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अब पाकिस्तान में नहीं होगी अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत, ट्रंप ने ऐसा क्यों कहा- क्या अटक गई डील? TOP UPDATES

ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अमेरिका अब ईरान से बातचीत के लिए अपने प्रतिनिधि किसी दूसरे देश में नहीं भेजेगा, बल्कि फोन पर ही बातचीत होगी. वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची कूटनीतिक दौरे कर रहे हैं. पाकिस्तान मध्यस्थता की कोशिश में है, लेकिन हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं.

Why Trump Refused Iran Talks Travel?
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ट्रंप ने ईरान पर दिया बड़ा बयान

( Image Source:  Sora_ AI )

Why Trump cancelled envoys Iran talks explained: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत को लेकर सख्त रुख अपनाया है. ट्रंप ने साफ कहा कि अब अमेरिका किसी भी बातचीत के लिए अपने प्रतिनिधि दूसरे देशों में नहीं भेजेगा. अगर ईरान को बात करनी है, तो उसे खुद अमेरिका से संपर्क करना होगा-फोन पर.

ट्रंप के इस फैसले से साफ है कि अमेरिका अब 'डायरेक्ट और कंट्रोल्ड' बातचीत चाहता है, जिसमें वह शर्तें तय करे. उन्होंने दोहराया कि ईरान को किसी भी हालत में परमाणु हथियार नहीं बनाने दिया जाएगा और यही बातचीत की सबसे बड़ी शर्त है.

Iran vs US Tension: Top Updates

  • ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi लगातार कूटनीतिक दौरे कर रहे हैं. वे ओमान और पाकिस्तान जाकर बातचीत कर चुके हैं और अब रूस जाने की तैयारी में हैं. पाकिस्तान इस पूरे मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और कोशिश कर रहा है कि अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत फिर से शुरू हो सके.
  • हालांकि, पहले दौर की बातचीत (11-12 अप्रैल) से कोई ठोस नतीजा नहीं निकला था, अब ट्रंप द्वारा अपने दूतों की यात्रा रद्द करने के बाद अनिश्चितता और बढ़ गई है,
  • इस पूरे विवाद का एक बड़ा केंद्र Strait of Hormuz बना हुआ है, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल सप्लाई होता है. ईरान ने यहां नियंत्रण कड़ा कर दिया है, जबकि अमेरिका ने ईरानी पोर्ट्स पर दबाव बना रखा है. इससे ग्लोबल इकोनॉमी और तेल सप्लाई पर असर पड़ने का खतरा बढ़ गया है.
  • ईरान की संसद के दूसरे उपाध्यक्ष अली निकज़ाद का साफ तौर पर कहना है कि वे किसी भी हाल में होर्मुज़ जलडमरूमध्य को उसकी पिछली स्थिति में वापस नहीं ले जाएंगे, क्योंकि यह 'इस्लामी क्रांति के नेता' का आदेश है.
  • ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को होर्मुज स्ट्रेट के ज़रिए शिपिंग फिर से शुरू करने की तुरंत ज़रूरत के बारे में बात की. डाउनिंग स्ट्रीट के एक प्रवक्ता के मुताबिक, “नेताओं ने ग्लोबल इकॉनमी और UK और दुनिया भर में लोगों के रहने-सहने के खर्च पर पड़ने वाले गंभीर नतीजों को देखते हुए होर्मुज स्ट्रेट में शिपिंग फिर से शुरू करने की तुरंत ज़रूरत पर चर्चा की.”
  • प्रवक्ता ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री ने नेविगेशन की आज़ादी फिर से शुरू करने की कोशिशों पर भी अपडेट शेयर किए, जिसमें इमैनुएल मैक्रों के साथ एक जॉइंट पहल भी शामिल है.
  • वहीं, लेबनान में Hezbollah और इजरायल के बीच संघर्ष जारी है, जिससे हालात और जटिल हो गए हैं. हिजबुल्लाह ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के इस आरोप को खारिज कर दिया कि वह संघर्ष विराम को खतरे में डाल रहा है. उसका कहना है कि वह इजरायल के उल्लंघनों और दक्षिण लेबनान पर उसके कब्जे का जवाब देता रहेगा. एक बयान में, हिजबुल्लाह ने कहा कि दक्षिण लेबनान और उत्तरी इजरायल में इजरायली ठिकानों पर उसके हमले 'अस्थायी संघर्ष विराम की घोषणा के पहले दिन से ही दुश्मन द्वारा संघर्ष विराम के लगातार उल्लंघनों का एक वैध जवाब थे.
  • अलग-अलग देशों, जैसे मिस्र, कतर और ब्रिटेन भी कूटनीतिक प्रयासों में जुटे हैं ताकि अमेरिका-ईरान युद्ध को रोका जा सके. मिस्र के विदेश मंत्री बदर अब्देलअती ने अपने क़तरी और ईरानी समकक्षों के साथ अलग-अलग बातचीत की है. इन बातचीत के दौरान, अब्देलअती ने संघर्ष-विराम को बनाए रखने और युद्ध को पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए कूटनीतिक मार्ग अपनाने के महत्व पर ज़ोर दिया.

कुल मिलाकर, बातचीत की कोशिशें जारी हैं, लेकिन ट्रंप के सख्त रुख और जमीनी हालात के कारण समाधान अभी दूर नजर आ रहा है. ट्रंप ने पिछले हफ्ते सीज़फ़ायर को अनिश्चित काल के लिए बढ़ा दिया था, जिस पर अमेरिका और ईरान 7 अप्रैल को सहमत हुए थे, जिससे 28 फरवरी को शुरू हुई लड़ाई काफी हद तक रुक गई है, लेकिन अभी भी इस जंग में कोई अंतिम समझौता नहीं हो पाया है.

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