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Stone Age Explained: ‘ईरान को पाषाण युग में पहुंचा देंगे’, ट्रंप के बयान मतलब क्या? न बिजली, न इंटरनेट, कैसी थी इंसानी जिंदगी

डोनाल्ड ट्रंप के ‘ईरान को पाषाण युग में पहुंचाने’ वाले बयान का मतलब क्या है? जानिए पाषाण युग क्या था, उस समय इंसानी जिंदगी कैसी थी और एक्सपर्ट इसे कैसे समझाते हैं.

Iran crisis Donald Trump Stone Age statement
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डोनाल्ड ट्रंप स्टोन स्टेज स्टेटमेंट

( Image Source:  Sora AI )

हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump के एक बयान ने वैश्विक बहस छेड़ दी है. ईरान इजरायल और अमेरिका के बीच जारी वॉर को लेकर उन्होंने अपने बयान में कहा कि वे ईरान को “स्टोन एज” यानी पाषाण युग में पहुंचा सकते हैं. उनका यह रिएक्शन, सिर्फ एक राजनीतिक चेतावनी नहीं, बल्कि एक ऐसे हालात का संकेत है, जहां किसी देश का आधुनिक ढांचा (बिजली, इंटरनेट, उद्योग, परिवहन और संचार) पूरी तरह तबाह हो जाए. आखिर “पाषाण युग” होता क्या है, और उस दौर में इंसान कैसे जीता था?

क्या होता है पाषाण युग?

पाषाण युग मानव इतिहास का सबसे प्रारंभिक काल माना जाता है, जो करीब 25 लाख साल पहले शुरू हुआ और लगभग 3000 ईसा पूर्व तक चला. इस दौर में इंसान ने धातुओं का उपयोग नहीं सीखा था और पत्थर के औजारों से ही अपना जीवन चलाता था. इस युग को तीन हिस्सों में बांटा जाता है. पुरापाषाण (Old Stone Age), मध्यपाषाण (Middle Stone Age) और नवपाषाण (New Stone Age).

कैसी थी उस समय की जिंदगी?

न बिजली, न इंटरनेट : पाषाण युग की जिंदगी आज की आज की दुनिया से बिल्कुल उलट थी. कोई बिजली, मोबाइल, इंटरनेट या आधुनिक संचार नहीं था. रात का मतलब अंधेरा और खतरा.

भोजन के लिए संघर्ष : लोग शिकार करते थे, मछली पकड़ते थे या जंगली फल खाते थे. खेती की शुरुआत बहुत बाद में हुई.

स्थायी घर नहीं : इंसान गुफाओं, पेड़ों के नीचे या अस्थायी झोपड़ियों में रहता था. मौसम और जानवरों से हमेशा खतरा बना रहता था.

औजार और तकनीक : पत्थर, हड्डी और लकड़ी के औजार इस्तेमाल होते थे. जैसे भाले, कुल्हाड़ी, खुरचनी.

सामाजिक जीवन : छोटे-छोटे समूहों में रहना, आपसी सहयोग से शिकार और सुरक्षा करना, यही जीवन का आधार था.

ट्रंप के बयान का असली मतलब क्या?

Donald Trump का “Stone Age” वाला बयान असल में एक कड़ी सैन्य चेतावनी है. इसका मतलब है - इतना बड़ा हमला या तबाही कि कोई देश तकनीकी और आर्थिक रूप से पूरी तरह बर्बाद हो जाए.

दरअसल, पाषाण युग कोई सिर्फ इतिहास की किताब का अध्याय नहीं, बल्कि इंसान की सबसे कठिन और संघर्षपूर्ण जिंदगी का प्रतीक है. जब आज के नेता इस शब्द का इस्तेमाल करते हैं, तो वे दरअसल एक ऐसी भयावह स्थिति की बात कर रहे होते हैं जहां आधुनिक सभ्यता पूरी तरह ढह जाती है और इंसान फिर से जीवित रहने की मूल लड़ाई में उतर आता है.

Trump के बयान पर क्या कहते हैं Expert?

दिल्ली विश्वविद्यालय के एआरएसडी कॉलेज में इतिहास के प्रोफेसर अजीत कुमार का कहना है कि ट्रंप के बयान में शामिल 'पाषाण युग में लौटना' आज के संदर्भ में एक रूपक (metaphor) की तरह है. इसका मतलब यह नहीं कि लोग सच में लाखों साल पीछे चले जाएंगे, बल्कि यह है कि देश का पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर खत्म हो सकता है. बिजली, पानी, स्कूल, स्वास्थ्य सेवाएं और संचार बंद हो सकते हैं. ईरानी समाज अराजकता और जीवित रहने की जंग में बदल सकता है.

अजीत कुमार के अनुसार आधुनिक समाज कई तरह की बुनियादी सुविधाओं पर निर्भर है. तब भी उसका जीवन कठिन है. ट्रंप उसी खत्म करने की बात कर रहे हैं. ऐसा हुआ तो इंसानी जीवन बेहद कठिन और असुरक्षित हो जाएगा. वास्तव में, तब पत्थर वाला युग यानी मानव समाज का वो दौर शुरू होगा, जहां से इंसान का जीवन अस्तित्व में आया था. जब वो पहाड़ों, जंगलों और सुविधा के अभाव में घुमंतू जीवन जीता था. भला, आज का इंसान ऐसे युग की कल्पना कैसे कर सकता? यह तो मानव सभ्यता (ह्यूमन सिविलाइजेशन) को लाखों साल पीछे ले जाने वाली बात है.

डोनाल्ड ट्रंपईरान इजरायल युद्ध
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