अपने मुंह मियां मिट्ठू बन रहे ट्रंप! आसान नहीं तेहरान को हिलाना..खामेनेई की मौत के बाद भी क्यों नहीं डगमगाएगा Iran का सिस्टम?
अमेरिका और इज़राइल के हमलों के बाद भले ही डोनाल्ड ट्रंप ईरान में सत्ता परिवर्तन के दावे कर रहे हों, लेकिन खुफिया रिपोर्टें उनकी उम्मीदों पर सवाल उठा रही हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, बड़े सैन्य हमलों के बावजूद ईरान की धार्मिक और सैन्य व्यवस्था इतनी मजबूत है कि उसे आसानी से गिराया नहीं जा सकता.
US-Israel-Iran War: अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमले में एक बड़े लक्ष्य को खत्म करने का दावा किया गया है. इस अभियान को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' का हिस्सा बताया गया, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई. हालांकि इसके बावजूद ईरान में सत्ता परिवर्तन होगा या नहीं, इस पर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है. वॉशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल ईरान में शासन परिवर्तन की संभावना “कम” मानी जा रही है.
रिपोर्ट के अनुसार, एक गोपनीय खुफिया आकलन में कहा गया है कि अगर अमेरिका ईरान पर बड़े स्तर का सैन्य हमला भी करे, तब भी देश की मजबूत सैन्य और धार्मिक व्यवस्था को गिराना आसान नहीं होगा. इससे ट्रंप प्रशासन की उस उम्मीद पर सवाल खड़े होते हैं, जिसमें कहा जा रहा है कि ईरान में नई सत्ता स्थापित की जा सकती है. अधिकारियों के मुताबिक मौजूदा सैन्य अभियान 'अभी सिर्फ शुरुआत' है.
खुफिया रिपोर्ट से कैसे उठे ट्रंप के प्लान पर सवाल?
टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक, वॉशिंगटन पोस्ट को इस रिपोर्ट की जानकारी तीन ऐसे लोगों ने दी है जो इसके बारे में जानते हैं. इस आकलन में ट्रंप की उस योजना पर भी सवाल उठाया गया है, जिसमें वे ईरान के नेतृत्व को हटाकर अपनी पसंद का नया नेता लाना चाहते हैं.
खुफिया रिपोर्ट में क्या है?
खुफिया रिपोर्ट अमेरिका और इज़राइल द्वारा 28 फरवरी को युद्ध शुरू करने से करीब एक हफ्ते पहले तैयार की गई थी. इसमें अलग-अलग संभावनाओं का विश्लेषण किया गया, जैसे कि सिर्फ ईरानी नेताओं को निशाना बनाने वाला सीमित अभियान या फिर देश की पूरी राजनीतिक और संस्थागत व्यवस्था पर बड़ा हमला.
खामेनेई की मौत के बाद भी कैसे चलती रहेगी ईरानी रिजीम?
विश्लेषकों का मानना है कि इन दोनों ही स्थितियों में, भले ही खामेनेई की मौत हो जाए, ईरान की शासन व्यवस्था काम करती रहेगी. उनका कहना है कि ईरान की धार्मिक और सैन्य संस्थाओं ने सत्ता की निरंतरता बनाए रखने के लिए पहले से प्रक्रियाएं तय कर रखी हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर ईरान की बिखरी हुई विपक्षी ताकतें सत्ता संभालने की कोशिश करें, तो उसके सफल होने की संभावना भी काफी कम हैं.
क्या दूसरे ऑप्शन्स के बारे में भी रिपोर्ट में कुछ हैं?
रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं है कि अन्य विकल्पों, जैसे ईरान में अमेरिकी जमीनी सेना भेजने या कुर्द समूहों को समर्थन देकर विद्रोह भड़काने, पर विचार किया गया था या नहीं. यह भी साफ नहीं है कि रिपोर्ट में जिस बड़े सैन्य अभियान का जिक्र है, वह मौजूदा अभियान से बिल्कुल मेल खाता है या नहीं.
अब ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ट्रंप को क्या किसी ने इस रिपोर्ट के बारे में जानकारी नहीं दी थी और अगर उन्हें जानकारी थी तो आखिर ईरान पर हमले करने का क्या कोई लॉन्ग टर्म फायदा होना था? फिलहाल ट्रंप लगातार ईरान की सत्ता से घुटने टेकने की मांग कर रहे हैं.
व्हाइट हाउस ने क्या कहा?
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एना केली ने कहा कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत अमेरिका के टारगेट साफ हैं. ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को खत्म करना, उसकी उत्पादन क्षमता को नष्ट करना, उसकी नौसेना को कमजोर करना, उसके सहयोगी समूहों को हथियार देने की क्षमता समाप्त करना और यह सुनिश्चित करना कि ईरान कभी परमाणु हथियार न बना सके.




