जवानी में ड्रमर और अब युवाओं में मशहूर, कौन हैं जापान की पीएम बनने वाली आयरन लेडी ताकाइची?
जापान में हुए आम चुनावों में प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची की पार्टी एलडीपी को जीत मिलती दिख रही है. उनकी इस जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई दी है.
Who is Iron Lady Takaichi: जापान में हुए अचानक आम चुनावों में प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची की सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) को बड़ी जीत मिलती नजर आ रही है. मीडिया अनुमानों के मुताबिक, इस जीत से ताकाइची की राजनीतिक स्थिति और मजबूत होगी, लेकिन इसके साथ ही वैश्विक निवेशकों और पड़ोसी देश चीन की चिंताएं भी बढ़ गई हैं.
जापान के सरकारी ब्रोडकास्टर NHK के अनुमान के मुताबिक, 465 मेंबर्स वाले निचले सदन में LDP को 274 से 328 सीटें मिल सकती हैं. यह पार्टी की पिछली 198 सीटों के मुकाबले में बड़ी छलांग मानी जा रही है. गठबंधन सहयोगी जापान इनोवेशन पार्टी के साथ मिलकर गठबंधन को कुल 302 से 366 सीटें मिलने का अनुमान है, जिससे संसद में साफ और मजबूत बहुमत हासिल होगा.
सानाई तकाची को बड़ी जीत की उम्मीद
अगर यह गठबंधन 310 सीटों का आंकड़ा पार कर लेता है, तो यह 2017 के बाद पहली बार होगा जब निचले सदन में किसी सरकार को दो-तिहाई बहुमत मिलेगा. उस समय जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे थे, जिन्हें ताकाइची का राजनीतिक मार्गदर्शक भी माना जाता है. ऐसा बहुमत सरकार को कानून बनाने में ज्यादा ताकत और राजनीतिक स्थिरता देगा.
कौन हैं सानाई ताकाइची?
- 64 साल की ताकाइची का राजनीतिक सफर भी काफी दिलचस्प रहा है. जवानी में वह हेवी मेटल म्यूजिक बैंड की ड्रमर रह चुकी हैं और खुद को ब्रिटेन की पूर्व प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर की प्रशंसक बताती हैं.
- सानाए ताकाइची अक्टूबर 2025 से जापान की प्रधानमंत्री और लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) की अध्यक्ष हैं, और इन दोनों पदों पर पहुंचने वाली देश की पहली महिला नेता हैं. 1993 से प्रतिनिधि सभा की सदस्य रहीं ताकाइची ने शिंजो आबे, जुनिचिरो कोइजुमी और फुमियो किशिदा सरकारों में कई अहम मंत्री पद संभाले हैं.4
- किशिदा सरकार में उन्होंने आर्थिक सुरक्षा मंत्री के रूप में सिक्योरिटी क्लियरेंस सिस्टम से जुड़ा कानून तैयार कराया, जिसे 2024 में संसद की मंजूरी मिली. 2021 और 2024 में LDP अध्यक्ष पद की दौड़ में असफल रहने के बाद, 2025 में उन्होंने शिंजिरो कोइजुमी को हराकर पार्टी की कमान संभाली.
- ताकाइची ने पहली बार 1992 के हाउस ऑफ काउंसलर्स चुनावों के दौरान नारा प्रीफेक्चर के चुनावी जिले से चुनाव लड़ने की कोशिश की थी. 313 योग्य मतदाताओं में से, ताकाइची हत्तोरी से हार गईं. इस चुनाव में हत्तोरी को कुल 162 वोट मिले जबकि ताकाइची को कुल 137 वोट और 1 अमान्य वोट मिला था.
- यासुकुनी श्राइन यात्रा और कड़े राष्ट्रवादी रुख के कारण वह कई बार विवादों में रहीं, खासकर चीन और दक्षिण कोरिया के साथ रिश्तों को लेकर. मीडिया स्वतंत्रता और ब्रॉडकास्टिंग पर सरकारी नियंत्रण से जुड़े बयानों के चलते उन पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठे.
युवा मतदाताओं के बीच काफी मशहूर
ऐसा देखा गया है कि युवा मतदाताओं के बीच उनकी लोकप्रियता बढ़ी है, जिसमें मजबूत राजनीतिक संदेश के साथ-साथ उनकी सहज और जुड़ाव वाली सार्वजनिक छवि ने अहम भूमिका निभाई है.
पीएम मोदी ने दी बधाई
इस बीच, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सानाए ताकाइची को चुनावी जीत पर बधाई दी है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि भारत-जापान की विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाती है और उन्हें विश्वास है कि ताकाइची के नेतृत्व में दोनों देशों की दोस्ती नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगी.
ताकाइची की जीत से क्या है इंटरनेशनल इफेक्ट?
ताकाइची की इस बड़ी जीत के अंतरराष्ट्रीय असर भी देखे जा रहे हैं, खासकर चीन के साथ रिश्तों को लेकर. वह बीजिंग के प्रति सख्त रुख के लिए जानी जाती हैं. हाल ही में उन्होंने कहा था कि अगर चीन बलपूर्वक ताइवान पर कब्जा करने की कोशिश करता है, तो जापान सैन्य हस्तक्षेप पर भी विचार कर सकता है. इस बयान पर चीन ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी, जापान के राजदूत को तलब किया था और अपने नागरिकों को जापान यात्रा को लेकर चेतावनी जारी की थी.





