UGC New Rules 2026: छात्रों को मिला ‘हथियार’, लेकिन सोशल में क्यों मचा हल्ला? जानें नए नियम के तहत कैसे करें शिकायत

UGC ने 2026 में सख्त समानता नियम लागू किए हैं, जिससे बवाल मच गया है. कैंपस में भेदभाव के खिलाफ आसान और सुरक्षित शिकायत व्यवस्था को अपनाया गया है. ऑनलाइन पोर्टल, हेल्पलाइन, ईमेल और ऑफलाइन शिकायत का विकल्प है. नियमों को लेकर अगड़ी और पिछड़ी जातियों के बीच तीखी बहस देखने को मिल रही है.;

( Image Source:  Sora_ AI )
Edited By :  अच्‍युत कुमार द्विवेदी
Updated On : 26 Jan 2026 7:22 PM IST

UGC New Rules 2026 Explainer Controversy: यूजीसी के नए नियम  के तहत अब कॉलेज और यूनिवर्सिटी कैंपस में होने वाले जाति, वर्ग, लैंगिक या सामाजिक भेदभाव के खिलाफ छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और सुरक्षित शिकायत प्रणाली दी गई है. इन नियमों का मकसद कैंपस में समानता, गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करना बताया जा रहा है, लेकिन इन्हीं नियमों को लेकर अब देशभर में तीखी बहस और विरोध भी शुरू हो गया है.

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम, 2026’ जारी किए हैं. यह नियम रोहित वेमुला और पायल ताडवी मामलों से जुड़ी याचिकाओं की पृष्ठभूमि में लाए गए हैं, जिनका उद्देश्य वंचित वर्गों के लिए संस्थागत संरक्षण तंत्र तैयार करना है.

UGC के मुताबिक, अब हर कॉलेज और यूनिवर्सिटी को समान अवसर केंद्र (Equal Opportunity Centre – EOC) स्थापित करना होगा, 24×7 इक्विटी हेल्पलाइन चलानी होगी, डिजिटल, ईमेल और ऑफलाइन, तीनों माध्यमों से शिकायत स्वीकार करनी होगी.

UGC के नए नियमों के तहत शिकायत कैसे करें? (Step-by-Step)

  • ऑनलाइन पोर्टल से शिकायत: हर संस्थान को अपनी वेबसाइट पर Grievance / EOC नाम से अलग लिंक देना अनिवार्य होगा. छात्र घर बैठे अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं.
  • 24 घंटे हेल्पलाइन: अब हर संस्थान के लिए 24×7 इक्विटी हेल्पलाइन नंबर अनिवार्य कर दिया गया है.
  • ईमेल के जरिए शिकायत: कॉलेज के Equal Opportunity Centre (EOC) को ईमेल भेजकर औपचारिक शिकायत की जा सकती है.
  • ऑफलाइन लिखित शिकायत: छात्र चाहें तो सीधे कॉलेज जाकर लिखित शिकायत भी दर्ज कर सकते हैं.

पहचान रहेगी गोपनीय

UGC नियमों के तहत शिकायतकर्ता अपनी पहचान गोपनीय रखने का अनुरोध कर सकता है, जिसे संस्थान को मानना होगा.

शिकायत के बाद क्या होगा?

  • कॉलेज की इक्विटी कमेटी तुरंत जांच शुरू करेगी
  • कमेटी में SC, ST, OBC, महिलाएं और PwD प्रतिनिधि अनिवार्य होंगे
  • गंभीर मामलों में पुलिस में FIR दर्ज कराना जरूरी होगा
  • रिपोर्ट प्रिंसिपल/कुलपति को सौंपी जाएगी
  • अगर शिकायतकर्ता फैसले से संतुष्ट नहीं है, तो वह 30 दिन के भीतर लोकपाल (Ombudsman) के पास अपील कर सकता है।

नियम तोड़ने वाले कॉलेजों पर क्या कार्रवाई होगी?

UGC ने चेतावनी दी है कि नियमों की अनदेखी करने पर भारी जुर्माना लगेगा और सरकारी ग्रांट रोक दी जाएगी. यहां तक कि डिग्री की मान्यता रद्द भी की जा सकती है.

विवाद क्यों हो रहा है?

UGC के नए नियमों में ‘जाति-आधारित भेदभाव’ की परिभाषा में SC, ST के साथ-साथ OBC को भी शामिल किया गया है. इसी बात को लेकर सामान्य वर्ग (अगड़ी जातियों) में नाराज़गी है. सोशल मीडिया पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि नियम एकतरफा हैं, झूठी शिकायतों से बचाव का तंत्र कमजोर है और कैंपस 'जातिगत युद्धक्षेत्र' बन सकते हैं. 

'शिक्षा का मैदान बराबरी का होना चाहिए, जातिवाद का अखाड़ा नहीं'

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X  पर #NoUGCRollBack_NoVote, #ShameOnUGC, #सवर्ण_विरोधी_मोदी ट्रेंड कर रहा है. एक यूज़र ने लिखा, शिक्षा का मैदान बराबरी का होना चाहिए, जातिवाद का अखाड़ा नहीं. कानून वही सही होता है जो सबके लिए बराबर हो. UGC का नया नियम एक वर्ग को दोषी मानकर संविधान के ‘समानता के अधिकार’ का अपमान करता है. यह सुधार नहीं, भेदभाव है. वहीं, दूसरे यूजर ने कहा, मोदी जी छात्रों का जाति में मत बांटिए. शिक्षा का उद्देश्य अवसर देना है, विभाजन नहीं. कृपया यूजीसी के फैसले को वापस ले लीजिए.

#We_Support_UGC_Rule क्यों कर रहा ट्रेंड?

दूसरी तरफ, X पर #We_Support_UGC_Rule भी ट्रेंड कर रहा है. पिछड़े और वंचित वर्गों के छात्रों का कहना है कि पहली बार सिस्टम हमारी आवाज सुनने के लिए मजबूर हुआ है. उनका कहना है कि यूनिवर्सिटियों में पिछले कई सालों से जाति देखकर जो चयन होता आ रहा था, वो मनमानी अब नहीं चलेगी.  SC, ST और OBC छात्रों को Interview में कम नंबर देकर जातिगत भेदभाव करने वाले दोषी प्रोफ़ेसर और अधिकारियों पर कार्रवाई होगी.

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