तेलुगु रस्म हुई पूरी, अब Rashmika और Vijay की होगी कोडवा रिवाज से दोबारा शादी, जानें दोनों ट्रेडिशन के बारे में सब कुछ
Vijay Deverakonda और Rashmika Mandanna आखिरकार शादी के बंधन में बंध गए हैं. यह शादी तेलुगु और कोडवा रिवाज के साथ पूरी होगी. जहां अब यह कपल कोडवा रिवाज के साथ दोबारा शादी करेगा. इस ट्रेडिशन में पंडित नहीं होता है.
विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना शादी के बंधन में बंध चुके हैं. इस शादी में दो रीति-रिवाज निभाए जाएंगे, जिसमें तेलुगु और कोडवा शामिल है. सुबह तेलुगु रिवाज से शादी हो गई है. वहीं, अब कोवडा रिवाज निभाया जाएगा, जहां से रश्मिका मंदाना के रूट्स हैं.
दो अलग-अलग संस्कृतियों की इन रस्मों ने इस शादी को और खास बना दिया है. जहां कोडवा रस्म के हिसाब से इसमें कोई पंडित नहीं होते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं इन दोनों अनोखी परंपराओं के बारे में.
कैसी होती हैं तेलुगु शादियां?
तेलुगु शादियां आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की परंपराओं से जुड़ी होती हैं. ये आमतौर पर पंडित की मौजूदगी में वैदिक मंत्रों के साथ होती हैं और कई दिनों तक चल सकती हैं. इस शादी में कई रस्में निभाई जाती है.
- निश्चितार्थम यानी सगाई की रस्म निभाना.
- कन्यादान में लड़की के माता-पिता बेटी को वर को सौंपते हैं.
- जीलकरे बेल्लम रिवाज में दूल्हा-दुल्हन एक-दूसरे के सिर पर जीरा और गुड़ का पेस्ट लगाते हैं, जो साथ निभाने का सिंबल है.
- मंगलसूत्र धारण में दूल्हा दुल्हन के गले में मंगलसूत्र बांधता है.
- सप्तपदी रस्म में अग्नि के सामने सात फेरे लेकर सात वचन दिए जाते हैं.
- तेलुगु शादी में तलाम्ब्रालु रिवाज निभाया जाता है, जिसमें कपल एक-दूसरे पर चावल डालते हैं, जो खुशहाली का संकेत है.
- यहां अग्नि को साक्षी मानकर शादी की जाती है. खाना पूरी तरह वेज होता है और केले के पत्ते पर परोसा जाता है. दुल्हन रेशमी साड़ी और सोने के गहनों में सजी होती है, जबकि दूल्हा धोती पहनता है.
कोडवा वेडिंग के बारे में जानें
कोडवा शादियां कर्नाटक के कोडगु (कूर्ग) क्षेत्र से जुड़ी हैं. इन शादियों में पंडित नहीं होते. परिवार के बड़े-बुजुर्ग ही सारी रस्में निभाते हैं.
- ये समारोह आम तौर पर दो दिन तक चलते हैं और इन्हें उरकूडुवा और मंगला के नाम से जाना जाता है.
- बाले बिरुद में दूल्हा केले के तने को प्रतीकात्मक रूप से काटता है, जो साहस और सुरक्षा का संकेत है.
- सम्मंदा कोडुपो रस्म दुल्हन को दूल्हे के परिवार में अधिकार देने से जुड़ी है.
- कॉइन बैग रस्म निभाई जाती है, जिसमें दुल्हन की साड़ी में सिक्कों की छोटी थैली बांधी जाती है.
- पाठक रस्म में मां बेटी को सोने का सिक्का हार पहनाती है, जो शादीशुदा होने की निशानी है.
- यहां अग्नि की जगह दीपक के सामने प्रार्थना की जाती है और पूर्वजों को याद किया जाता है.
दोनों रिवाज में क्या हैं समानताएं और अंतर?
दोनों शादियों में चावल का इस्तेमाल आशीर्वाद के रूप में किया जाता है और रेशमी कपड़े व पारंपरिक गहने अहम होते हैं. फर्क यह है कि तेलुगु शादी मंत्रों और अग्नि के साथ होती है, जबकि कोडवा शादी बिना पंडित और बिना अग्नि के लोगों और पूर्वजों को याद में रखकर मनाई जाती है.