समंदर के नीचे भारत का ब्रह्मास्त्र! INS अरिधमन पाक और चीन की उड़ा देगा नींद, तैयार है भारत की नई परमाणु पनडुब्बी
भारत जल्द ही अपनी नई परमाणु पनडुब्बी INS अरिधमन को नौसेना में शामिल कर सकता है, जिससे समुद्र के नीचे से जवाबी हमले की ताकत और मजबूत होगी. यह क्षमता भारत की ‘सेकंड स्ट्राइक’ नीति को मजबूती देती है और चीन व पाकिस्तान की रणनीति पर सीधा असर डालेगी.
हिंद महासागर में भारत की ताकत लगातार बढ़ रही है और अब इसका असर सीधे चीन और पाकिस्तान की रणनीति पर पड़ने वाला है. रिपोर्ट्स के अनुसार भारत अपनी तीसरी परमाणु शक्ति से लैस पनडुब्बी INS अरिधमन को जल्द ही नौसेना में शामिल करने जा रहा है. यह वही हथियार है जो दुश्मन को दिखाई भी नहीं देता और जरूरत पड़ने पर हजारों किलोमीटर दूर तक परमाणु हमला कर सकता है.
चीन पहले से ही अपनी पनडुब्बियों के जरिए हिंद महासागर में मौजूदगी बढ़ा रहा है और पाकिस्तान लगातार भारत को परमाणु धमकी देता रहता है. ऐसे में INS अरिधमन की तैनाती भारत के लिए एक ऐसा सुरक्षा कवच बनेगी, जिससे दुश्मन चाहे जितनी तैयारी कर ले, भारत जवाब देने में सक्षम रहेगा.
INS अरिधमन क्या है और इसे इतना खास क्यों माना जा रहा है?
INS अरिधमन भारत की तीसरी परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) है. यह वही श्रेणी की पनडुब्बी है जो समुद्र के अंदर रहकर परमाणु मिसाइलें दाग सकती है. इससे पहले भारत के पास INS अरिहंत और INS अरिघात मौजूद हैं. अरिधमन इन दोनों से ज्यादा ताकतवर और आधुनिक मानी जा रही है.
यह पनडुब्बी भारत के गुप्त ‘एडवांस्ड टेक्नोलॉजी व्हीकल प्रोग्राम’ के तहत बनाई गई है और इसे पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से तैयार किया गया है. इसका मतलब यह है कि भारत अब इस तकनीक में आत्मनिर्भर हो चुका है.
INS अरिधमन की सबसे बड़ी ताकत क्या है?
- छिपकर हमला करने की क्षमता
- परमाणु मिसाइल दागने की ताकत
- लंबे समय तक समुद्र में छिपे रहना
यह पनडुब्बी समुद्र की गहराई में महीनों तक बिना ऊपर आए रह सकती है. इसका न्यूक्लियर रिएक्टर इसे लगातार ऊर्जा देता रहता है. दुश्मन को यह पता ही नहीं चलता कि यह कहां मौजूद है और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है.
INS अरिधमन में कौन-कौन सी मिसाइलें लगेंगी?
INS अरिधमन में दो तरह की परमाणु क्षमता वाली मिसाइलें तैनात की जाएंगी. पहली मिसाइल है K-15 (सागरिका), जिसकी मारक क्षमता करीब 750 किलोमीटर है. दूसरी और ज्यादा ताकतवर मिसाइल है K-4 जिसकी रेंज 3000 से 3500 किलोमीटर तक बताई जाती है. इसका मतलब यह है कि यह पनडुब्बी समुद्र में रहते हुए चीन और पाकिस्तान के बड़े हिस्सों को निशाना बना सकती है.
INS अरिधमन का वजन और आकार कितना बड़ा है?
INS अरिधमन का वजन लगभग 7000 टन है. यह अपने पहले मॉडल INS अरिहंत से ज्यादा बड़ी और भारी है. इसमें ज्यादा मिसाइलें रखी जा सकती हैं और यह ज्यादा समय तक समुद्र में रह सकती है. यह पनडुब्बी एक चलता-फिरता अंडरवॉटर किला है, जिसे पकड़ना या ट्रैक करना दुश्मन के लिए बेहद मुश्किल होगा.
दुश्मन को दिखाई क्यों नहीं देगी यह पनडुब्बी?
INS अरिधमन को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह आवाज बहुत कम पैदा करती है. इसमें खास तरह की साउंड एब्जॉर्बिंग टाइल्स लगी हैं, जो इसकी आवाज को दबा देती हैं. इसके अलावा इसमें आधुनिक देसी सोनार सिस्टम लगाए गए हैं, जिनके नाम हैं उषुस और पंचेंद्रिय. ये सिस्टम दुश्मन की हलचल को पहचान लेते हैं, लेकिन खुद को सामने नहीं आने देते.
‘सेकंड स्ट्राइक क्षमता’ का मतलब क्या है और यह क्यों जरूरी है?
परमाणु युद्ध की रणनीति में एक शब्द बहुत अहम होता है - Second Strike Capability यानी जवाबी हमला करने की ताकत. मान लीजिए किसी देश ने भारत पर अचानक परमाणु हमला कर दिया. अगर भारत के सारे हथियार जमीन पर हों और नष्ट हो जाएं, तो जवाब देना मुश्किल होगा. लेकिन अगर भारत की परमाणु पनडुब्बी समुद्र में छिपी हुई है, तो वह हमला झेलने के बाद भी दुश्मन पर हमला कर सकती है. यही वजह है कि INS अरिधमन भारत को यह ताकत देती है कि कोई भी देश भारत पर हमला करने से पहले हजार बार सोचे.
भारत की ‘न्यूक्लियर ट्रायड’ में INS अरिधमन की भूमिका क्या होगी?
न्यूक्लियर ट्रायड का मतलब है जमीन, हवा और समुद्र तीनों जगहों से परमाणु हमला. INS अरिधमन समुद्र वाला हिस्सा मजबूत करती है. अब भारत जमीन, आसमान और समुद्र - तीनों जगह से परमाणु हमला करने में सक्षम हो जाएगा. दुनिया में यह ताकत सिर्फ अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन के पास है. अब भारत भी इस क्लब में मजबूती से खड़ा है.
चीन और पाकिस्तान के लिए यह क्यों चिंता की बात है?
चीन अपनी पनडुब्बियों को हिंद महासागर में भेज रहा है और पाकिस्तान अपनी नौसेना को मजबूत करने की कोशिश में लगा है. INS अरिधमन की मौजूदगी से भारत को यह फायदा होगा कि वह समुद्र से ही दुश्मन पर नजर रख सकेगा. अगर पाकिस्तान या चीन किसी तरह का दुस्साहस करता है, तो भारत के पास जवाब देने के कई रास्ते होंगे और उनमें सबसे खतरनाक रास्ता समुद्र के नीचे से आने वाला हमला होगा.
INS अरिधमन कहां से ऑपरेट करेगी?
INS अरिधमन को विशाखापट्टनम के पास बने विशेष नौसैनिक अड्डे से ऑपरेट किया जाएगा. यह बेस खास तौर पर परमाणु पनडुब्बियों के लिए बनाया गया है, जहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं. यहां से यह पनडुब्बी हिंद महासागर में गश्त करेगी और जरूरत पड़ने पर मिशन पर जाएगी.
भारत की समुद्री ताकत आगे कैसे बढ़ेगी?
भारत आने वाले समय में और भी परमाणु पनडुब्बियां बनाने की योजना पर काम कर रहा है. इसके अलावा रूस से एक और परमाणु अटैक सबमरीन लेने की तैयारी है और जर्मनी के साथ नई पीढ़ी की पनडुब्बियों पर बातचीत चल रही है. इसका मतलब साफ है - भारत अब सिर्फ जमीन पर ही नहीं, बल्कि समुद्र में भी बड़ी ताकत बनता जा रहा है.
INS अरिधमन सिर्फ एक पनडुब्बी नहीं, बल्कि भारत की समुद्री ढाल है. यह चीन और पाकिस्तान के लिए साफ संदेश है कि भारत की सुरक्षा से खिलवाड़ आसान नहीं होगा. समंदर के नीचे छिपी यह परमाणु ताकत भारत को आने वाले दशकों तक मजबूत बनाए रखेगी और यही इसकी सबसे बड़ी उपलब्धि है.




