कौन थे लेफ्टिनेंट जनरल बीएम कौल? जिनकी किताब 'द अनटोल्ड स्टोरी' से हिल गई थी नेहरू सरकार

संसद में हंगामे के बाद अब एक बार फिर से लेफ्टिनेंट जनरल बीएम कौल की किताब 'द अनटोल्ड स्टोरी' की चर्चा तेज हो गई है. उनकी किताब से नेहरू सरकार हिल गई थी.;

BM Kaul book The Untold Story

(Image Source:  X/ @vishalr25690560, @RahulGandhi )
Edited By :  विशाल पुंडीर
Updated On : 2 Feb 2026 6:56 PM IST

सोमवार को लोकसभा में उस वक्त जबरदस्त हंगामा देखने को मिला, जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चीन और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश की. राहुल गांधी ने अपने भाषण के दौरान पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे की एक अप्रकाशित किताब का हवाला दिया, जिसके बाद सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध दर्ज कराया और सदन की कार्यवाही बाधित हो गई.

इस बयानबाजी के साथ ही एक पुराना सवाल फिर चर्चा में आ गया क्या रिटायर सैन्य अधिकारियों की किताबें सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा करती रही हैं? नरवणे की किताब को लेकर उठा विवाद कोई नया नहीं है, इससे पहले लेफ्टिनेंट जनरल बीएम कौल की किताब 'द अनटोल्ड स्टोरी' ने नेहरू सरकार की नींद उड़ा दी थी.

कौन थे लेफ्टिनेंट जनरल बीएम कौल?

लेफ्टिनेंट जनरल बीएम कौल का पूरा नाम बृज मोहन कौल था. वह भारतीय सेना में वरिष्ठ अधिकारी रहे और साल 1961–1962 के दौरान चीफ ऑफ जनरल स्टाफ के रूप में सेवाएं दीं थी. बीएम कौल को चीन से जुड़ी सैन्य चुनौती के प्रति भारत की रणनीतिक प्रतिक्रिया के प्रमुख योजनाकारों में गिना जाता है, खासकर 1962 के भारत-चीन युद्ध के संदर्भ में.

‘द अनटोल्ड स्टोरी’ में क्या लिखा था?

न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक, जनरल बीएम कौल ने अपनी किताब में 1962 के युद्ध के दौरान हुई रणनीतिक गलतियों और अपनी भूमिका को लेकर खुलकर लिखा था. किताब में युद्ध से जुड़े कई संवेदनशील पहलुओं और सरकार के फैसलों की आलोचना की गई थी, जिससे तत्कालीन जवाहरलाल नेहरू सरकार असहज हो गई. किताब के प्रकाशित होते ही कांग्रेस पार्टी के भीतर हलचल मच गई और सत्ता के गलियारों में इसकी कड़ी आलोचना शुरू हो गई. बीएम कौल की किताब को लेकर राज्यसभा में भी भारी नाराजगी देखने को मिली थी. कांग्रेस सांसद इतने आक्रोशित थे कि उन्होंने इस पर कड़ी कार्रवाई की मांग तक कर दी थी.

क्या पूछा गया था रक्षा मंत्री से सवाल?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस सांसद राजेंद्र प्रताप सिन्हा ने उस समय रक्षा मंत्री से सवाल किया था कि सरकार ऐसे रिटायर सैन्य जनरलों को रोकने के लिए क्या कदम उठा रही है, जो अपनी सेवा के दौरान हासिल की गई गोपनीय जानकारी का इस्तेमाल कर किताबें प्रकाशित कर रहे हैं. उस वक्त रक्षा मंत्री स्वर्ण सिंह ने जवाब में कहा था कि सरकार किताब के विभिन्न अंशों की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं इसमें ऐसी सामग्री तो नहीं है जो सीक्रेट या टॉप सीक्रेट श्रेणी में आती हो.

क्या फिर दोहराया जा रहा है इतिहास?

आज जब एमएम नरवणे की अप्रकाशित किताब को लेकर संसद में बवाल मचा है, तो बीएम कौल की किताब से जुड़ा पुराना विवाद एक बार फिर याद दिलाता है कि भारत में सेना, राजनीति और गोपनीयता का रिश्ता हमेशा से संवेदनशील रहा है.

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