बैंकॉक से बंगाल तक: Abhishek Banerjee और Rujira Banerjee की लव स्टोरी! विवादों का वो सफर जिसने सियासत में मचा दिया तूफान
पश्चिम बंगाल की राजनीति में अभिषेक बनर्जी और उनकी पत्नी रुजिरा बनर्जी की कहानी सिर्फ एक लव स्टोरी नहीं, बल्कि विवादों और सियासी आरोप-प्रत्यारोप से भरा सफर है. बैंकॉक में शुरू हुआ रिश्ता और फिर कैसे बंगाल की सियासत में भूचाल ला दिया.
पश्चिम बंगाल की सियासत जैसे-जैसे चुनावी मोड में आ रही है, वैसे-वैसे बयानबाज़ी का पारा भी चढ़ता जा रहा है. इस बार मुकाबला सिर्फ सीटों का नहीं, बल्कि सियासी वर्चस्व का भी है. एक तरफ Mamata Banerjee की पकड़ मजबूत दिखती है, तो दूसरी ओर विपक्ष हर मोर्चे पर हमला बोलने में जुटा है. इसी बीच कांग्रेस द्वारा 284 सीटों पर उम्मीदवारों के ऐलान के बाद सियासी हलचल और तेज हो गई. लेकिन असली बवाल तब मचा जब टीएमसी के फायरब्रांड नेता Abhishek Banerjee ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए Adhir Ranjan Chowdhury को सीधे तौर पर भाजपा का 'एजेंट' बता दिया.
अब ये बयान सिर्फ एक आरोप नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीति में नई जंग की शुरुआत जैसा माना जा रहा है. इसी गरमाते माहौल के बीच हम आपको बताएंगे अभिषेक बनर्जी की राजनीति के साथ-साथ उनकी पर्सनल लाइफ, उनकी पत्नी से जुड़ा ED केस, कोर्ट से मिली राहत और उनकी पूरी कहानी- जो इस चुनावी संग्राम में और भी दिलचस्प मोड़ ला सकती है आइए जानते हैं...
तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी की पत्नी होने के कारण पहले ही चर्चा में रहने वाली रुजिरा अब ED जांच, हाईकोर्ट के निर्देश और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुके कानूनी विवादों के चलते राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन चुकी हैं. नौकरी घोटाले से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा लंबी पूछताछ, कंपनियों से जुड़े आरोप और मीडिया रिपोर्टिंग पर कोर्ट की सख्ती. इन सबने इस केस को हाई-प्रोफाइल बना दिया है. लेकिन सवाल यही है. आखिर रुजिरा बनर्जी हैं कौन और क्यों बार-बार जांच एजेंसियों के रडार पर आती हैं?
कौन हैं रुजिरा बनर्जी?
रुजिरा बनर्जी का जन्म बैंकॉक में हुआ और उनका मूल नाम रुजिरा नरूला था. वे थाई नागरिक हैं और उनके पास ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (OCI) कार्ड है. पढ़ाई के लिए वे दिल्ली आईं, जहां उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ प्लानिंग एंड मैनेजमेंट (IIPM) से शिक्षा हासिल की. 2012 में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी से शादी की. यह रिश्ता एक तरह का 'अरेंज्ड-लव मैरिज' माना जाता है. दोनों की मुलाकात बैंकॉक में हुई थी और अब उनके दो बच्चे हैं.
रुजिरा बनर्जी का घोटाले से क्या है कनेक्शन?
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने नौकरी के बदले नकदी घोटाले की जांच के तहत रुजिरा से 8 घंटे से ज्यादा पूछताछ की. एजेंसी के मुताबिक, 'हम नौकरी घोटाले संबंधी अपने निष्कर्षों के आधार पर रुजिरा से पूछताछ कर रहे हैं.' जांच एजेंसियों का दावा है कि वे उन कंपनियों में अहम पदों पर थीं, जिनका संबंध कथित घोटाले से जोड़ा जा रहा है. अधिकारियों के अनुसार, 'हम उनसे कथित घोटाले में शामिल दो कंपनियों के निदेशकों की विशिष्ट भूमिकाओं को लेकर पूछताछ कर रहे हैं.'
क्या छापेमारी में सामने आए चौंकाने वाले सबूत?
ईडी ने पश्चिम बंगाल के नादिया जिले में कई ठिकानों पर छापेमारी की. जांच में सामने आया कि घोटाले से कमाया गया पैसा चावल मिलों में निवेश किया गया. 'नौकरी घोटाले से अर्जित अच्छे-खासे धन का कई चावल मिल में निवेश किया गया. हमारे पास इसे साबित करने के लिए दस्तावेज हैं.'
कोर्ट ने जांच एजेंसियों और मीडिया को क्या निर्देश दिए?
कलकत्ता हाईकोर्ट ने रुजिरा बनर्जी की याचिका पर अहम दिशा-निर्देश जारी किए. कोर्ट ने साफ कहा कि जांच एजेंसियां चार्जशीट दाखिल होने से पहले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ जांच से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक नहीं करेंगी. कोर्ट ने यह भी कहा कि मीडिया को खबर प्रकाशित करते समय तथ्यों की पुष्टि करनी होगी और बिना पुख्ता सबूत के किसी की छवि खराब नहीं करनी चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ? ED को क्यों पीछे हटना पड़ा?
ED ने हाईकोर्ट के निर्देशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन शीर्ष अदालत ने इसे सुनने से इनकार कर दिया. जस्टिस हृषिकेश रॉय और प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने संकेत दिया कि यह अंतरिम आदेश है, इसलिए हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा.
इसके बाद ED ने अपनी याचिका वापस ले ली.
रुजिरा बनर्जी किन-किन विवादों में घिरी रही हैं?
- कोयला तस्करी केस में CBI और ED द्वारा पूछताछ
- 2019 में कोलकाता एयरपोर्ट पर सोना ले जाने का मामला
- नागरिकता और दस्तावेजों में कथित गड़बड़ी
- 2023 में लुकआउट सर्कुलर के चलते विदेश यात्रा रोकी गई
इन सभी मामलों ने उनकी छवि को लगातार विवादों में बनाए रखा.
इस पूरे मामले का राजनीतिक मतलब क्या है?
रुजिरा बनर्जी, पश्चिम बंगाल की राजनीति के सबसे प्रभावशाली परिवारों में से एक का हिस्सा हैं. ऐसे में उनके खिलाफ जांच को लेकर सियासी आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं. जहां एक तरफ विपक्ष इसे भ्रष्टाचार से जोड़ रहा है, वहीं टीएमसी इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार देती रही है.




