US-Israel attack on Iran: फ्लाइट रद्द और जेब खाली, दुबई में फंसे भारतीयों की लाखों रुपये की घर वापसी
US-Israel और Iran संघर्ष के बाद Middle East का एयरस्पेस बाधित हो गया, जिससे Dubai में सैकड़ों भारतीय फंस गए. महंगे टिकट, होटल खर्च और अनिश्चितता ने उनकी घर वापसी को लाखों रुपये का सौदा बना दिया.
US-Israel attack on Iran: ''मैं जब दुबई घूमने आया था, तब दिमाग में बस यही था कि कुछ दिन परिवार के साथ सुकून से वक्त बिताऊंगा और तय तारीख पर भारत लौट जाऊंगा. लेकिन किस्मत ने ऐसा मोड़ ले लिया जिसकी मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी. अमेरिका-इज़राइल के ईरान पर हमले और उसके बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई ने पूरे वेस्ट एशिया की हवाई व्यवस्था को झकझोर कर रख दिया. अचानक उड़ानें रद्द होने लगीं, एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी मच गई और हम जैसे सैकड़ों भारतीय दुबई में फंस गए.'' ये कहना है पुणे के रहने वाले विनोद सोलंकी का जो दुबई में फंस गए थे और मुश्किल से वापस लौट सके.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान-इजरायल युद्ध की चिंगारी का असर सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसकी लपटें हजारों आम यात्रियों की जिंदगी तक पहुंच गईं. दुबई जैसे अंतरराष्ट्रीय ट्रांजिट हब में फंसे भारतीय नागरिक आज खुद को एक ऐसी मजबूरी में घिरा पा रहे हैं, जहां सुरक्षित रहना तो संभव है, लेकिन घर लौटना बेहद महंगा सौदा बन चुका है. दुबई में फंसे भारतीयों को लाखों रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ रहे हैं.
'चार दिन में लाखों उड़ गए'
पुणे निवासी विनोद सोलंकी अपने परिवार के चार सदस्यों के साथ दुबई में फंसे थे. उन्होंने बताया कि उनकी वापसी की तारीख 28 फरवरी तय थी, लेकिन हालात ऐसे बने कि उन्हें चार दिन अतिरिक्त रुकना पड़ा. विनोद के मुताबिक, “मैंने दो टिकट स्पाइसजेट की फ्लाइट के लिए बुक किए हैं, जिनकी कीमत 80 हजार रुपये प्रति व्यक्ति पड़ी. हर दिन खाने और होटल पर करीब 25 हजार रुपये खर्च हो रहे हैं. अब तक लाखों रुपये सिर्फ इसलिए खर्च हो चुके हैं क्योंकि फ्लाइट नहीं मिली.” उनका कहना है कि दुबई में हालात सामान्य हैं, कोई बमबारी नहीं हो रही, लेकिन अनिश्चितता सबसे बड़ी परेशानी है. “पता नहीं कल फ्लाइट होगी या फिर रद्द हो जाएगी - यही डर हर वक्त बना रहता है,” वे कहते हैं.
टिकट मिला, पर रिस्क के साथ
हर यात्री की कहानी अलग है, लेकिन परेशानी लगभग एक जैसी. पुणे के ही नील कोहळटकर का मामला भी कुछ ऐसा ही रहा. उन्हें डर था कि उनकी एमिरेट्स फ्लाइट रद्द हो जाएगी, इसलिए उन्होंने फुजैरा एयरपोर्ट से चार्टर फ्लाइट का टिकट 60 हजार रुपये में पहले ही बुक कर लिया. बाद में सोशल मीडिया पर एयरलाइन से संपर्क करने पर उन्हें पता चला कि उनकी फ्लाइट चालू है. “मैंने रिस्क लिया और एयरपोर्ट चला गया. किस्मत अच्छी थी कि फ्लाइट उड़ गई, वरना चार्टर टिकट का पैसा भी डूब जाता,” उन्होंने कहा.
सरकार की पहल: व्हाट्सऐप हेल्पलाइन और चार्टर फ्लाइट
महाराष्ट्र सरकार ने पश्चिम एशिया में फंसे नागरिकों के लिए एक व्हाट्सऐप हेल्पलाइन नंबर (+971503654357) जारी किया है. इसके अलावा उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की पहल पर दो चार्टर फ्लाइट्स के जरिए 164 नागरिकों को वापस लाया गया. हालांकि, राहत सीमित है. चार्टर फ्लाइट का किराया भी सामान्य टिकट से कई गुना ज्यादा है, जिससे हर कोई इसका फायदा नहीं उठा पा रहा.
“हर दिन 10 हजार खर्च” - डॉक्टर निखिल असावा की कहानी
पुणे के ही रहने वाले डॉक्टर निखिल असावा और उनकी पत्नी की फ्लाइट 1 मार्च को रद्द हो गई थी. तब से वे दुबई में फंसे हैं. उनका कहना है, “हम रोज करीब 10 हजार रुपये सिर्फ रहने और खाने में खर्च कर रहे हैं. जो भी फ्लाइट मिल रही है, उसका किराया 80 हजार से लेकर 1.2 लाख रुपये तक है. चार्टर फ्लाइट के लिए 80 हजार रुपये और उस पर 18% जीएसटी मांगा जा रहा है.” उन्होंने बताया कि अब तक वे एक लाख रुपये से ज्यादा खर्च कर चुके हैं. “हम सुरक्षित हैं, लेकिन हालात दिन-ब-दिन खराब होते जा रहे हैं. पैसा चिंता का विषय है, पर जान सबसे ज्यादा जरूरी है,” उन्होंने कहा.
टीवी की खबरें बढ़ा रहीं परिवार की बेचैनी
डॉ. असावा ने एक और गंभीर मुद्दा उठाया - भारतीय टीवी चैनलों की सनसनीखेज कवरेज. उनके अनुसार, “कुछ चैनल दुबई में सायरन और बमबारी दिखा रहे हैं, जबकि यहां ऐसी कोई स्थिति नहीं है. हमारे परिवार भारत में टीवी देखकर घबरा जाते हैं और बार-बार फोन करते हैं. हमें उन्हें समझाना पड़ता है कि हम सुरक्षित हैं, लेकिन उन्हें लगता है कि हम सिर्फ उन्हें शांत करने के लिए झूठ बोल रहे हैं.” इस तरह, मीडिया की बढ़ा चढ़ाकर पेश की जा रही रिपोर्ट ने पहले से तनाव में जी रहे यात्रियों की मानसिक परेशानी और बढ़ा दी है.
सुरक्षित रहना आसान, लौटना महंगा
दुबई में फंसे ज्यादातर भारतीय मानते हैं कि वे शारीरिक रूप से सुरक्षित हैं. वहां न तो सीधी लड़ाई हो रही है और न ही आम नागरिकों पर हमला. लेकिन समस्या यह है कि वे अपने देश लौट नहीं पा रहे और हर दिन की देरी उन्हें हजारों रुपये का नुकसान पहुंचा रही है. होटल, खाना, लोकल ट्रांसपोर्ट और टिकट - सब मिलाकर कई परिवारों का खर्च 2 से 3 लाख रुपये तक पहुंच चुका है. जिनके पास सीमित बचत है, उनके लिए यह हालात और भी ज्यादा भयावह हैं.




