US Secret Service के भरोसे अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा, भारत में कैसे होती है प्रेसिडेंट की सिक्योरिटी, जानें अंतर
वॉशिंगटन डीसी में व्हाइट हाउस कॉरेस्पॉन्डेंट्स डिनर के दौरान अचानक फायरिंग से अफरा-तफरी मच गई. सीक्रेट सर्विस की तत्परता से राष्ट्रपति ट्रंप और अन्य बड़े नेता सुरक्षित बच निकले.
वाशिंगटन डीसी में 25 अप्रैल 2026 की शाम को व्हाइट हाउस कॉरेस्पॉन्डेंट्स डिनर के दौरान हुई गोलीबारी की घटना ने पूरी दुनिया को चौंका दिया. यह एनुअल इवेंट जर्नलिस्ट्स और अमेरिकी नेताओं के बीच दोस्ती और प्रेस फ्रीडम का प्रतीक माना जाता है, लेकिन इस बार यह एक खतरनाक हादसे का गवाह बन गया. इवेंट चल रहा था, वाशिंगटन हिल्टन होटल के बड़े बॉलरूम में सैकड़ों मेहमान मौजूद डिनर का आनंद ले रहे थे. तभी अचानक फायरिंग की आवाजें गूंज उठीं. पूरी हॉल में अफरा-तफरी मच गई. लोग चीखने लगे, 'नीचे झुक जाओ! की आवाजें आने लगीं. मेहमान टेबलों के नीचे छिप गए, जैसे कोई हॉलीवुड एक्शन फिल्म का सीन हो, लेकिन यह असल जिंदगी था.
इस इवेंट में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप, उप-राष्ट्रपति जे.डी. वेंस और कई कैबिनेट मंत्री भी मौजूद थे. गोलीबारी की खबर सुनते ही यूएस सीक्रेट सर्विस (US Secret Service) के एजेंट तुरंत एक्टिव हो गए. उन्होंने बहुत तेजी से कार्रवाई की राष्ट्रपति और फर्स्ट लेडी को स्टेज से सुरक्षित निकाला और उन्हें बाहर ले गए. सभी बड़े नेता सुरक्षित रहे. ट्रंप ने बाद में खुद इस घटना पर बयान देते हुए कहा, 'फायरिंग होते ही सीक्रेट सर्विस के एजेंट्स ने बेहद फ़ास्ट और प्रोफेशनल तरीके से काम किया. उनकी वजह से बड़ा हादसा टल गया. उन्होंने बताया कि एक सुरक्षाकर्मी गोली लगने से घायल हुआ, लेकिन उसकी बुलेटप्रूफ जैकेट की वजह से जान बच गई. वह फिलहाल इलाज करा रहा है.
अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा में सीक्रेट सर्विस की भूमिका
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि यूएस सीक्रेट सर्विस कितनी पॉवरफुल, प्रशिक्षित और तैयार रहती है. यह एजेंसी सिर्फ राष्ट्रपति की नहीं, बल्कि उप-राष्ट्रपति, उनके परिवार, पूर्व राष्ट्रपतियों (जीवन भर) और महत्वपूर्ण विदेशी मेहमानों की सुरक्षा करती है. सीक्रेट सर्विस के एजेंट्स की चुनिंदा भर्ती होती है. इसमें शामिल होने के लिए उम्मीदवार को कई टफ़्फ़ फेज पूरे करने पड़ते हैं:
एबिलिटी: अमेरिकी नागरिक होना चाहिए, उम्र 21 से 37 वर्ष के बीच, अच्छी फिजिकल फिटनेस, ड्राइविंग लाइसेंस
एजुकेशन : बैचलर डिग्री या पुलिस/मिलिट्री में एक्सपीरियंस
सिलेक्शन प्रोसेस: रिटेन एग्जाम, फिजिकल फिटनेस टेस्ट, इंटरव्यू, पॉलीग्राफ (झूठ डिटेक्टर) टेस्ट, मेडिकल चेकअप, क्रेडिट चेक और बहुत गहरी बैकग्राउंड जांच
ट्रेनिंग: सक्सेसफुल कैंडिडेट को इंटेंसिव ट्रेनिंग दिया जाता है, जिसमें फायरिंग, ड्राइविंग, सेल्फ-डिफेन्स, इंटेलिजेंस और खतरे का आकलन शामिल है
ये एजेंट्स सूट-बूट में रहते हुए भी हमेशा अलर्ट रहते हैं. वे पहले से खतरे का आकलन करते हैं, सोशल मीडिया मॉनिटर करते हैं और हर जगह एडवांस टीम भेजते हैं
कैसे अमेरिका से अलग है भारत के राष्ट्रपति की सुरक्षा?
हालांकि सवाल उठता है कि अमेरिका के यूएस सीक्रेट सर्विस और भारत में राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था में काफी अंतर है. दोनों देशों की सुरक्षा सिस्टम मजबूत हैं, लेकिन उनका तरीका, जिम्मेदारी और संगठन अलग-अलग है.
1. अमेरिका में राष्ट्रपति की सुरक्षा - यूएस सीक्रेट सर्विस
यूएस सीक्रेट सर्विस: अमेरिका की एक संघीय एजेंसी है, जो डिपार्टमेंट ऑफ़ होमलैंड सिक्योरिटी के अधीन काम करती है.
मुख्य जिम्मेदारी: अमेरिकी राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति, उनके परिवार, पूर्व राष्ट्रपति (जीवन भर तक), राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार और विदेशी मेहमानों (जैसे अन्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष) की सुरक्षा करना.
दोहरी भूमिका: सिर्फ सुरक्षा नहीं, बल्कि जाली नोट, फाइनेंशियल फ्रॉड, साइबर क्राइम, जैसी फाइनेंशियल क्राइम्स की जांच भी करती है.
कैसे काम करती है?
- स्थायी रूप से राष्ट्रपति के साथ स्पेशल एजेंट्स तैनात रहते हैं
- यात्रा के दौरान पहले से जगह की जांच एडवांस टीम
- खतरे का आकलन (threat assessment)
- सोशल मीडिया मॉनिटरिंग और इंटेलिजेंस का इस्तेमाल
- व्हाइट हाउस, उप-राष्ट्रपति का घर और विदेशी दूतावासों की सुरक्षा भी
- आर्मर्ड कार (The Beast), हेलीकॉप्टर, एयर फोर्स वन जैसी सुविधाएं
- राष्ट्रपति और उप-राष्ट्रपति सुरक्षा को अस्वीकार नहीं कर सकते
खास बात: यह एजेंसी बहुत बड़ी है (हजारों कर्मचारी), आधुनिक तकनीक (जैसे ओपन सोर्स इंटेलिजेंस, प्रोटेक्टिव थ्रेट मैनेजमेंट सिस्टम) का इस्तेमाल करती है.
2. भारत में राष्ट्रपति की सुरक्षा - कैसे होती है?
भारत में राष्ट्रपति की सुरक्षा यूएस सीक्रेट सर्विस जैसी एक अलग एजेंसी द्वारा नहीं की जाती. यह मुख्य रूप से राष्ट्रपति बॉडीगार्ड (President's Bodyguard - PBG) और अन्य सुरक्षा बलों द्वारा संभाली जाती है.
मुख्य जिम्मेदारी: प्रेसिडेंट बॉडीगार्ड (PBG): भारतीय सेना की सबसे पुरानी और सबसे सीनियर यूनिट (1773 से). यह राष्ट्रपति की एस्कॉर्ट (साथ चलना) और सेरेमोनियल सुरक्षा करती है. राष्ट्रीय राजधानी में राष्ट्रपति भवन की सुरक्षा में भी मदद.
PBG के जवान घुड़सवार (cavalry) होते हैं, लेकिन युद्ध के समय पैराशूट और आर्मर्ड टास्क भी करते हैं
इंटरनल सिक्योरिटी: दिल्ली पुलिस, CRPF (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल) और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के साथ मिलकर
कुछ मामलों में NSG (National Security Guard) के कमांडो भी मदद करते हैं, खासकर हाई-रिस्क स्थितियों में
राष्ट्रपति भवन (Rashtrapati Bhavan) की पूरी सुरक्षा का इंतजाम अलग-अलग स्तरों पर होता है बाहरी घेरा पुलिस/CRPF, अंदरूनी सुरक्षा PBG और अन्य एजेंसियां
राष्ट्रपति की सुरक्षा में कुल 176 जवान शामिल होते हैं. जिसमें 4 हाई रैंक के ऑफिसर, 11 जूनियर मीशंड ऑफिसर्स (JCO) और 161 जवान होते हैं
खास बात: भारत में राष्ट्रपति की सुरक्षा SPG (Special Protection Group) द्वारा नहीं की जाती. SPG सिर्फ प्रधानमंत्री (PM) और उनके परिवार की 24 घंटे निकटतम सुरक्षा (proximate security) करती है. राष्ट्रपति की सुरक्षा सेना और पुलिस आधारित है, जो ज्यादा सेरेमोनियल और परंपरागत है.
US Secret Service और भारत की राष्ट्रपति सुरक्षा में मुख्य अंतर
अमेरिका में राष्ट्रपति की सुरक्षा एक प्रोफेशनल, सिंगल और बहुत बड़ी संघीय एजेंसी (Secret Service) संभालती है, जो सिर्फ सुरक्षा पर फोकस नहीं बल्कि इंटेलिजेंस और जांच भी करती है. यह ज्यादा मॉडर्न और व्यापक है.
भारत में राष्ट्रपति की सुरक्षा सेना की एलीट यूनिट (PBG) और पुलिस/पैरामिलिट्री बलों के कॉम्बिनेशन से होती है. यह ज्यादा परंपरागत और सेरेमोनियल है. प्रधानमंत्री की सुरक्षा SPG द्वारा ज्यादा स्ट्रिक्ट होती है. जबकि राष्ट्रपति की सुरक्षा थोड़ी अलग लेवल की है.




