‘न्याय दरवाजों के पीछे रो रहा है’, SIR पर SC में CM ममता ने खुद संभाला मोर्चा, EC के इरादों पर उठाए सवाल, 10 Points

पश्चिम बंगाल में SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के खिलाफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में खुद दलीलें पेश कीं. ECI पर बंगाल को निशाना बनाने का आरोप लगाते हुए कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया.;

( Image Source:  ANI )
By :  धीरेंद्र कुमार मिश्रा
Updated On : 4 Feb 2026 5:07 PM IST

पश्चिम बंगाल SIR विवाद ने अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया है. इस बार खुद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मोर्चे पर हैं. चुनाव से पहले मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर ममता बनर्जी ने भारतीय चुनाव आयोग (ECI) पर सीधे तौर पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि बंगाल के लोगों को दबाने की कोशिश की जा रही है.

सुप्रीम कोर्ट में खुद दलीलें पेश करते हुए ममता ने न सिर्फ चुनाव आयोग के फैसलों को चुनौती दी, बल्कि यह भी पूछा कि जब SIR इतना जरूरी है तो असम जैसे राज्यों में यह प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई जा रही? इस हाई-वोल्टेज सुनवाई में कोर्ट ने ECI को नोटिस जारी किया और अगली सुनवाई की तारीख तय की, जिससे यह मामला अब राष्ट्रीय सियासी बहस का केंद्र बन गया है.

ममता बनर्जी का बयान 10 प्वाइंट में

1. CM ममता बनर्जी ने SIR के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में खुद केस लड़ा.

2. ममता ने ECI पर आरोप लगाया कि उनकी 6 चिट्ठियों का कोई जवाब नहीं मिला.

3. सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने याचिका को गंभीर मानते हुए ECI को नोटिस जारी किया.

4. ममता बनर्जी ने पूछा - ‘अगर SIR जरूरी है तो असम में क्यों नहीं?’

5. CM ने दावा किया कि बंगाल को जानबूझकर टारगेट किया जा रहा है.

6. BJP शासित राज्यों से माइक्रो ऑब्जर्वर भेजने पर भी सवाल उठे.

7. सीएम ने SIR से एक करोड़ से ज्यादा लोगों को नोटिस मिलने का दावा किया गया.

8. सुप्रीम कोर्ट पहले ही SIR को अधिक पारदर्शी बनाने के निर्देश दे चुका है.

9. अंतिम मतदाता सूची की समयसीमा पर भी अब संशय बना हुआ है.

10. यह मामला 2026 विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा सियासी मुद्दा बन गया है.

डिटेल में जानें, ममता बनर्जी ने अदालत में क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट में खुद की पहल पर दलील पेश करने वाली पहली सीएम

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के खिलाफ दायर अपनी याचिका पर खुद दलीलें पेश कर इतिहास रच दिया. वह ऐसा करने वाली पहली मौजूदा मुख्यमंत्री बनीं, जिन्होंने व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में अपने तर्क रखे.

‘ECI ने मेरी 6 चिट्ठियों का जवाब नहीं दिया’

सीएम ममता बनर्जी ने तेज और भावुक अंदाज में बोलते हुए आरोप लगाया कि भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने उनके बार-बार किए गए अनुरोधों को नजरअंदाज किया.

उन्होंने कहा - “हमने छह बार लिखा, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. आखिर न्याय कहां मिलेगा?”

‘असम में SIR क्यों नहीं?’ ECI के इरादों पर सवाल

ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट के सामने बड़ा सवाल उठाया - जब SIR इतना जरूरी है, तो यह सिर्फ पश्चिम बंगाल में ही क्यों? असम में क्यों नहीं? उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है और बीजेपी शासित राज्यों से माइक्रो ऑब्जर्वर भेजे जा रहे हैं.

‘न्याय दरवाजों के पीछे रो रहा है’, CM ममता का इमोशनल स्टेटमेंट

ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कहा, “जब न्याय दरवाजों के पीछे रो रहा हो, तब हम मजबूर होकर यहां आए हैं. मैं अपनी पार्टी के लिए नहीं, लोगों के अधिकारों के लिए लड़ रही हूं.” यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और Google Discover के लिए भी यह हाई-एंगेजमेंट ट्रिगर बन गया है.

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को माना गंभीर, ECI को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली शामिल हैं, ने ममता बनर्जी की याचिका को गंभीर मानते हुए चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया. शीर्ष अदालत ने अगली सुनवाई सोमवार के लिए तय की है.

SIR क्या है और क्यों हो रहा है विवाद?

SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के तहत मतदाता सूची का व्यापक पुनरीक्षण किया जाता है. ममता बनर्जी का आरोप है कि एक करोड़ से ज्यादा लोगों को नोटिस भेजे गए हैं. आम मतदाताओं पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है. चुनाव से ठीक पहले प्रक्रिया शुरू करना संदेह पैदा करता है. सीएम अदालत से अपील भरे लहजे में कहा, ‘कृपया लोगों के अधिकारों की रक्षा करें. हम आभारी रहेंगे.”

बंगाल में SIR का पूरा शेड्यूल

  • SIR शुरू: 4 नवंबर 2025
  • ड्राफ्ट वोटर लिस्ट: 16 दिसंबर 2025
  • दावे-आपत्तियों की अंतिम तारीख: 19 जनवरी
  • फाइनल लिस्ट (संभावित): 14 फरवरी 2026

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