10-15 करोड़ मौतें, Radioactive लाशें, न सूरज-न बारिश; Nuclear War का ऐसा होगा अंजाम? VIDEO

दुनिया पर मंडरा रहे परमाणु हमले के खतरे के बीच Acharya Prashant का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वो संभावित Nuclear War के खतरों को बता रहे हैं. इसमें वो कह रहे हैं कि आधुनिक परमाणु हथियार करोड़ों लोगों को तुरंत खत्म कर देंगे. इसकी भयावहता रौंगटे खड़े करने वाली है.

न्यूक्लियर वार से मचेगी भीषण तबाही(Image Source:  Sora_ AI )
By :  अच्‍युत कुमार द्विवेदी
Updated On : 30 March 2026 6:45 PM IST

दुनिया में इस समय न्यूक्लियर वार का खतरा मंडरा रहा है. एक तरफ ईरान और इजरायल-अमेरिका के खिलाफ जंग जारी है तो दूसरी तरफ रूस और यूक्रेन के बीच भी सालों से युद्ध हो रहा है. वहीं, भारत और पाकिस्तान के बीच भी परमाणु युद्ध होने की आशंका बढ़ जाती है, जिसका अंजाम काफी भयावह होगा.  ऐसे में मशहूर लेखक और आध्यात्मिक गुरु आचार्य प्रशांत का एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने न्यूक्लियर वार के खतरे को लेकर लोगों को चेतावनी दी है. आचार्य प्रशांत ने कहा कि परमाणु बम गिरने से लोग भाप बन जाएंगे. रेडियोएक्टिव तरंगों से लोगों की स्किन अपने आप गिरने लगेंगी. उन्होंने बताया कि 10 से 15 करोड़ रोग तुरंत भाप बन जाएंगे.

आचार्य प्रशांत ने कहा, "न्यूक्लियर स्ट्राइक से 10 से 15 करोड़ लोग मरेंगे नहीं, ये तुरंत भाप बन जाएंगे. बम अगर मुंबई पर गिरता है तो मुंबई तो तबाह हो ही जाएगी, लेकिन उसके आगे नवी मुंबई से लेकर जो पुणे तक, वहां तक लोगों की खाल गिरने लगेगी. पहले भयंकर फफोले पड़ेंगे और फिर खाल गिरने लगेगी."

आचार्य प्रशांत ने बताया, "न्यूक्लियर वेपन जब विस्फोट करता है तो उसका तापमान सूरज की सतह पर जितना तापमान होता है, उससे ज्यादा होता है. ऐसा लगेगा कि जैसे सूरज आपके सर पर आ गया हो. इससे 10 से 15 करोड़ लोग तुरंत मरेंगे. बाकी रेडियोएक्टिव लाशें बन जाएंगी. किसी भी तरह अगर जी भी गए तो लगभग 30-40 करोड़ लोग... तो वे कहेंगे कि हम मरें क्यों नहीं."

“हिरोशिमा-नागासाकी से हजार गुना ज्यादा ताकतवर हैं आधुनिक बम”

आध्यात्मिक गुरु ने कहा, " आज का परमाणु बम हिरोशिमा और नागासाकी से हजार गुना ज्यादा ताकतवर है. परमाणु बम का इस्तेमाल करने वाला देश यह सोचकर बम गिराता है कि दुश्मन पूरी तरह खत्म हो जाए, क्योंकि अगर वह जिंदा बचा तो वह उसे छोड़ेगा नहीं. इस दौरान धुआं इतना निकलता है कि भारत और पाकिस्तान के ऊपर एक बहुत लंबी राख छा जाएगी. वो राख सालों तक चलेगी. सूरज जैसी कोई चीज नहीं बचेगी. जाड़ा हो जाएगा. आपको सूरज दिखाई ही नहीं देगा."

"जो बच जाएंगे, वो सोचेंगे कि हम बच क्यों गए"

आचार्य प्रशांत ने कहा, "बारिश की तो कोई बात ही नहीं. मानसून फिर कभी नहीं आएगा. जो बच जाएंगे, वो सोचेंगे कि हम बच क्यों गए. अन्न का एक दाना तक नहीं होगा. रेडियोएक्टिव राख से नदी का पानी जहर बन जाएगा."

“युद्ध को मनोरंजन समझना खतरनाक”

वीडियो में आचार्य प्रशांत ने कहा, "जो लोग धर्मयुद्ध की जगह अहम युद्ध करना चाहते हैं, उन्हें यह बात समझ नहीं आ रही है. मैं टीवी पर देख रहा हूं कि वे खिलौने मिसाइल लेकर आ रहे हैं और उसे लड़ा रहे हैं. टीवी वाले भी दिखा रहे हैं कि दो मिसाइलों की टक्कर हो रही है. तुमने वीडियो गेम और मनोरंजन समझ रखा है क्या... क्या है ये... न्यूक्लियर वेस्टलैंड बन जाएंगे भारत और पाकिस्तान हमेशा के लिए... फिर यहां कुछ नहीं पैदा हो सकता. जहां का रेडिएशन पूरी दुनिया को बर्बाद कर देगा. " 

Full View

आचार्य प्रशांत ने आखिर में कहा, " आप में से बहुत लोगों में मन में सवाल आ रहे होंगे कि क्या करें... हम लड़ाई छोड़ दें. उनको हत्याकांड करने दें... नहीं, यह तो मैं नहीं कह रहा. हम बिल्कुल रोकेंगे. रोकना चाहिए. रोकना ही धर्म है. मैं बात उनके संदर्भ में कह रहा हूं जो मीडिया में आकर चिल्लाते हुए दिखाई दे रहे हैं कि उद्घोष, ललकार, यलगार कि काटो, फाड़ दो.. ऐसा मत करो. You Have Defeat the monster without becoming a monster.

दुनिया में क्यों मंडरा रहा न्यूक्लियर वार का खतरा?

  • ईरान-इजराइल-अमेरिका संघर्ष: मार्च 2026 में तनाव चरम पर है. इजराइल और अमेरिका ने ईरान के अराक, नतांज और फोर्डो जैसे परमाणु ठिकानों पर हमले किए हैं. इसके जवाब में ईरान ने अपनी परमाणु नीति की समीक्षा करने और परमाणु अप्रसार संधि (NPT) से बाहर निकलने की चेतावनी दी है, जिससे परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की आशंका बढ़ गई है.
  • हथियार नियंत्रण संधियों का अंत: अमेरिका और रूस के बीच परमाणु हथियारों को सीमित करने वाली अंतिम प्रमुख संधि, 'New START', फरवरी 2026 में समाप्त हो गई है. इसके बिना दुनिया के दो सबसे बड़े परमाणु शक्ति संपन्न देशों के पास हथियारों की होड़ रोकने के लिए कोई कानूनी बंधन नहीं बचा है.
  • रूस-यूक्रेन युद्ध का विस्तार: यूक्रेन द्वारा रूस के भीतर तेल रिफाइनरियों और सैन्य ठिकानों पर बड़े ड्रोन हमलों के बाद रूस ने 'अपूरणीय परिणामों' की चेतावनी दी है. विशेषज्ञों का मानना है कि नाटो देशों और रूस के बीच सीधा टकराव परमाणु युद्ध की शुरुआत कर सकता है.
  • तकनीकी जोखिम (AI और हाइपरसोनिक मिसाइलें): 2026 में परमाणु कमांड सिस्टम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बढ़ता उपयोग और हाइपरसोनिक मिसाइलों का विकास जोखिम बढ़ा रहा है. इन तकनीकों के कारण गलतफहमी या तकनीकी खराबी से परमाणु हमला होने का डर रहता है.
  • दक्षिण एशिया में अस्थिरता: अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों (2026) के अनुसार, भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पार आतंकवाद और सैन्य तनाव के कारण परमाणु संघर्ष का खतरा बना हुआ है, क्योंकि दोनों पक्ष परमाणु ब्लैकमेलिंग के खिलाफ सख्त रुख अपना रहे हैं.
  • परमाणु अप्रसार व्यवस्था का ढहना: दक्षिण कोरिया और जापान जैसे देश, जो पारंपरिक रूप से अमेरिकी सुरक्षा छतरी के नीचे थे, अब चीन और उत्तर कोरिया के बढ़ते खतरे के कारण अपने स्वयं के परमाणु हथियार विकसित करने पर विचार कर रहे हैं.

कौन हैं आचार्य प्रशांत?

आचार्य प्रशांत एक प्रसिद्ध भारतीय आध्यात्मिक गुरु, लेखक और अद्वैत वेदांत के शिक्षक हैं. उन्हें उनकी तार्किक और वैज्ञानिक सोच के लिए जाना जाता है, जिसके माध्यम से वे प्राचीन आध्यात्मिक ग्रंथों (जैसे भगवद गीता और उपनिषद) की व्याख्या आधुनिक संदर्भ में करते हैं. उनका जन्म 7 मार्च 1978 को हुआ. उनका मूल नाम प्रशांत त्रिपाठी है. उन्होंने IIT दिल्ली से इंजीनियरिंग और IIM अहमदाबाद से मैनेजमेंट (MBA) की पढ़ाई की है.

आचार्य प्रशांत ने यूपीएससी (UPSC) की परीक्षा पास की थी. कुछ समय तक उन्होंने भारतीय सिविल सेवा में भी कार्य किया, लेकिन बाद में अध्यात्म की ओर मुड़ने के लिए नौकरी छोड़ दी. वे प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन (PrashantAdvait Foundation) के संस्थापक हैं. उनके यूट्यूब (YouTube) चैनल पर 6 करोड़ (60 मिलियन) से अधिक सब्सक्राइबर्स हैं, जहां वे युवाओं की समस्याओं और आध्यात्मिक विषयों पर चर्चा करते हैं.

आचार्य प्रशांत की शिक्षाओं का मुख्य विषय क्या है?

  • अद्वैत वेदांत: आचार्य प्रशांत अद्वैत वेदांत के आधुनिक ध्वजवाहक माने जाते हैं. वे अंधविश्वास और कर्मकांडों के बजाय आत्म-बोध (Self-awareness) और विवेक पर जोर देते हैं.
  • मानसिक स्वास्थ्य और स्पष्टता: वे अवसाद, भय, रिश्तों और करियर जैसी आधुनिक समस्याओं का समाधान वेदांतिक दृष्टिकोण से प्रदान करते हैं.
  • पर्यावरण और पशु अधिकार: वे एक सक्रिय शाकाहार (Veganism) समर्थक और पशु अधिकार कार्यकर्ता हैं. वे जलवायु परिवर्तन और उपभोगवाद (Consumerism) के खिलाफ भी लगातार आवाज उठाते हैं.
  • लेखन: आचार्य प्रशांत ने 100 से अधिक पुस्तकें लिखी हैं जो कर्म, आनंद, प्रेम और आध्यात्मिकता जैसे विषयों पर आधारित हैं.

 

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