हिमाकत के पहले 100 बार सोचेंगे Pak और China, भारत ने तैयार किया दिन में तारे दिखाने वाला प्लान
भारत अपनी सुरक्षा के लिए जब भी कोई कदम उठाता है तो चीन और पाकिस्तान को मिर्ची लगना तय माना जाता है. इस बार भी कुछ ऐसा ही होगा क्योंकि भारत ने ऐसे दो प्रोजेक्ट लॉन्च किए हैं जो हमारे दोनों ही पारंपरिक दुश्मनों के माथे पर पसीना जरूर आएगा. बात हो रही है मेरठ में ड्रोन के लिए बन रहे डेडिकेटेड मिलिट्री रनवे और असम के मोरान में पूर्वोत्तर की पहली इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) की.
जब भी भारत अपनी सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाता है, तो पड़ोसी देशों की बेचैनी साफ नजर आने लगती है. इस बार भी हालात कुछ ऐसे ही बन रहे हैं. ऑपरेशन सिंदूर के बाद से तो विशेषकर पाकिस्तान हर वक्त यही सोचता रहता होगा कि अब भारत का अगला कदम क्या होगा. 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी के झटके से अभी पाकिस्तान उबरा भी नहीं होगा कि भारत के दो और प्रोजेक्ट की खबर आ गई. लेकिन इस बार संदेश चीन के लिए भी है.
जी हां, भारत ने दो ऐसे सैन्य प्रोजेक्ट शुरू किए हैं, जो सीधे तौर पर उसकी रणनीतिक ताकत को नई धार देते हैं और यही बात चीन और पाकिस्तान को चुभने वाली है.
उत्तर प्रदेश के मेरठ में ड्रोन ऑपरेशन्स के लिए समर्पित मिलिट्री रनवे तैयार किया जा रहा है, जिससे निगरानी और त्वरित कार्रवाई पहले से कहीं ज्यादा सटीक होगी. ऑपरेशन सिंदूर की मार से अब तक कांप रहे पाकिस्तान के लिए यह खबर किसी बुरे सपने से कम नहीं होगी. वहीं दूसरा झटका चीन को लगेगा क्यों असम के मोरान में पूर्वोत्तर की पहली इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) तैयार हो चुकी है, जो संकट की घड़ी में वायुसेना को तुरंत विकल्प देगी. ये साफ संदेश है कि भारत किसी भी मुश्किल के लिए एकदम तैयार है और अगर चीन या पाक कोई हिमाकत करता है तो उसे 100 बार सोचना होगा.
कितने एरिया पर बन रहा है मेरठ में एविएशन बेस?
भारतीय सेना को मेरठ में 900 एकड़ से अधिक इलाके में एक मिलिट्री एविएशन बेस मिलेगा. रक्षा मंत्रालय के अधीन बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) ने हाई एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस (HALE) रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट (RPA) के लिए इस बेस के निर्माण का प्रोसेस शुरू कर दिया है. करीब 406 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना के लिए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंसी सेवाओं के लिए टेंडर्स मांगे गए हैं.
क्या है RPA रनवे की खासियत?
- 2,110 मीटर लंबा और 45 मीटर चौड़ा रनवे
- ICAO CAT-II मुताबिक लाइटिंग सिस्टम
- आधुनिक नेविगेशनल एड्स, ताकि कम विज़िबिलिटी में भी ऑपरेशन मुमकिन हो पाए.
- दो बड़े हैंगर (हर एक मीटर 60x50 मीटर)
- C-295 और C-130 श्रेणी के ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट के संचालन की क्षमता
- इस सुविधा में हर साल भारी विमानों की आवाजाही के साथ लगभग 1,500 RPA ऑपरेशन (औसतन रोज़ 4 ड्रोन सॉर्टी) ऑपरेट किए जा सकेंगे.
ऑपरेशन सिंदूर के बाद क्यों उठाया गया कदम?
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देखा गया कि ड्रोन ऑपरेशन से सिचुएशनल अवेयरनेस बढ़ती है और सैनिकों की जान का खतरा न के बराबर होता है. इसका एक और उदाहरण यूक्रेन भी है. जिसने अपने ड्रोन्स के जरिए रूस की नाक में दम किया हुआ है. हालात यहां तक पहुंच गए थे कि एक ड्रोन तो पुतिन के घर के पास तक पहुंच गया था.
HALE कैटेगरी के RPA (High-Altitude Long-Endurance Remotely Piloted Aircraft) लंबी अवधि तक ऊंचाई पर उड़ान भर सकते हैं और काफी बड़े इलाके की रियल टाइम इंटेलिजेंस मौजूद करा सकते हैं, जो सेंसिटिव हालातों में काफी फायदेमंद हो सकता है.
असम में इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी भारत को क्या फायदा?
दूसरी ओर, पूर्वोत्तर भारत में एक ऐतिहासिक पहल के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विमान असम के मोरान में बने पहले इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) पर उतरा. यह 4.2 किलोमीटर लंबा नेशनल हाईवे का खास तौर पर डिज़ाइन किया गया हिस्सा है, जिसे इमरजेंसी हालात में भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों के टेकऑफ और लैंडिंग के लिए तैयार किया गया है. इस परियोजना की लागत करीब 100 करोड़ रुपये बताई गई है.
प्रधानमंत्री ने चाबुआ एयरफील्ड से भारतीय वायुसेना के C-130J विमान में सवार होकर इस फैसिलिटी पर लैंडिंग की और इसका उद्घाटन किया. इस मौके पर भारतीय वायुसेना ने 40 मिनट का एरियल डिस्प्ले भी किया, जिसमें सुखोई Su-30MKI और राफेल जैसे लड़ाकू विमान शामिल रहे.
ELF की क्या है खासियत?
- 40 टन तक के फाइटर एयरक्राफ्ट संभालने की क्षमता
- 74 टन अधिकतम टेकऑफ वेट वाले ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट की क्षमता
- नागरिक और सैन्य- दोनों इस्तेमाल के लिए डिजाइन किया गया है.
- इमरजेंसी कंडीशन में डिब्रूगढ़ एयरपोर्ट का विकल्प
- मेरठ का ड्रोन बेस और असम का ELF क्या मैसेज देते हैं?
मेरठ में ड्रोन बेस और असम में इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) पाकिस्तान और चीन के लिए साफ संदेश हैं कि अगर वह किसी भी तरह की हिमाकत करते हैं तो उन्हें 100 बार सोचना होगा. क्योंकि पश्चिमी मोर्चे पर लंबी दूरी के ड्रोन निगरानी के लिए तैयार हैं और पूर्वी सेक्टर में अब हाईवे भी फाइटर प्लेन उतारने की व्यवस्था हो चुकी है, जो भारत को किसी भी मुश्किल परिस्थिति के लिए तैयार करती है.
ऑपरेशन सिंदूर के बाद उठाए गए ये कदम दर्शाते हैं कि भारत अपने रक्षा ढांचे को बदलती वैश्विक और क्षेत्रीय चुनौतियों के मुताबिक ढाल रहा है. जहां निगरानी, रैपिड रेसपॉन्स और मल्टी-डोमेन ऑपरेशन भविष्य की सुरक्षा रणनीति का केंद्र बन चुके हैं.





