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चीन-पाकिस्तान अब रोएंगे! भारत को मिलेंगे 114 नए राफेल फाइटर जेट; 3.25 लाख करोड़ की डील को मिली मंजूरी

DAC बैठक में राफेल विमान खरीदने के प्रस्ताव पर मुहर लग गई है. इसके साथ ही तीनों सेनाओं से जुड़े कई बड़े खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है.

चीन-पाकिस्तान अब रोएंगे! भारत को मिलेंगे 114 नए राफेल फाइटर जेट; 3.25 लाख करोड़ की डील को मिली मंजूरी
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( Image Source:  AI GENERATED IMAGE- SORA )
समी सिद्दीकी
Edited By: समी सिद्दीकी

Updated on: 12 Feb 2026 2:50 PM IST

Rafale Deal: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) की बैठक में गुरुवार को तीनों सेनाओं से जुड़े कई बड़े खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई. माना जा रहा है कि इसमें लड़ाकू विमान राफेल को खरीदने का प्रस्ताव भी शामिल है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मीटिंग में 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीदने की प्रस्ताव पर मंजूरी मिल गई है. डीएसी रक्षा मंत्रालय की वह प्रमुख संस्था है, जो बड़े पूंजीगत रक्षा सौदों पर आखिरी फैसला लेती है. जानकारी के मुताबिक, परिषद ने अमेरिका से छह अतिरिक्त पी-8आई समुद्री निगरानी और पनडुब्बी रोधी युद्धक विमान खरीदने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दे दी है.

कितने में होने वाली है ये डील?

ये डील 3.25 लाख करोड़ रुपये की होगी. रक्षा अधिग्रहण परिषद की स्वीकृति के साथ सबसे बड़ा फोकस भारतीय वायुसेना की घटती स्क्वाड्रन ताकत को मजबूत करना है. प्रस्तावित 114 राफेल विमानों के शामिल होने पर वायुसेना को करीब 6 से 7 नए स्क्वाड्रन मिल सकेंगे.

सेना के पास कितने स्क्वाड्रन?

फिलहाल वायुसेना के पास लगभग 30 स्क्वाड्रन हैं, जबकि तय मानकों के मुताबिक 42 स्क्वाड्रन की जरूरत बताई जाती है. परिषद की मंजूरी के बाद अब यह प्रस्ताव आखिरी फैसले के लिए कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) के पास भेजा जाएगा.

समुद्री सुरक्षा पर क्या लिया गया फैसला?

समुद्री सुरक्षा के मोर्चे पर भी अहम फैसला लिया गया है. डीएसी ने भारतीय नौसेना के लिए 6 अतिरिक्त पी-8आई विमान खरीदने को हरी झंडी दी है. नौसेना पहले से 12 पी-8आई विमानों का संचालन कर रही है, नए विमानों के जुड़ने से हिंद महासागर क्षेत्र में निगरानी तंत्र और पनडुब्बी रोधी क्षमता को और मजबूती मिलने की उम्मीद है.

क्या ऑपरेशन सिंदूर में राफेल हुए थे इस्तेमाल?

भारतीय वायुसेना में शामिल राफेल लड़ाकू विमान पहले ही ऑपरेशनल तैनाती में अपनी भूमिका निभा चुके हैं. इनका इस्तेमाल पिछले साल मई में पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किया गया था. इसके अलावा लद्दाख में भी ये विमान अलग-अलग ऑपरेशन्स में तैनात रहे हैं.

जानकारी के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तैनात विमानों ने स्कैल्प एयर-लॉन्च क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल किया था. ये मिसाइलें 250 किलोमीटर से अधिक दूरी तक सटीक निशाना साधने और मजबूत ठिकानों को भेदने में सक्षम मानी जाती हैं. राफेल विमानों की तैनाती अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कई अभियानों में हो चुकी है, जिनमें इराक और लीबिया जैसे देशों के संघर्ष शामिल हैं.

राफेल प्लेटफॉर्म मीटियोर लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों, हैमर स्टैंड-ऑफ हथियारों और स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम से लैस हैं. इसके साथ ही इसमें उन्नत रडार और टार्गेटिंग सिस्टम भी शामिल हैं, जो इसकी युद्ध क्षमता को और मजबूत बनाते हैं.

  • मैक्सिमम टेक ऑफ वेट- 24.5 टन
  • हाइट- 5.30 मीटर
  • एक्सटरनल लोड- 9.5 टन्स
  • फ्यूल- 4.7 टन्स
  • लंबाई- 15.30 मीटटर
  • फेरी रेंज (अधिकतम फ्यूल के साथ तय करने वाली अधिकतम दूरी) - 3700 KM
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