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क्या है लोकसभा का नियम 349 जो बना राहुल गांधी की 'राह का रोड़ा'? लगा उल्लंघन का आरोप

लोकसभा में राहुल गांधी द्वारा पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे के संस्मरण का जिक्र करने पर नियम 349 को लेकर विवाद खड़ा हो गया. जानिए लोकसभा का नियम 349 क्या है, इसमें क्या-क्या प्रतिबंध हैं और राहुल गांधी के मामले में इसे क्यों लागू किया गया.

Rahul gandhi
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( Image Source:  Sora AI )
नवनीत कुमार
Edited By: नवनीत कुमार

Published on: 2 Feb 2026 4:36 PM

लोकसभा में सोमवार को धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान माहौल अचानक गर्म हो गया. नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण पर बोलते हुए पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे के संस्मरण का जिक्र किया. बस यहीं से सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव शुरू हो गया और सदन में शोर-शराबा बढ़ता चला गया.

सत्तापक्ष ने इस बात पर आपत्ति जताई कि राहुल गांधी एक ऐसी किताब या लेख का हवाला दे रहे हैं, जिसे सदन में पढ़ने की अनुमति नहीं है. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने नियम 349 का हवाला देते हुए उन्हें कई बार रोका. इसके बावजूद हंगामा थमा नहीं और कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी. अब पूरे विवाद की जड़ बना है लोकसभा का नियम 349. आइए जानते हैं आखिर क्या है लोकसभा का नियम 349.

आखिर लोकसभा का नियम 349 है क्या?

लोकसभा की नियम पुस्तिका का नियम 349 सांसदों के आचरण और संसदीय मर्यादा से जुड़ा है. इसमें साफ लिखा है कि सदन के भीतर नारेबाजी, प्रदर्शन या किसी प्रकाशित सामग्री को पढ़ना मना है. यह नियम इसलिए है ताकि बहस तथ्यात्मक और अनुशासित तरीके से हो सके.

लोकसभा अध्यक्ष ने नियम 349 को लेकर क्या कहा?

ओम बिरला ने साफ शब्दों में कहा कि नियम 349 के तहत कोई भी सांसद सदन के भीतर किताब, पत्रिका या अखबार के अंश नहीं पढ़ सकता. उन्होंने राहुल गांधी से नियमों का पालन करने की अपील की, लेकिन शोर-शराबा जारी रहा.

सदन में विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

राहुल गांधी ने अपने भाषण में चीन के साथ भारत के सैन्य तनाव का मुद्दा उठाने की कोशिश की. इसके लिए उन्होंने पूर्व सेना प्रमुख के संस्मरण के मसौदे में लिखी बातों का जिक्र किया. सत्ता पक्ष को यह बात नागवार गुजरी और सदन में जोरदार विरोध शुरू हो गया.

सत्ता पक्ष ने राहुल गांधी के बयान पर क्या कहा?

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष सदन को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं. राजनाथ सिंह ने सवाल उठाया कि जिस किताब का हवाला दिया जा रहा है, वह प्रकाशित भी हुई है या नहीं. उनका कहना था कि अप्रमाणित बातों को संसद में पढ़ना गलत है.

इस नियम में और क्या हैं पाबंदियां?

नियम 349 के मुताबिक सदस्य जोर-जोर से नहीं बोल सकते, ठहाके नहीं लगा सकते और न ही किसी दूसरे सदस्य के भाषण के दौरान टोक-टिप्पणी कर सकते हैं. झंडे, पोस्टर, तख्तियां या धार्मिक प्रतीक दिखाना भी सख्त मना है.

स्पीकर के निर्देशों का पालन क्यों जरूरी होता है?

संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने की जिम्मेदारी स्पीकर की होती है. इसलिए नियम 349 यह भी कहता है कि लोकसभा अध्यक्ष के निर्देश मानना सभी सांसदों के लिए अनिवार्य है. उनकी अनुमति के बिना किसी मुद्दे को आगे बढ़ाना नियमों का उल्लंघन माना जाता है.

तेजस्वी सूर्या के बयान से यह मामला कैसे जुड़ा?

राहुल गांधी ने अपने भाषण की शुरुआत में भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या के उस बयान का जिक्र किया, जिसमें कांग्रेस की देशभक्ति पर सवाल उठाए गए थे. राहुल का कहना था कि उसी के जवाब में वह एक पूर्व सेना प्रमुख के अनुभवों का हवाला देना चाहते थे, लेकिन नियम 349 उनके रास्ते में आ गया.

इस पूरे घटनाक्रम का नतीजा क्या रहा?

लगातार हंगामे के चलते लोकसभा की कार्यवाही पहले दोपहर 3 बजे तक और फिर शाम 4 बजे तक स्थगित करनी पड़ी. उस समय सदन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी मौजूद थे. कुल मिलाकर नियम 349 एक बार फिर चर्चा में आ गया और यह बहस छिड़ गई कि अभिव्यक्ति की आज़ादी और संसदीय नियमों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए.

राहुल गांधीकांग्रेस
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