का चुप साधि रहा बलवाना! जिस ईरानी जहाज को US ने मारा वह भारत का गेस्ट था, Iran के विदेश मंत्री यह कहकर क्या मैसेज दे गए?
ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि अमेरिकी पनडुब्बी ने बिना चेतावनी के ईरानी युद्धपोत पर हमला किया. यह युद्धपोत भारत में हुए अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास MILAN 2026 में हिस्सा लेकर लौट रहा था. अराघची ने इसे 'भारतीय नौसेना का मेहमान' बताया.
हिंद महासागर में डूबा ईरानी युद्धपोत पर हमला
(Image Source: x.com/araghchi/Sora_AI )Iran Warship Attack Sparks Debate Over India’s Diplomatic Balance: ईरान और इजरायल के बीच जंग जारी है. इस बीच ईरानी युद्धपोत IRIS Dena पर अमेरिकी पनडुब्बी ने हिंद महासागर (श्रीलंका के तट के पास) में हमला कर दिया, जिससे 80 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई. इस हमले के बाद ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची (Seyed Abbas Araghchi) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट कर अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाया, उन्होंने कहा कि अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में ईरानी युद्धपोत पर हमला करके 'समुद्र में बड़ा अत्याचार' किया है.
सैयद अब्बास अराघची ने अपने पोस्ट में लिखा कि ईरान का युद्धपोत फ्रिगेट डेना (IRIS Dena) भारत की नौसेना के निमंत्रण पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास MILAN 2026 naval exercise में हिस्सा लेने के बाद लौट रहा था. उनके अनुसार इस जहाज पर लगभग 130 नाविक सवार थे. इसे बिना किसी चेतावनी के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में निशाना बनाया गया. अराघची ने कहा कि अमेरिका ने जो मिसाल कायम की है, उसे लेकर उसे 'कड़वा पछतावा' होगा. उनके इस दावे के बाद सोशल मीडिया पर भी तीखी बहस शुरू हो गई.
सोशल मीडिया पर क्या बोले यूजर्स?
- कुछ यूज़र्स का कहना है कि जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव पहले से चल रहा था, तो ईरान का युद्धपोत बिना अतिरिक्त सुरक्षा के अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में भेजना रणनीतिक गलती हो सकती है. उनका कहना है कि भारत अपने मेहमानों का सम्मान करता है, लेकिन वैश्विक राजनीति में भारत को घसीटना सही नहीं है. व
- कई यूज़र्स ने ईरान के दावे का समर्थन करते हुए कहा कि अमेरिकी पनडुब्बी ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में लगभग 40 किलोमीटर श्रीलंका के पास इस जहाज को टॉरपीडो से निशाना बनाया. कुछ रिपोर्टों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि इस हमले में कई नाविकों की मौत हुई और कई लापता हैं.
- कुछ विश्लेषकों ने यह भी कहा कि IRIS Dena भारत के विशाखापत्तनम में आयोजित MILAN 2026 नौसैनिक अभ्यास में शामिल होने आया था, लेकिन यह अभ्यास 25 फरवरी को समाप्त हो चुका था. ऐसे में जहाज के भारतीय समुद्री सीमा से बाहर निकलने के बाद उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भारत की नहीं थी और ईरानी जहाज ने भारतीय नौसेना से किसी तरह की सुरक्षा या एस्कॉर्ट भी नहीं मांगी थी.
- इस घटना को लेकर कई लोगों ने अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि अगर किसी देश का युद्धपोत हजारों किलोमीटर दूर अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में बिना चेतावनी के डुबो दिया जाता है, तो यह वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरनाक उदाहरण हो सकता है.
- सोशल मीडिया पर ऐसी अफवाहें भी उड़ीं कि अमेरिका ने भारतीय हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल किया, जिसका भारत के PIB ने खंडन किया.
AAP MP संजय सिंह ने क्या कहा?
इसी मुद्दे पर आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि यह घटना भारत के लिए भी चिंता की बात है क्योंकि ईरान का जहाज भारत के निमंत्रण पर MILAN 2026 अभ्यास में शामिल होने आया था. संजय सिंह ने आरोप लगाया कि इस हमले में कई नाविक मारे गए और भारत सरकार की चुप्पी पर सवाल उठते हैं. उन्होंने कहा कि सरकार को इस मामले में स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए. कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती जैसे नेताओं ने भी भारत की 'चुप्पी' पर सवाल उठाए हैं और पूछा है कि क्या भारत इस तरह के हमलों का समर्थन करता है.
ईरान के विदेश मंत्री के बयान के क्या हैं मायने?
ईरानी युद्धपोत IRIS Dena को अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा हिंद महासागर (श्रीलंका के तट के पास) में डुबोए जाने के बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) का बयान एक सोची-समझी कूटनीतिक चाल है. अराघची ने जानबूझकर इस जहाज को 'भारतीय नौसेना का मेहमान' (Guest of the Indian Navy) बताया क्योंकि यह जहाज भारत में एक नौसैनिक अभ्यास (Naval Exercise) से लौट रहा था. इसके जरिए वे यह संदेश देना चाहते हैं;
- नैतिक दबाव: अगर आपके घर से लौट रहे मेहमान पर हमला होता है, तो यह आपकी सुरक्षा और संप्रभुता (Sovereignty) पर भी एक तरह का सवाल है.
- भारत को पक्ष लेने पर मजबूर करना: 'मेहमान' शब्द का इस्तेमाल कर ईरान भारत को इस मामले में चुप रहने के बजाय अमेरिका की निंदा करने के लिए उकसा रहा है.
- क्षेत्रीय सुरक्षा: ईरान यह दिखाना चाहता है कि अमेरिका अब भारत के प्रभाव वाले क्षेत्र (Indian Ocean) में भी असुरक्षा पैदा कर रहा है.
भारत की 'चुप्पी' पर क्यों उठ रहे सवाल?
भारत सरकार ने इस घटना पर अब तक कोई तीखी प्रतिक्रिया नहीं दी है, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में संघर्ष को 'जल्द समाप्त' करने की सामान्य अपील की है. ऐसे में उसकी चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं. इसकी बड़ी वजह यह है कि भारत न तो ईरान के साथ अपने ऐतिहासिक रिश्तों को खराब करना चाहता है और न ही अमेरिका जैसे महत्वपूर्ण रक्षा भागीदार को नाराज करना चाहता है. भारत इस विवाद में सीधे तौर पर घसीटे जाने से बच रहा है, क्योंकि यह हमला अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुआ है, भारतीय समुद्री सीमा में नहीं.
ईरान 'मेहमान' शब्द का कार्ड खेलकर भारत को अमेरिका के खिलाफ खड़ा करना चाहता है, जबकि भारत अपनी 'साइलेंट डिप्लोमेसी' के जरिए दोनों शक्तियों के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है.