क्या नहीं खत्म होगा होर्मुज संकट? ईरान के 'डील प्लान’ पर भड़के रुबियो, आखिर क्या चाहता है अमेरिका?
अमेरिका ने होर्मुज़ को लेकर ईरान के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है. विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने साफ किया कि न्यूक्लियर मुद्दा ही सबसे अहम है.
US on Iran Proposal: अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने कड़ी शर्तों के साथ होर्मुज़ को फिर से खोलने की बात कही है. रुबियो ने साफ कहा कि यह प्रस्ताव अमेरिका और अन्य देशों के लिए स्वीकार्य नहीं है. उन्होंने यह भी दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना ही अमेरिका के अभियान का अहम मकसद है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने अमेरिका को एक नया प्रस्ताव दिया है, जिसमें होर्मुज़ को खोलने और मौजूदा तनाव को खत्म करने की बात कही गई है. इस प्रस्ताव में यह भी सुझाव दिया गया है कि परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत को बाद के चरणों के लिए टाल दिया जाए. Axios की रिपोर्ट के अनुसार, यह जानकारी एक अमेरिकी अधिकारी और इस मामले से जुड़े दो सूत्रों ने दी है.
क्या है होर्मुज?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है और दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी का परिवहन इसी रास्ते से होता है, इसलिए इसका रणनीतिक महत्व बहुत ज्यादा है.
होर्मुज पर क्या बोले रुबियो?
फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में रुबियो ने कहा कि ईरान इस जलमार्ग को लेकर दुनिया के बाकी देशों से अलग नजरिया रखता है. उन्होंने कहा, "ईरान के हिसाब से होर्मुज खोलने का मतलब है कि आप तभी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं जब आप उनसे अनुमति लें या उनकी शर्तें मानें, वरना खतरा उठाना पड़ेगा."
रुबियो ने कहा कि यह किसी भी तरह से जलमार्ग को खोलना नहीं है, क्योंकि ये अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग हैं और किसी एक देश का इस पर नियंत्रण नहीं हो सकता. उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी व्यवस्था को सामान्य नहीं बनने दिया जा सकता, जिसमें ईरान तय करे कि कौन इस रास्ते का इस्तेमाल करेगा और इसके लिए कितना भुगतान करना होगा.
न्यूक्लियर बातचीत पर क्या बोले रुबियो?
परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत को टालने वाले प्रस्ताव पर रुबियो ने कहा कि उन्हें पूरा यकीन है कि अगर ईरान में मौजूदा शासन बना रहा, तो वह भविष्य में परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश करेगा. उन्होंने कहा कि यही असली मुद्दा है और इससे निपटना जरूरी है. रुबियो के बयान से साफ जाहिर है कि अमेरिका मौजूदा शासन को भी खासा पसंद नहीं करता है.
जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान इस समझौते को लेकर गंभीर है, तो उन्होंने कहा कि ईरान बातचीत में माहिर है और वह समय खरीदने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने कहा कि अमेरिका को यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी समझौता ऐसा हो, जिससे ईरान कभी भी परमाणु हथियार की ओर तेजी से न बढ़ सके.
वहीं, व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की राष्ट्रीय सुरक्षा टीम ने सोमवार को इस मुद्दे पर बैठक की और ईरान के प्रस्ताव पर चर्चा की. हालांकि, उन्होंने इस बैठक के नतीजों या प्रस्ताव पर अमेरिका के रुख को लेकर कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी. उन्होंने कहा कि इस बारे में ट्रंप बाद में खुद जानकारी देंगे.




