कहीं Modi का नाम तो कहीं Anil Ambani की चैट! जेफरी के एपस्टीन फाइल्स में एक से बढ़कर एक नेता हुए 'नंगे'

जब एपस्टीन फाइल्स की करतूत सामने आई है तब से आए दिन कुछ न कुछ बवाल मचा हुआ है. इस फाइल्स कहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम का संदर्भ चर्चा में है, तो कहीं उद्योगपति अनिल अंबानी से जुड़ी चैट्स को लेकर सवाल उठ रहे हैं. जेफरी के एपस्टीन फाइल्स में ट्रंप से लेकर बिलगेट्स तक बड़े से बड़े नेताओं को लेकर अश्लील दावा किया जा रहा है. हालांकि स्टेट मिरर हिंदी इन किसी दावों की पुष्टि नहीं करता है.;

( Image Source:  @RedPandaKoala-X )

अमेरिका में जब एपस्टीन फाइल्स की करतूत सामने आई है तब से आए दिन कुछ न कुछ बवाल मचा हुआ है. आए दिन किसी न किसी नेता और बिजनेस मैन को लेकर कुछ न कुछ दावा किया जाता है.  अमेरिकी न्याय विभाग ने एपस्टीन के लाखों डॉक्यूमेंट्स की नई और आखिरी लिस्ट जारी की है. इस लिस्ट में कई बड़े नाम सामने आए. जिस बात ने सबसे ज्यादा हैरान किया है. इन दस्तावेजों में जहां एक तरफ केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम सामने आया है, वहीं दूसरी ओर उद्योगपति अनिल अंबानी के संपर्क और अमेरिकी सत्ता गलियारों तक पहुंच बनाने की कोशिशों के दावे भी सामने आए हैं.

एपस्टीन, जो नाबालिगों की तस्करी और यौन अपराधों का दोषी था, उसकी जब्त डिवाइसेज़ से मिले रिकॉर्ड्स में भारत-अमेरिका रिश्तों, पीएम नरेंद्र मोदी के कथित एजेंडे और 2019 के लोकसभा चुनाव के दौर की बातचीत का जिक्र है. इन खुलासों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भारत की राजनीति और कॉर्पोरेट लॉबिंग के तार अमेरिका के सबसे विवादित नाम से जुड़े रहे हैं.

एपस्टीन फाइल्स में क्या-क्या?

नए दस्तावेज़ों के मुताबिक, 2014 से 2017 के बीच हरदीप सिंह पुरी और जेफरी एपस्टीन के बीच कई बार ईमेल के जरिए बातचीत हुई. इतना ही नहीं, न्यूयॉर्क स्थित एपस्टीन के घर पर दोनों की कम से कम तीन मुलाकातों का भी जिक्र है. उस समय पुरी किसी संवैधानिक या सरकारी पद पर नहीं थे. वे भारतीय विदेश सेवा (IFS) से रिटायर होने के बाद इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (IPI) नामक थिंक टैंक से जुड़े हुए थे. 2017 में वे नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री बने.

जब पहले एपस्टीन फाइल्स में पुरी का नाम सामने आया था, तब भाजपा ने इसे सिर्फ 'नाम का गलत इस्तेमाल' (Name-dropping) बताकर खारिज कर दिया था. हालांकि, नए ईमेल यह संकेत देते हैं कि संपर्क महज औपचारिक नहीं था.

डिजिटल इंडिया और निवेश की पिच

ईमेल रिकॉर्ड्स बताते हैं कि एपस्टीन ने हरदीप पुरी का परिचय लिंक्डइन के सह-संस्थापक रीड हॉफमैन से कराया था. इसके बाद पुरी ने हॉफमैन को भारत में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया. एक विस्तृत मेल में पुरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान का हवाला देते हुए लिखा कि भारत का इंटरनेट और टेक्नोलॉजी मार्केट तेज़ी से बढ़ रहा है. इन ईमेल्स की पुष्टि करते हुए पुरी ने कहा कि 'मैं उस समय सिर्फ भारत में व्यापारिक और निवेश के अवसरों को बढ़ावा दे रहा था. मैंने कहा था कि यह सरकार इनोवेशन और मेक इन इंडिया पर ध्यान देगी.'

‘एग्जॉटिक आइलैंड’ वाला सवाल

दस्तावेज़ों में एक ईमेल ऐसा भी है, जिसमें पुरी ने एपस्टीन से उसके “exotic island” से लौटने के बारे में पूछा था. यह वही लिटिल सेंट जेम्स द्वीप है, जिसे एपस्टीन के अपराधों का केंद्र माना जाता है. इस पर सफाई देते हुए पुरी ने कहा कि उन्होंने कभी उस द्वीप का दौरा नहीं किया और 'exotic' शब्द का इस्तेमाल सिर्फ इसलिए किया क्योंकि एपस्टीन के स्टाफ ने शायद इसे इसी तरह बताया था. इन फाइलों में ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन और पूर्व CIA निदेशक बिल बर्न्स जैसे कई अंतरराष्ट्रीय नाम भी शामिल हैं. हालांकि, पुरी के खिलाफ किसी आपराधिक गतिविधि का कोई सबूत नहीं मिला है.

अनिल अंबानी और एपस्टीन के बीच क्या हुई बातचीत?

दस्तावेज़ों का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा अनिल अंबानी से जुड़ा है. अमेरिकी न्याय विभाग के रिकॉर्ड्स के अनुसार, 2017 से 2019 के बीच अनिल अंबानी और एपस्टीन के बीच लगातार संपर्क रहा. इन बातचीतों में अमेरिकी राजनीतिक पहुंच, प्रधानमंत्री मोदी की प्राथमिकताएं और मई 2019 में न्यूयॉर्क में एक अहम बैठक का जिक्र है, जिसे एपस्टीन ने मोदी द्वारा भेजे गए प्रतिनिधि से जुड़ा बताया.

ये चैट कब की?

सबसे अहम बातचीत मई 2019 की है, जब भारत में लोकसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने वाले थे. 14 से 20 मई के बीच एपस्टीन और अंबानी ने 23 मई को मुलाकात तय की. 20 मई को एपस्टीन ने ट्रंप के पूर्व रणनीतिकार स्टीव बैनेन को मैसेज किया- modi sending someone to see me on थुरस.

चैट में क्या?

23 मई की शाम एपस्टीन ने बैनेन को फिर लिखा और इसे 'really interesting modi meeting' बताया. एपस्टीन के मुताबिक, मोदी के कथित प्रतिनिधि ने कहा कि 'no one in wash speaks to him' और यह भी कि मोदी का 'main enemy is CHINA! and their proxy in the region pakistan.' मैसेज के अंत में लिखा गया 'modi totally buys into your vision.'

एपस्टीन बार-बार चीन को लेकर चिंता जताता नजर आता है. उसने लिखा कि his focus wants to be stopping china” और आगे जोड़ा कि 'I can set.' इसके बाद उसने अनिल अंबानी से कहा कि mr modi might enjoy meeting steve bannon, you all share the china problem.' जिस पर अंबानी का जवाब था 'Sure.' हालांकि, इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि मोदी और बैनेन की ऐसी कोई मुलाकात वास्तव में हुई.

कब से शुरु हुआ बातचीत का दौर?

रिकॉर्ड्स के मुताबिक, फरवरी 2017 में दुबई पोर्ट्स वर्ल्ड के चेयरमैन सुल्तान अहमद बिन सुलायेम ने अंबानी का संपर्क एपस्टीन को दिया. 2 मार्च 2017 को अंबानी ने लिखा- 'Will need ur guidance on dealing wth white house for india relationship ad defense cooperation.' एपस्टीन का जवाब था- No ideology needed. tit for tat.' इसके बाद जारेड कुश्नर, स्टीव बैनेन और टॉम बैरक जैसे नाम बातचीत में आते हैं.

विदेश मंत्रालय ने क्या दिया जवाब?

भारत के विदेश मंत्रालय ने इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि 'प्रधानमंत्री की जुलाई 2017 की इज़रायल यात्रा के अलावा बाकी सभी बातें एक सजायाफ्ता अपराधी की बकवास हैं, जिन्हें पूरी तरह खारिज किया जाना चाहिए.'

अनिल अंबानी विवादों की कहानी?

  • अनिल अंबानी रिलायंस ADA ग्रुप के चेयरमैन हैं.
  • 2008 में फोर्ब्स ने उन्हें दुनिया का छठा सबसे अमीर व्यक्ति बताया था.
  • राफेल डील में रिलायंस डिफेंस का ऑफसेट पार्टनर बनना विवादों में रहा.
  • 2024 में SEBI ने उन्हें 5 साल के लिए बाजार से बैन किया.
  • 2025-26 में ED ने हजारों करोड़ की संपत्तियां अटैच कीं.

हैरान कर देने वाले सवाल

क्या वाकई पीएम मोदी ने किसी प्रतिनिधि को एपस्टीन के पास भेजा था? अगर हां, तो वह कौन था? इन सवालों के जवाब अब भी साफ नहीं हैं. लेकिन इतना तय है कि एपस्टीन फाइल्स के इन नए खुलासों ने भारत-अमेरिका संबंधों, कॉर्पोरेट लॉबिंग और सत्ता के पर्दे के पीछे चलने वाली बातचीत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

Similar News