नंबर चमके, जेब फीकी! क्या बजट 2026 सिर्फ 'स्लाइड शो' बनकर रह गया? सोशल मीडिया पर बहस का अंत नहीं
मोदी सरकार के बजट 2026 में विजन है, लेकिन यूजर्स का कहना है कि जनता को विजन से ज्यादा वर्किंग मॉडल चाहिए. जब तक घोषणाएं जमीन पर उतरती नहीं दिखेंगी, तब तक सवाल उठते रहेंगे. क्या बजट सिर्फ स्लाइड शो था, या वाकई बदलाव की स्क्रिप्ट?;
देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने Budget 2026, एक फरवरी को पेश किया था, लेकिन इसको लेकर सोशल मीडिया पर तीखी बहस आज भी चरम पर है. X से लेकर Instagram तक यूजर्स पूछ रहे हैं, क्या ये बजट सिर्फ PowerPoint स्लाइड्स और बड़ी घोषणाओं तक सीमित था? इसको लेकर यूजर्स के सवालों पर ग्रोक ने आइना दिखाने वाला जवाब दिया है. इसके बावजूद लोगों को, क्यों लग रहा है कि बजट 2026 हकीकत और हेडलाइन के बीच खाई बढ़ गई है.
दरअसल, बजट 2026 पेश होते ही सरकार ने इसे विकास, रोजगार और आत्मनिर्भर और विकसित भारत की मजबूत नींव बताया. इसके बाद संसद से ज्यादा त्रज़्यादा गर्मी सोशल मीडिया पर दिखी. जो दो दिन बाद भी बरकरार है. बजट को लेकर X पर ट्रेंड करने लगा, PowerPoint Economy, Instagram पर मीम्स की बाढ़ आ गई और YouTube पर सवालों से भरे explainers चल पड़े. आम यूजर का सीधा सवाल है, क्या बजट सिर्फ स्लाइड शो था, जिसमें रंगीन ग्राफ तो हैं, लेकिन जमीनी असर गायब?
बजट vsजनता का मूड
बजट भाषण में बड़े-बड़े आंकड़े, सेक्टर वाइज फोकस और भविष्य के सपनों की तस्वीर दिखाई गई, लेकिन मिडिल क्लास, युवा और किसान तबकों का रिएक्शन मिला-जुला रहा. किसी ने इसे Visionary कहा, तो किसी ने तंज कसा, “हर साल नई स्लाइड, वही पुरानी कहानी.” सोशल मीडिया यूजर्स का मानना है कि घोषणाओं की चमक ज्यादा है, क्रियान्वयन की रोडमैप धुंधली है.
पोस्टर चमके, पर जमीन पर नतीजा शून्य
एक्स यूजर और एडवोकेट Adv. Vijay Singh ने लिखा, BOOM, ₹36.65 लाख करोड़… गायब! स्वच्छ भारत, स्मार्ट सिटी, PM आवास के पोस्टर चमके, विज्ञापन चले, जमीन पर नतीजा शून्य. इसी तरह स्वच्छ भारत 35,800 करोड़ रुपये में से 6% खर्च, स्मार्ट सिटी के नाम पर 10 लाख करोड़ में से 0.01% खर्च, PMAY 7,900 करोड़ रुपये में से 45% फर्जी लाभार्थी निकले. साल 2014-23 में 10,000 करोड़ रुपये सिर्फ विज्ञापनों पर खर्च हुए. शासन नहीं, शो-शासन. विकास नहीं, विज्ञापन. टैक्सपेयर्स का था पैसा - गया किसकी जेब में?
ग्रोक ने एडवोकेट के दावों को किया खारिज, जवाब में क्या कहा?
एडवोकेट विजय सिंह के दावों पर Grok ने सटीक जवाब दिया. ग्रोक का कहना है कि एडवोकेट के दावों की मैंने जांच की. मोदी सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन का कुल बजट 1.4 लाख करोड़ से अधिक है. PIB डेटा के अनुसार इसमें अधिकांश खर्च हुआ. स्मार्ट सिटी का बजट 48,000 करोड़, 99% उपयोग (PIB) हुआ. PMAY में कुछ फर्जी लाभार्थी की रिपोर्ट्स हैं, लेकिन कुल बजट लाखों करोड़ में है, न कि 7,900 करोड़. विज्ञापन पर 2014-23 में 10,000 करोड़ खर्च सही लगता है, लेकिन 36.65 लाख करोड़ गायब का दावा अतिरंजित है. यह आधिकारिक स्रोतों से मेल नहीं खाता.
बजट सिर्फ स्लाइड शो कैसे?
यूजर्स की आलोचना के पीछे कुछ कॉमन पॉइंट्स उभरकर आए हैं. जैसे घोषणाएं ज्यादा, टाइमलाइन कम, कई योजनाओं में कब, कैसे और कितने समय में पूरा होगा, इसका साफ जवाब नहीं है. पुरानी स्कीम, नया पैकेज पहले से चल रही योजनाओं को नए नाम और नई स्लाइड्स में पेश करने के आरोप भी यूजर्स लगा हरे हैं. यूजर्स यह कहते नजर आ रहे हैं कि महंगाई, नौकरी और MSME की दिक्कतें ग्राफ में तो दिखीं, समाधान जमीन पर कम दिखाई दे रहा है. ग्राउंड रियलिटी हकीकत से काफी दूर है.
मिडिल क्लास और युवाओं की नाराजगी
मिडिल क्लास को टैक्स में बड़ी राहत पिछले साल मिली थी. अभी तक युवाओं के लिए ठोस रोजगार प्लान नहीं आया. इस बार भी लगभग वैसा ही है. सोशल मीडिया पर ट्रेंड चला, “Skill bolo, job kahan hai?” LinkedIn पर प्रोफेशनल्स ने लिखा कि AI और सेमीकंडक्टर की बातें अच्छी हैं, लेकिन फ्रेशर्स के लिए एंट्री गेट अभी भी बंद हैं. यही वजह है कि बजट 2026 को लेकर सरकार पर भरोसे से ज्यादा तंज देखने को मिले.