ओवैसी को हल्के में लेने वाले सावधान! हैदराबाद के बाद BMC तक AIMIM का उभार, शरद-राज और SP भी हुई बौनी, जानें क्यों बढ़ी ताकत

हैदराबाद से निकलकर देश की सबसे बड़ी नगर निगम बीएमसी तक AIMIM ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है. असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी अब सिर्फ मुस्लिम राजनीति तक सीमित नहीं रही, बल्कि शहरी निकायों में निर्णायक शक्ति बनते जा रही है. शरद पवार, राज ठाकरे, समाजवादी पार्टी और अन्य क्षेत्रीय दलों के लिए यह क्यों बन रही है बड़ी चुनौती. जानें सबकुछ.;

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जिस असदुद्दीन ओवैसी को लंबे समय तक हैदराबाद तक सीमित नेता कहकर हल्के में बड़े-बड़े नेता लेते रहे, एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख अब शहरी राजनीति की नई धुरी बनते नजर आ रहे हैं. बीएमसी सहित 20 निगमों के चुनाव तो यही संकेत देते हैं. तेलंगाना की GHMC से लेकर महाराष्ट्र की बीएमसी, यूपी-बिहार के नगर निकाय और देश के कई महानगरों में AIMIM का उभार यह संकेत दे रहा है कि ओवैसी की राजनीति अब सिर्फ पहचान की नहीं, पावर की राजनीति में तब्दील हो चुकी है.

यही वजह है कि आज शरद पवार, राज ठाकरे या अन्य सेक्युलर-क्षेत्रीय दल खुलकर ओवैसी पर आंखें नहीं दिखा पा रहे हैं, क्योंकि उनका वोट बैंक अब 'किंगमेकर' बनने के करीब है.

हैदराबाद से बाहर निकल असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने बिहार महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद अब बीएमसी सहित प्रदेश के 13 नगर निगमों में मजतबू उपस्थित दर्ज कर सभी सियासी क्षत्रपों को चौंका दिया है. खास बात यह है कि ओवैसी की पार्टी ने प्रदेश के 29 में पार्टी ने 13 नगर निगमों के 125 वॉर्डों में जीत दर्ज कर पिछले नगर निगम चुनावों में जीते गए 56 वॉर्डों की तुलना में कहीं अच्छा प्रदर्शन किया है. यह बाला साहब ठाकरे के राज्य में हैदराबाद आधारित पार्टी का अब तक का सबसे दमदार जीत है. कई नगर निकायों में तो एआईएमआईएम ने सपा, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना जैसी स्थापित पार्टियों को पीछे छोड़ दिया है. ओवैसी की पार्टी ने 15 जनवरी को हुए चुनावों में 29 में से 24 नगर निगमों में अपने उम्मीदवार उतारे थे.

AIMIM को कहां पर कितनी मिली सीटें

एआईएमआईएम का सबसे बेहतर प्रदर्शन छत्रपति संभाजीनगर में रहा, जहां उसने 33 सीटें जीतकर नगर निगम में खुद को प्रमुख ताकत के रूप में स्थापित कर लिया है. मालेगांव में 21 सीटें, नांदेड़ में 14 सीटें, अमरावती में 12 सीटें, धुले में 10 और सोलापुर में आठ सीटों पर जीत हासिल की है. बृहन्नमुंबई नगर निगम यानी बीएमसी में ओवैसी की पार्टी की यह अब तक की सबसे शानदार जीत है. मुंबई और मुंब्रा में उसे पांच-पांच सीटें मिलीं हैं. इसके अतिरिक्त, एआईएमआईएम ने सोलापुर में आठ, नागपुर में सात, अहमदनगर और जालना में दो-दो, परभणी और चंद्रपुर में एक-एक वॉर्ड जीते हैं..

बता दें कि महाराष्ट्र में एआईएमआईएम ने पहली बार 2012 के नांदेड़ नगर निगम चुनावों में चुनावी सफलता दर्ज की थी. उस समय एआईएमआईएम ने 81 सदस्यीय नगर निगम में 11 सीटें जीतकर तेलंगाना के बाहर किसी राज्य में अपनी पहली जीत दर्ज की थी.

बीएमसी सहित महाराष्ट्र की राजनीति में एआईएमआईएम का उभार समाजवादी पार्टी के कमजो प्रदर्शन के साथ भी जुड़ा है, जो कई शहरी केंद्रों में उसी मुस्लिम वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रही थी. चौंकाने वाली बात यह है कि ओवैसी की पार्टी ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना और एनसीपी (एसपी) दोनों से अधिक सीटें जीत ली हैं.

कुछ निगमों में 'किंगमेकर'

महाराष्ट्र के सियासी जानकारों की राय में एआईएमआईएम के प्रदर्शन दर्शाते हैं कि एआईएमआईएम ने मराठवाड़ा और पश्चिमी महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में अपना वोट आधार मजबूत किया है. मुंबई और ठाणे की राजनीति में घुसपैठ करने में सफलता हासिल की है. अल्पसंख्यक बहुल इलाको में कांग्रेस और एनसीपी शरद पवार को पीछे छोड़कर राजनीतिक समीकरणों को बदलकर रख दिया है. 29 में से कई नगर निगमों में 'किंगमेकर' बनकर पार्टी उभरी है. इन निगमों में ना महायुति और ना ही विपक्षी महाविकास आघाड़ी को बहुमत मिला है.

सियासी बदलाव का प्रतीक

सियासी जानकार महाराष्ट्र में एआईएमआईएम की इस जीत को अहम मान रहे हैं. राजनीतिक पंडित यह भी कह रहे हैं कि अगर असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली एआईएमआईएम बिहार के बाद महाराष्ट्र में भी अच्छा प्रदर्शन कर रही है, तो यह भारतीय राजनीति में अहम बदलाव का प्रतीक है.

दरअसल, असदुद्दीन ओवैसी लगातार उन मुद्दों पर बोलते हैं, जिन पर कुछ तथाकथित धर्मनिरपेक्ष पार्टियां चुप रहती हैं. संसद में वह दमदार और प्रभावी सांसद माने जाते हैं, जिनकी बोलने की शैली तार्किक है और युवाओं के बीच उनकी अच्छी पकड़ है.

एआईएमआईएम के प्रवक्ता वारिस पठान ने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा, ''वॉर्ड के चुनाव स्थानीय मुद्दों पर लड़े जाते हैं. जनता को लग रहा था कि इतने सालों से वह जिन्हें वोट देकर जिता रहे थे, वह उनके लिए काम ही नहीं कर रहे. ऐसे में उन्होने एआईएमआईएम में इस बार भरोसा जताया है.'' वहीं, एआईएमआईएम के महाराष्ट्र अध्यक्ष इम्तियाज जलील ने टीओआई से कहा​ कि कई वॉर्डों में शिवसेना के दोनों गुट एआईएमआईएम से पीछे रहे, जिससे नगर निगम में पार्टी मुख्य विपक्ष के रूप में स्थापित हुई.

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