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यूरोप में 40 डिग्री तापमान ही बन गया जानलेवा, आखिर क्यों गर्मी नहीं झेल पा रहे लोग, 1300 से ज्यादा मौतें, भारत से कितनी अलग स्थिति?

भारत के साथ-साथ अब यूरोप में भी भयंकर गर्मी देखने को मिल रही है. जहां भारत में 40 डिग्री तापमान नॉर्मल लग रहा है तो वहीं यूरोप के लोग 40 डिग्री झेल नहीं पा रहे हैं. अब तक कई लोगों की मौत भी हो चुकी है.

Europe heatwave
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Europe heatwave

( Image Source:  X/ @MadhuMazire, @manavspeakfacts )

यूरोप इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है. हालांकि भारत के मुकाबले गर्मी अभी भी वहां कम है. स्पेन, जर्मनी, ऑस्ट्रिया, नीदरलैंड और स्विट्जरलैंड समेत कई देशों में जून महीने के तापमान ने पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। लगातार बढ़ते तापमान, लू और गर्म रातों ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है. हालात ऐसे हैं कि लोगों को राहत पाने के लिए नदियों और समुद्र के बीच का रुख करना पड़ रहा है, जहां डूबने जैसी घटनाएं भी सामने आ रही हैं. जिसके चलते अभी तक काफी लोगों की मौत भी हो गई है.

भारत में ज्यादातर राज्यों का तापमान फिलहाल 40 डिग्री या उससे ज्यादा है फिर भी यहां स्थिति उतनी खराब नहीं है जितनी यूरोप में देखने को मिल रही है, जिसके बाद सवाल उठ रहा है कि आखिर यूरोप के लोग 40 डिग्री का भी तापमान क्यों नहीं सहन कर पा रहे हैं इसके पीछे क्या कारण है?

क्या बोला WHO?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, 21 जून के बाद से यूरोप में अत्यधिक गर्मी के कारण 1,300 से अधिक अतिरिक्त मौतें दर्ज की गई हैं. WHO के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यूरोप में बढ़ते तापमान को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा "इस समय 15 करोड़ लोग भीषण गर्मी झेल रहे हैं, सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है, स्कूल बंद हैं, बिजली व्यवस्था चरमरा रही है."

यूरोप में 40°C भारत से ज्यादा खतरनाक क्यों?

भारत में कई राज्यों में हर साल 45 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक तापमान दर्ज होता है, लेकिन यूरोप में 40 डिग्री तापमान भी लोगों के लिए गंभीर संकट बन जाता है. इसकी वजह सिर्फ तापमान नहीं, बल्कि वहां की जीवनशैली, घरों की बनावट और मौसम के प्रति तैयारियों की कमी भी है.

यूरोप की अधिकांश इमारतें ठंड से बचाने के लिए बनाई गई हैं. इनमें मोटी दीवारें, छोटी खिड़कियां और गर्मी को भीतर रोकने वाली निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है. सर्दियों में यही डिज़ाइन फायदेमंद होता है, लेकिन गर्मियों में यही घर भीतर की गर्मी को बाहर नहीं निकलने देते, जिससे कमरे लंबे समय तक तपते रहते हैं.

क्यों घरों में AC नहीं?

यूरोप के कई देशों में पारंपरिक रूप से एयर कंडीशनर की जरूरत बहुत कम रही है. इसी कारण बड़ी संख्या में घरों में एसी नहीं लगे हैं. जब लगातार कई दिनों तक तापमान 40 डिग्री के आसपास बना रहता है और रात में भी पर्याप्त ठंडक नहीं मिलती, तो लोगों के लिए घरों के अंदर रहना भी मुश्किल हो जाता है.

यूरोप की मौजूदा हीट वेव में केवल दिन का तापमान ही नहीं, बल्कि रात का तापमान भी सामान्य से काफी अधिक बना हुआ है. रात में तापमान कम नहीं होने के कारण शरीर को गर्मी से उबरने का पर्याप्त समय नहीं मिलता, जिससे हीट स्ट्रेस और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है.

क्या जलवायु परिवर्तन ने बढ़ाई चुनौती?

रिपोर्ट के मुताबिक जलवायु परिवर्तन के कारण यूरोप में अत्यधिक गर्मी की घटनाएं पहले की तुलना में कहीं अधिक बार देखने को मिल रही हैं. एक समय जिसे असाधारण मौसम माना जाता था, अब वह लगभग हर साल देखने को मिल रहा है. इससे स्वास्थ्य सेवाओं, बिजली व्यवस्था, जल संसाधनों और शहरी बुनियादी ढांचे पर भी दबाव बढ़ रहा है.

क्या है यूरोप के सामने सबसे बड़ी चुनौती?

यूरोप के लिए सबसे बड़ी चुनौती अब केवल बढ़ता तापमान नहीं, बल्कि अपने शहरों, घरों और सार्वजनिक ढांचे को बदलती जलवायु के अनुरूप तैयार करना भी है. भविष्य में हीट वेव से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए घर निर्माण, ऊर्जा व्यवस्था और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में बड़े बदलाव जरूरी होंगे.

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