डोकलाम में 2017 में ऐसा क्या हुआ था कि पूर्व सेना प्रमुख नरवाने की किताब का जिक्र कर फंस गए राहुल गांधी?

डोकलाम विवाद 2017 का जिक्र करते हुए राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख की अप्रकाशित किताब का हवाला दे दिया, जिससे संसद में भारी हंगामा मच गया. जानिए आखिर डोकलाम में हुआ क्या था और विवाद क्यों बढ़ा.;

( Image Source:  Sora AI )
Edited By :  नवनीत कुमार
Updated On : 3 Feb 2026 7:40 PM IST

संसद के बजट सत्र के दौरान 2 फरवरी को लोकसभा में ऐसा हंगामा हुआ कि कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी. वजह बना नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का एक बयान, जिसमें उन्होंने पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित किताब Four Stars of Destiny का हवाला दे दिया. राहुल गांधी ने दावा किया कि इस किताब में डोकलाम विवाद से जुड़ा एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा किया गया है. इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए.

राहुल गांधी ने सदन में कहा कि जनरल नरवणे की किताब में लिखा है कि डोकलाम संकट के दौरान चीनी सेना भारतीय पोस्ट के बेहद करीब तक पहुंच गई थी. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस किताब को प्रकाशित नहीं होने दे रही है, क्योंकि उसमें “सच्चाई” सामने आ जाएगी. राहुल गांधी ने कहा, “इस किताब में बताया गया है कि चीन के चार टैंक भारतीय इलाके में घुस आए थे और हमारी पोजीशन से कुछ ही दूरी पर थे.” उनके इस बयान पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कड़ा विरोध दर्ज कराया. स्पीकर ओम बिरला ने भी कहा कि किसी अप्रकाशित किताब या अपुष्ट स्रोत का हवाला देना संसदीय नियमों के खिलाफ है.

आखिर डोकलाम में 2017 में क्या हुआ था?

डोकलाम विवाद 2017 में भारत और चीन के बीच सबसे गंभीर सैन्य गतिरोधों में से एक था. डोकलाम पठार भारत, चीन और भूटान की सीमाओं के मिलन स्थल (ट्राई-जंक्शन) पर स्थित है. यह इलाका भूटान और चीन दोनों के लिए विवादित रहा है. जून 2017 में चीनी सेना (PLA) ने डोकलाम क्षेत्र में सड़क निर्माण शुरू कर दिया. भूटान ने इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए विरोध किया. भारत ने भूटान के समर्थन में अपने सैनिक वहां भेज दिए और चीनी निर्माण कार्य को रोक दिया. इसके बाद दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने खड़ी हो गईं. यह गतिरोध करीब 73 दिनों तक चला. दोनों तरफ से बड़ी संख्या में सैनिक, हथियार और सैन्य उपकरण तैनात कर दिए गए. हालांकि इस दौरान एक भी गोली नहीं चली, लेकिन हालात युद्ध जैसे बने रहे. इसके अलावा लोकसभा में साल 2020 की भी चर्चा हुई थी.

डोकलाम इतना संवेदनशील क्यों है?

डोकलाम पठार रणनीतिक रूप से बेहद अहम है क्योंकि यह सिलिगुड़ी कॉरिडोर के ऊपर स्थित है, जिसे ‘चिकन नेक’ कहा जाता है. यही पतली पट्टी भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ती है. अगर इस इलाके में चीन स्थायी सड़क या सैन्य ढांचा बना लेता, तो किसी भी संभावित संघर्ष में वह भारत के उत्तर-पूर्व को शेष भारत से काट सकता था.

भूटान के लिए भी डोकलाम का महत्व कम नहीं है. 1947 के बाद भारत ने भूटान के साथ सुरक्षा संबंध स्थापित किए. 2007 की भारत-भूटान मित्रता संधि के अनुसार, कोई भी देश अपने क्षेत्र का इस्तेमाल दूसरे देश के राष्ट्रीय हितों के खिलाफ नहीं करेगा और भारत भूटान की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है. इसी वजह से भारत ने डोकलाम में हस्तक्षेप किया.

भारत ने सख्त रुख क्यों अपनाया?

भारत का मानना था कि यदि चीन को सड़क निर्माण करने दिया जाता, तो वह धीरे-धीरे वहां स्थायी सैन्य मौजूदगी बना लेता. दक्षिण चीन सागर में चीन की रणनीति से सबक लेते हुए भारत ने “स्टेटस क्वो” बनाए रखने का फैसला किया. जून 2017 में भारतीय सेना ने मौके पर पहुंचकर चीनी निर्माण दल को रोक दिया. यह सिर्फ सड़क का मामला नहीं था, बल्कि क्षेत्रीय संतुलन और भारत-भूटान रिश्तों की परीक्षा भी थी. अंततः अगस्त 2017 में दोनों पक्षों ने कूटनीतिक बातचीत के बाद पीछे हटने का फैसला किया और तनाव खत्म हुआ.

राहुल गांधी ने नरवणे की किताब को लेकर क्या कहा?

राहुल गांधी ने जनरल नरवणे की अप्रकाशित किताब Four Stars of Destiny और उससे जुड़े एक मीडिया लेख का हवाला दिया. उन्होंने दावा किया कि उसमें लिखा है कि डोकलाम संकट के दौरान चीनी सेना के चार टैंक भारतीय क्षेत्र में घुस आए थे और भारतीय पोजीशन से कुछ सौ मीटर की दूरी पर पहुंच गए थे. राहुल गांधी ने यह भी कहा कि सरकार इस किताब को छपने नहीं दे रही है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “इससे पता चलता है कि असली देशभक्त कौन है और कौन नहीं.”

संसद में क्यों मचा बवाल?

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी से पूछा कि क्या यह किताब प्रकाशित हो चुकी है. जब राहुल गांधी ने कहा कि किताब अभी छपी नहीं है, तो सरकार ने इसे नियमों का उल्लंघन बताया. गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि जब किताब प्रकाशित ही नहीं हुई है, तो उस पर बहस का कोई आधार नहीं बनता. स्पीकर ओम बिरला ने राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा तक सीमित रहने को कहा और अप्रकाशित स्रोतों का हवाला देने से रोका. हंगामा बढ़ने पर लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 3 बजे तक स्थगित करनी पड़ी.

राजनीतिक लड़ाई में बदल गया डोकलाम का मुद्दा

डोकलाम, जो कभी भारत-चीन-भूटान के बीच एक रणनीतिक टकराव का प्रतीक था, अब संसद में राजनीतिक टकराव का विषय बन गया है. राहुल गांधी इसे सरकार की कथित चूक के रूप में पेश कर रहे हैं, जबकि सरकार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा संवेदनशील मामला बताकर विरोध कर रही है. इस तरह 2017 का डोकलाम गतिरोध, जो बिना युद्ध के खत्म हुआ था, अब 2026 में संसद के भीतर एक नए विवाद का कारण बन गया है- जहां लड़ाई सीमा पर नहीं, बल्कि शब्दों और नियमों पर लड़ी जा रही है.

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