100+ देशों की मौजूदगी, 40 से ज्यादा बड़ी कंपनियां और 500 सेशन; जानें दिल्ली में होने वाले AI समिट में क्या है खास

नई दिल्ली एक बार फिर वैश्विक मंच पर सुर्खियों में है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर दुनिया की सबसे अहम चर्चाओं में से एक- AI Impact Summit 2026 की मेजबानी भारत कर रहा है. 100 से ज्यादा देशों, टॉप लीडर्स, टेक दिग्गजों और नीति निर्माताओं की मौजूदगी में यह समिट सिर्फ तकनीकी बहस नहीं, बल्कि भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था, रोजगार और विकास के नए मॉडल पर मंथन का मंच बनेगा.;

( Image Source:  X- @arsh_goyal )
Edited By :  समी सिद्दीकी
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India AI impact summit 2026: सोमवार से नई दिल्ली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर वैश्विक चर्चा का केंद्र बनने जा रही है. भारत AI Impact Summit 2026 की मेजबानी कर रहा है और इस मंच के जरिए वह दुनिया के सामने अपने जमीनी AI समाधान पेश करना चाहता है. साथ ही, भारत का टारगेट ग्लोबल साउथ की मजबूत आवाज बनना और तकनीकी नेतृत्व के टॉप कॉलम में अपनी जगह बनाए रखना है.

यह शिखर सम्मेलन पहली बार ग्लोबल साउथ में आयोजित हो रहा है. 16 से 20 फरवरी तक चलने वाले इस सम्मेलन का आधिकारिक उद्घाटन 19 फरवरी को प्रधानमंत्री Narendra Modi करेंगे.

पीएम मोदी कब करेंगे AI Impact Expo का उद्घाटन?

सोमवार शाम 5 बजे प्रधानमंत्री भारत मंडपम में आयोजित India AI Impact Expo 2026 का उद्घाटन करेंगे. प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, यह एक्सपो “AI इन एक्शन” का राष्ट्रीय प्रदर्शन होगा, जहां नीति और व्यवहार, नवाचार और विस्तार, और तकनीक और आम नागरिक के बीच जुड़ाव देखने को मिलेगा.

कैसे हुई थी इस समिट की शुरुआत?

यह सम्मेलन AI गवर्नेंस और इनोवेशन पर चल रही अंतरराष्ट्रीय बातचीत का नया चैप्टर है. इसकी शुरुआत नवंबर 2023 में ब्रिटेन के Bletchley Park में आयोजित AI Safety Summit से हुई थी, जहां 28 देशों ने Bletchley Declaration पर हस्ताक्षर किए थे और AI से जुड़े सुरक्षा जोखिमों पर ध्यान केंद्रित किया गया था.

इसके बाद मई 2024 में सियोल शिखर सम्मेलन में सुरक्षा के साथ-साथ इनोवेशन और इक्लूजन पर चर्चा हुई. फरवरी 2025 में पेरिस AI Action Summit में प्रैक्टिकल इंप्लीमेंटेशन और इकोनोमिक अपॉर्ट्यूनिटीज पर जोर दिया गया, हालांकि सुरक्षा और संरक्षा के मुद्दों को ज्यादा महत्व नहीं दिया गया.

क्या है भारत का विज़न?

भारत का दृष्टिकोण कुछ अलग है. जहां पहले के शिखर सम्मेलन बड़े जोखिमों और रेग्युलर फ्रेमवर्क पर फोकस थे, वहीं नई दिल्ली “People, Planet, and Progress” पर जोर दे रही है. इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी सचिव S Krishnan के मुताबिक, भारत जमीनी समस्याओं के समाधान के लिए AI तकनीक विकसित करने पर फोकस कर रहा है. यह भारत की उस स्थिति को दर्शाता है, जहां वह एक उभरती AI शक्ति होने के साथ-साथ ग्लोबल साउथ की आवाज भी बनना चाहता है.

यह सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब AI की वजह से ग्लोबल इकॉनोमी में बड़े बदलाव की आशंका जताई जा रही है. दुनिया के नेता और कॉरपोरेट प्रमुख AI के भविष्य और इसके प्रभावों पर चर्चा करेंगे.

इस प्रोग्राम में कौन-कौन होगा शामिल?

इस एआई समिट में सरकारों, उद्योग जगत के लीडर्स, शोधकर्ताओं, सिविल सोसायटी संगठनों और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की भागीदारी होगी. 100 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि इसमें शामिल होंगे, जिनमें 20 से ज्यादा राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख भी शामिल हैं. इनमें फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron, ब्राजील के राष्ट्रपति Luiz Inacio Lula da Silva, स्पेन के राष्ट्रपति Pedro Sanchez Perez, स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति Guy Parmelin, नीदरलैंड्स के प्रधानमंत्री Dick Schoof और एस्टोनिया के राष्ट्रपति Alar Karis शामिल हैं.

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India AI Impact Summit 2026 की दस बड़ी बातें
1
100+ देशों की भागीदारी और 20+ राष्ट्राध्यक्ष शामिल।
2
“People, Planet, and Progress” पर भारत का विशेष जोर।
3
500+ सेशन — AI सुरक्षा, गवर्नेंस और डेटा प्रोटेक्शन पर चर्चा।
4
AI का लोकतंत्रीकरण और समावेशी डेटा पर फोकस।
5
स्वास्थ्य, कृषि और शिक्षा में भारतीय AI समाधान प्रदर्शित।
6
40+ वैश्विक टेक कंपनियों के CEO की भागीदारी।
7
Sovereign AI और स्वदेशी फाउंडेशन मॉडल पर जोर।
8
Global North और Global South की संयुक्त वर्किंग ग्रुप।
9
AI से रोजगार और IT सेक्टर पर प्रभाव की चर्चा।
10
साझा कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और AI Commons पर प्रस्ताव।

45 से अधिक देशों के मंत्रीस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी इसमें भाग लेंगे. भारत के औपचारिक निमंत्रण के बाद चीन का एक डेलिगेशन भी इस समिट में शामिल होने जा रहा है. दुनिया और भारत की 40 से ज्यादा बड़ी कंपनियों के CEO भी इसमें हिस्सा लेंगे. इनमें Google के Sundar Pichai, OpenAI के Sam Altman, Anthropic के Dario Amodei, Microsoft के Brad Smith, Adobe के Shantanu Narayen और Qualcomm के Cristiano Amon शामिल हैं. प्रधानमंत्री CEO राउंडटेबल को संबोधित करेंगे और एक डिनर की मेजबानी भी करेंगे.

क्या ये एआई समिट भारतीय इंजीनियरों के लिए भी अहम?

IndiaAI Mission के CEO Abhishek Singh के मुताबिक, सम्मेलन का एक अहम टॉपिक AI का लोकतंत्रीकरण होगा. इसके साथ ही स्वास्थ्य, कृषि और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में भारतीय इंजीनियरों के जरिए विकसित वास्तविक AI समाधानों को भी प्रदर्शित किया जाएगा.

Abhishek Singh ने कहा कि फिलहाल AI कुछ ही देशों द्वारा विकसित किया गया है और अधिकांश देश सिर्फ इसके उपयोगकर्ता हैं. यदि डेटा समावेशी नहीं होगा तो परिणामों में पक्षपात रहेगा. इसलिए डेटासेट, कंप्यूटिंग संसाधन, मॉडल, एल्गोरिद्म और एप्लिकेशन तक समान पहुंच सुनिश्चित करना सम्मेलन का अहम मुद्दा होगा.

सम्मेलन में सात थीम आधारित वर्क ग्रुप होंगे, जिनकी सह-अध्यक्षता ग्लोबल नॉर्थ और ग्लोबल साउथ के प्रतिनिधि करेंगे. ये समूह AI Commons, भरोसेमंद AI टूल्स, साझा कंप्यूटिंग ढांचा और विभिन्न क्षेत्रों में AI के उपयोग के प्रस्ताव पेश करेंगे.

यह सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब AI के कारण रोजगार के भविष्य को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. भारत का आईटी क्षेत्र, जो पिछले दो दशकों से देश की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार रहा है, अब AI के कारण चुनौतियों का सामना कर रहा है. ऊर्जा और पानी जैसे संसाधनों पर AI के बढ़ते दबाव को लेकर भी चिंताएं हैं.

एआई समिट में कितने सेशन होंगे?

अगले पांच दिनों में 500 से अधिक सेशन आयोजित किए जाएंगे, जिनमें AI सुरक्षा, गवर्नेंस, नैतिक उपयोग, डेटा सुरक्षा और भारत की ‘सॉवरेन AI’ नीति पर चर्चा होगी. इसमें रणनीतिक क्षेत्रों के लिए स्वदेशी फाउंडेशन मॉडल विकसित करने पर भी जोर रहेगा.

इस एआई समिट में किन बातों पर होगी चर्चा?

सम्मेलन में यह भी चर्चा होगी कि AI विभिन्न पेशों और उद्योगों को कैसे प्रभावित कर रहा है, बदलते जॉब मार्केट में किन नई स्किल्स की जरूरत होगी, और किसान, छोटे व्यवसाय तथा आम नागरिक AI से कैसे लाभ उठा सकते हैं. संभावना है कि भारत में विकसित कुछ AI भाषा मॉडल भी इस दौरान लॉन्च किए जाएं. बड़े और छोटे भाषा मॉडल बनाने के लिए स्वीकृत 12 आवेदनों में से कुछ का आधिकारिक शुभारंभ हो सकता है.

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