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एक हाथ में मिसाइल, दूसरे में बातचीत का न्योता; ट्रंप की धमकी के बीच ईरान का ‘वॉर-प्लस-डिप्लोमेसी’ दांव कितना कारगर होगा?

ईरान के एक हाथ में मिसाइल तो दूसरे में बातचीत का न्योता है. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि ट्रंप की धमकी के बीच ईरान का ‘वॉर-प्लस-डिप्लोमेसी’ दांव क्या कारगर होगा.

photo of iran supreme leader ayatullah ali khamenei
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अमेरिका के खिलाफ ईरान का दोहरा रवैया आया सामने
( Image Source:  Sora_ AI )

Iran US tensions: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है. एक तरफ जहां ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका को खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर युद्ध शुरू हुआ तो वह सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया को अपनी चपेट में ले लेगा. वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी सैन्य दबाव और धमकियों के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेशेज़कियान ने अमेरिका के साथ 'न्यूक्लियर फाइल' पर बातचीत शुरू करने का आदेश देकर बड़ा और चौंकाने वाला संकेत दिया है.

खामेनेई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि अमेरिकी युद्धपोत और विमान भेजने की धमकियां नई नहीं हैं. ईरानी जनता इससे डरने वाली नहीं है. उन्होंने साफ कहा कि ईरान युद्ध शुरू नहीं करता, लेकिन अगर उस पर हमला हुआ तो जवाब 'निर्णायक' होगा. खामेनेई ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका ईरान के तेल, गैस, खनिज संसाधनों और रणनीतिक भौगोलिक स्थिति पर नियंत्रण चाहता है.

ईरान की चेतावनी पर क्या बोले ट्रंप?

ईरान की इस चेतावनी के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें अब भी ईरान के साथ डील की उम्मीद है. ट्रंप ने कहा, “अगर समझौता नहीं हुआ, तो हम देखेंगे कि खामेनेई सही थे या नहीं.” इससे पहले ट्रंप प्रशासन ने ईरान में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान सैकड़ों लोगों की मौत के बाद सैन्य कार्रवाई की धमकी दी थी और USS Abraham Lincoln एयरक्राफ्ट कैरियर समेत कई युद्धपोत (Warship) मिडिल ईस्ट भेजे गए.

इसी बीच ईरानी समाचार एजेंसी Fars ने बताया कि राष्ट्रपति पेशेज़कियान ने अमेरिका के साथ न्यूक्लियर फाइल पर बातचीत शुरू करने के आदेश दे दिए हैं. यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब युद्ध का खतरा मंडरा रहा है और अंतरराष्ट्रीय दबाव तेजी से बढ़ रहा है.

अमेरिका-ईरान तनाव पर रूस ने क्या कहा?

तनाव के बीच रूस भी सक्रिय नजर आया है. क्रेमलिन ने कहा कि वह लंबे समय से ईरान के यूरेनियम कार्यक्रम से जुड़े 'इरिटेंट्स' को हटाने के लिए मध्यस्थता की पेशकश करता रहा है. वह अब भी तनाव कम करने की कोशिश कर रहा है.

इजरायल क्यों जा रहे स्टीव विटकॉफ?

इजरायल मोर्चे पर भी हलचल तेज है. ट्रंप के वरिष्ठ दूत स्टीव विटकॉफ इजरायल के दौरे पर जा रहे हैं, जहां वह प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और सैन्य प्रमुखों से मुलाकात करेंगे. यह दौरा गाजा युद्ध और ईरान के साथ बढ़ते टकराव के बीच अहम माना जा रहा है.

ईरान ने चार विदेशी नागरिकों को क्यों किया गिरफ्तार?

ईरान ने घरेलू स्तर पर भी सख्ती बढ़ा दी है. सरकार ने हालिया विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में चार विदेशी नागरिकों को दंगों में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया है. साथ ही, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को आतंकी संगठन घोषित किए जाने पर ईरान ने यूरोपीय संघ के सभी राजदूतों को तलब कर विरोध दर्ज कराया है.

क्या खुद को युद्ध के लिए तैयार कर रहा ईरान?

इसके अलावा, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने मिस्र, सऊदी अरब और तुर्की के विदेश मंत्रियों से बातचीत कर क्षेत्रीय समर्थन जुटाने की कोशिश की है. साफ है कि एक तरफ बातचीत का दरवाजा खोला जा रहा है, तो दूसरी तरफ ईरान हर मोर्चे पर खुद को युद्ध के लिए तैयार भी दिखा रहा है.

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