बारूद के गुबार के बीच पेट्रोल-डीजल-रसोई गैस की कीमतों का क्या है हाल, सोना-चांदी अभी लिया जाए कि नहीं?
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान-इज़राइल संघर्ष का असर अब वैश्विक बाजारों पर भी साफ दिखने लगा है. तेल की कीमतों में उछाल के साथ सोना-चांदी में भी तेज उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, जिससे निवेशक और सरकारें दोनों सतर्क हो गई हैं.
US-Iran-Israel War Impact: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान-इज़राइल संघर्ष का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार, सोने और चांदी की कीमतों पर भी दिखने लगा है. तेल की कीमतों में उछाल आने से आने वाले समय में ईंधन महंगा होने की आशंका बढ़ गई है। साथ ही सोना और चांदी जैसे कीमती धातुओं के दाम में भी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है.
तेल, सोना और चांदी की कीमतों के साथ-साथ भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है. हालांकि सरकार का कहना है कि फिलहाल देश के पास पर्याप्त ऊर्जा भंडार मौजूद है.
दिल्ली में क्या हैं सोने और चांदी के दाम?
दिल्ली में आज चांदी की कीमत 284.90 रुपये प्रति ग्राम और 2,84,900 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई है. वहीं सोने की कीमत की बात करें तो 24 कैरेट सोना 16,465 रुपये प्रति ग्राम, 22 कैरेट सोना 15,094 रुपये प्रति ग्राम और 18 कैरेट सोना 12,352 रुपये प्रति ग्राम पर कारोबार कर रहा है.
क्या गिरे हैं सोने और चांदी के दाम?
आज सोने के दाम में भारी गिरावट देखने को मिली है. सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,59,390 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई है. आज यह 5300 रुपये सस्ता हुआ है.
डॉलर और बॉन्ड यील्ड का क्या होता है असर?
इस बीच अमेरिकी डॉलर इंडेक्स बढ़कर लगभग 99 के आसपास पहुंच गया है, जो एक महीने से ज्यादा समय का उच्च स्तर है. वहीं अमेरिका के 10 साल के ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड 4.09 से 4.11 प्रतिशत के बीच बनी हुई है. आमतौर पर डॉलर और बॉन्ड यील्ड बढ़ने से सोना-चांदी जैसे कीमती धातुओं पर दबाव पड़ता है, क्योंकि इन पर कोई ब्याज नहीं मिलता.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
ET के मुताबिक, ब्रिकवर्क रेटिंग्स में क्राइटेरिया, मॉडल डेवलपमेंट और रिसर्च के प्रमुख राजीव शरण का कहना है कि जब तक ईरान और इज़राइल के बीच तनाव बना रहेगा, तब तक कीमती मेटल्स की कीमतों को समर्थन मिलता रह सकता है.
क्या सोना और चांदी खरीदना सही?
निवेशकों को सोने और चांदी में लेन-देन करते समय सोच-समझकर कदम उठाने की सलाह दी जा रही है. मौजूदा हालात को देखते हुए इन दोनों कीमती धातुओं की कीमतें फिलहाल मजबूत बनी रह सकती हैं. जो निवेशक मौजूदा ऊंचे दाम का फायदा उठाना चाहते हैं, वे आंशिक प्रोफिट बुकिंग कर सकते हैं, वहीं जो लोग नई खरीदारी करना चाहते हैं, उनके लिए बेहतर होगा कि कीमतों में आने वाली गिरावट के दौरान धीरे-धीरे निवेश करें.
तेल की कीमतों पर क्यों बढ़ी चिंता?
ईरान ने दक्षिण में स्थित अहम समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों को गुजरने से चेतावनी दी है. बीते रोज़ ईरान ने दावा किया कि उसने इस जगह पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया है. यह दुनिया का एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है, जहां से करीब 20 प्रतिशत ग्लोबल ऑयल तेल और गैस की सप्लाई होती है.
अगर इस रास्ते पर लंबे समय तक रुकावट रहती है और तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो इसका असर कई वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है. हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि यह संघर्ष तेल, गैस और ऊर्जा की कीमतों पर लंबे समय तक असर डालेगा या नहीं.
भारत में पेट्रोल, डीजल और गैस की क्या है कंडीशन?
नई दिल्ली में घरेलू एलपीजी सिलेंडर (14.2 किलोग्राम) की कीमत 853 रुपये है. पिछले 12 महीनों से इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है. दिल्ली में आज डीजल की कीमत 87.67 रुपये प्रति लीटर है और इसमें भी पिछले एक साल से कोई बदलाव नहीं हुआ है. वहीं पेट्रोल की कीमत 94.77 रुपये प्रति लीटर बनी हुई है और यह दर भी पिछले 12 महीनों से स्थिर है.
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी का कहना है कि भारत के पास पर्याप्त ऊर्जा भंडार है और सरकार वैश्विक ऊर्जा बाजार पर लगातार नजर रख रही है, ताकि देश में सप्लाई बाधित न हो.
मिडिल ईस्ट पर कितना निर्भर है भारत?
भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है. इसमें से करीब 45 से 50 प्रतिशत तेल मिडिल ईस्ट से आता है. इसलिए खाड़ी क्षेत्र में किसी भी तरह की रुकावट का असर भारत पर पड़ सकता है.
भारत के पास कितना तेल भंडार है?
सरकारी सूत्रों के अनुसार फिलहाल भारत के पास करीब 8 हफ्तों का कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का भंडार मौजूद है. इसमें करीब 25 दिन का कच्चा तेल और लगभग 25 दिन का पेट्रोल-डीजल स्टॉक शामिल है. भारत के पास रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार के साथ-साथ रिफाइनरी और तेल कंपनियों के पास भी व्यावसायिक भंडार मौजूद हैं. इनका उपयोग अस्थायी सप्लाई रुकावट की स्थिति में किया जाता है.
होर्मुज से सप्लाई रुकने का भारत पर असर?
अगर कुछ समय के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल की सप्लाई पूरी तरह रुक जाती है, तो भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती लॉजिस्टिक्स और कीमतों से जुड़ी हो सकती है. भारत हर दिन लगभग 2.6 मिलियन बैरल तेल इसी रास्ते से आयात करता है, जो कुल आयात का करीब आधा है.
भारत के पास क्या विकल्प हैं?
भारत पिछले कुछ सालों से अपने तेल आयात के स्रोतों को विविध बना रहा है. रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने रूस से तेल खरीद बढ़ाई थी. इसके अलावा भारत अमेरिका, कनाडा, पश्चिम अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे देशों से भी तेल खरीद रहा है. विशेषज्ञों के अनुसार भारत के पास 40 से ज्यादा देशों से तेल आयात करने का विकल्प है और जरूरत पड़ने पर इन स्रोतों से सप्लाई बढ़ाई जा सकती है.
सप्लाई बंद होने पर क्या पड़ेगा कीमतों पर असर?
इसके अलावा भारत सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन और अबू धाबी क्रूड ऑयल पाइपलाइन के जरिए भी तेल हासिल कर सकता है, जिससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बायपास किया जा सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई कुछ समय के लिए रुकती है तो तुरंत असर कीमतों और लॉजिस्टिक्स पर पड़ेगा. हालांकि लंबे समय तक रुकावट रहने पर सप्लाई से जुड़ा जोखिम बढ़ सकता है.