज्यादा है- लगभग 75-77 साल, जो कई विकसित देशों जितनी है.
- कैंसर ज्यादातर उम्र बढ़ने के साथ होता है. जैसे-जैसे लोग ज्यादा जीते हैं, कैंसर का खतरा बढ़ता है.
- दूसरे राज्यों में संक्रमण, कुपोषण या मातृ मृत्यु जैसी वजहों से लोग कम उम्र में ही मर जाते हैं, इसलिए वे उस उम्र तक नहीं पहुँच पाते जहां कैंसर आम होता है.
हेपेटोलॉजिस्ट ने आगे कहा, 'बिना प्रोसेस किए लाल मांस को सीधे कैंसर का कारण मानने का कोई मजबूत सबूत नहीं है. WHO/IARC के आंकड़ों में भी मुख्य खतरा प्रोसेस्ड या अल्ट्रा-प्रोसेस्ड मांस से है. कैंसर बढ़ने के सबसे बड़े और सिद्ध कारण हैं- तंबाकू, शराब, और मोटापा.