जनवरी में टूटती हैं सबसे ज्यादा शादियां! क्यों यह महीना कहलाता है ‘Divorce मंथ’?

नया साल शुरू होते ही हर तरफ बदलाव की बातें होने लगती हैं. लोग नई आदतें अपनाने, पुराने बोझ से छुटकारा पाने और जिंदगी को नए सिरे से जीने के संकल्प लेते हैं. लेकिन इसी “नई शुरुआत” के माहौल में कई रिश्ते अपने आख़िरी मोड़ पर पहुंच जाते हैं. चौंकाने वाली बात यह है कि जनवरी वह महीना माना जाता है जब सबसे ज्यादा शादियों के टूटने की खबरें सामने आती हैं.;

( Image Source:  AI SORA )
Edited By :  हेमा पंत
Updated On : 9 Jan 2026 12:36 PM IST

नया साल आते ही लोग नई शुरुआत, नए सपने और खुद को बेहतर बनाने के फैसले लेते हैं. सोशल मीडिया “New Year, New Me” की पोस्ट्स से भर जाता है. लेकिन इसी चमक-दमक के बीच कई घरों में एक खामोश मंथन चलता है. बीते साल की अनकही शिकायतें, दबा हुआ दर्द और अधूरी उम्मीदें जनवरी में अचानक साफ दिखाई देने लगती हैं.

तब मन सवाल करता है कि क्या मैं एक और साल इसी रिश्ते में गुजार सकता हूं? बस फिर यही सवाल आगे बढ़ता है और रिश्तों में खींचातान शुरू हो जाती है. इसके कारण जनवरी के महीने में सबसे ज्यादा तलाक होते हैं. चलिए जानते हैं आखिर कैसे जनवरी डाइवोर्स मंथ बना. 

जनवरी क्यों बना डाइवोर्स मंथ?

जनवरी सिर्फ कैलेंडर का पहला महीना नहीं है, बल्कि यह मनोवैज्ञानिक तौर पर रीसेट बटन जैसा काम करता है. नया साल लोगों को यह एहसास दिलाता है कि अगर बदलाव करना है, तो अब नहीं तो कभी नहीं. बीते साल की थकान, अधूरी उम्मीदें, बार-बार नजरअंदाज की गई परेशानियां-सब कुछ जनवरी में एक साथ सामने आ जाता है. तब मन सवाल करता है कि “क्या मैं एक और साल ऐसे ही निकाल सकता/सकती हूं?” इसलिए ही अब जनवरी डाइवोर्स मंथ बनता जा रहा है. 

क्या है कारण?

नवंबर और दिसंबर में ज्यादातर लोग रिश्तों को संभालकर रखते हैं. त्योहार, परिवार की मौजूदगी, बच्चों की खुशी और सामाजिक दबाव सब कुछ मिलकर ब्रेकअप या तलाक को रोक देता है. लेकिन जैसे ही छुट्टियां खत्म होती हैं. घर के मेहमान चले जाते हैं.  खर्चों का हिसाब सामने आता है, तो रिश्तों की दरारें साफ दिखने लगती हैं. जनवरी लोगों को “अब बहुत हो गया” कहने की इजाजत दे देता है. यही कारण है कि लोग जनवरी के महीने में अलग होने की सोचते हैं. 

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क्या कहती है रिसर्च?

कॉस्मोपॉलिटन की रिपोर्ट के मुताबिक, वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी की एक स्टडी में सामने आया है कि जनवरी के महीने में तलाक के मामलों में करीब 33 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखी जाती है. इसके उलट, नवंबर और दिसंबर में तलाक के केस लगभग 50 प्रतिशत तक कम हो जाते हैं. यह रिसर्च सोशियोलॉजी की प्रोफेसर जूली ब्राइन्स और रिसर्च स्कॉलर ब्रायन सेराफिनी ने की थी. उन्होंने 2001 से 2015 के बीच अमेरिका के कई राज्यों के तलाक से जुड़े आंकड़ों की स्टडी की. उनके अनुसार, यह ट्रेंड हर साल दोहराया जाता है और लगभग हर इलाके में एक जैसा नजर आता है.

रिपोर्ट्स यह भी बताती हैं कि हर साल जनवरी में फैमिली लॉ वकीलों को मिलने वाली 25 से 30 प्रतिशत पूछताछ तलाक से जुड़ी होती है. वहीं, 2025 में Semrush की रिपोर्ट में पाया गया कि दिसंबर के मुकाबले जनवरी में “तलाक” और “तलाक कैसे लें” जैसे शब्दों की ऑनलाइन खोज में काफी बढ़ोतरी हुई.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

कई एक्सपर्ट्स मानते हैं कि जनवरी में तलाक का फैसला इमोशनल नहीं बल्कि रणनीतिक होता है. नया साल एक तरह से कंट्रोल्ड एग्ज़िट स्ट्रैटेजी देता है. जैसे कानूनी प्रक्रिया की शुरुआत, नए फाइनेंशियल प्लान और बच्चों के स्कूल से पहले बदलाव सब कुछ प्लान करने का मौका. इसलिए ही लोग इस महीने में राहें बदल लेते हैं. 

महिलाएं क्यों करती हैं तलाक की पहल?

स्टडीज़ बताती हैं कि छुट्टियों के बाद तलाक की पहल अक्सर महिलाएं करती हैं. त्योहारों के दौरान घर का सारा बोझ, रिश्तेदारों की जिम्मेदारी, इमोशनल लेबर अधिकतर महिलाओं पर आ जाता है. इस दौरान कई महिलाएं अंदर ही अंदर टूटती रहती हैं और जनवरी आते ही फैसला ले लेती हैं कि “अब खुद के लिए जीना है.”

क्या सच में जनवरी सबसे ज्यादा तलाक का महीना है?

कुछ विशेषज्ञ कहते हैं कि जनवरी तलाक का अंत नहीं बल्कि शुरुआत होती है. असल में मार्च और अगस्त जैसे महीने भी तलाक के मामलों में काफी आगे रहते हैं. यानि जनवरी एक चिंगारी है, आग बाद में फैलती है.

क्या छुट्टियों के बाद होते हैं ज्यादा डाइवोर्स?

त्योहारों में ज्यादा साथ रहना, आर्थिक तनाव, परिवार की दखल पहले से कमजोर रिश्तों को और कमजोर बना देता है. जो बातें साल भर दबाकर रखी जाती हैं, वे इन्हीं दिनों में सतह पर आ जाती हैं. इसलिए नंवबर और दिसंबर की छुट्टियों के बाद लोग जनवरी के महीने में डाइवोर्स लेने की सोचते हैं.

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