Operation Absolute Resolve क्या है? जानिए वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो को काराकास से आधी रात उठाने की इनसाइड स्टोरी
Operation Absolute Resolve : अमेरिका ने ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिज़ॉल्व’ के तहत वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को कथित तौर पर अगवा किया. यह ऑपरेशन महीनों की खुफिया तैयारी और स्पेशल फोर्सेज़ की तैनाती के बाद अंजाम दिया गया. इसने अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता और अमेरिका की दोहरी नीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
US Operation Absolute Resolve in Venezuela: 3 जनवरी को अमेरिका ने एक ऐसा सैन्य ऑपरेशन अंजाम दिया, जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और युद्ध के स्थापित नियमों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया. ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिज़ॉल्व’ के तहत अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज़ ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को कथित तौर पर अगवा कर लिया. इस ऑपरेशन को दो नजरियों से देखा जा सकता है- पहला, एक संप्रभु देश के निर्वाचित राष्ट्रपति का अपहरण, जो अमेरिका द्वारा प्रचारित ‘Rules-Based International Order’ की खुली अवहेलना है. दूसरा, एक असाधारण स्पेशल फोर्स ऑपरेशन, जो हाल के दशकों में शायद ही कहीं देखने को मिला हो।
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क्यों यह ऑपरेशन असाधारण माना जा रहा है?
पाकिस्तान से बड़े देश के भीतर, भारी सुरक्षा वाले सैन्य ठिकाने में घुसकर, बिना किसी बड़े नुकसान के राष्ट्रपति को निकाल लाना, इसके लिए बेहद उन्नत ट्रेनिंग, खुफिया नेटवर्क और सैन्य ढांचे की जरूरत होती है. व्हाइट हाउस संबोधन से ठीक पहले फॉक्स न्यूज़ से बात करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ऐसा ऑपरेशन सिर्फ अमेरिका ही कर सकता है. हालांकि, इतिहास बताता है कि इज़राइल ही ऐसा दूसरा देश है जिसने इस स्तर की सैन्य सर्जिकल क्षमता दिखाई है.
इतिहास से तुलना: एंटेबे से एबटाबाद तक
1976 में इज़राइल का एंटेबे ऑपरेशन आज भी सैन्य इतिहास में मिसाल माना जाता है. वहीं अमेरिका के कई प्रयास असफल रहे;
- ऑपरेशन ईगल क्लॉ (1980) - ईरान में अमेरिकी बंधकों को छुड़ाने की कोशिश, 8 सैनिक मारे गए
- ऑपरेशन गॉथिक सर्पेंट (1993) - सोमालिया में ‘ब्लैक हॉक डाउन’, 18 अमेरिकी सैनिकों की मौत
- ऑपरेशन नेप्च्यून स्पीयर (2011) – ओसामा बिन लादेन मारा गया, लेकिन स्टेल्थ हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया
- मादुरो ऑपरेशन को अमेरिका इन सभी ‘भूतों’ से छुटकारा पाने की कोशिश के तौर पर देख रहा है.
टारगेट: राष्ट्रपति मादुरो कहां थे?
2019 के बाद मादुरो ने मिराफ्लोरेस पैलेस छोड़कर कराकास के भीतर स्थित फुएर्ते टिउना सैन्य छावनी में शरण ली थी. यहीं रक्षा मंत्रालय, मिलिट्री अकैडमी और बैरक मौजूद हैं. खबरों के मुताबिक, क्यूबाई सुरक्षा एजेंट तैनात थे. मादुरो एक विशेष बंकर ‘ला रोका’ में रहते थे. चीनी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद ही ऑपरेशन लॉन्च किया गया.
प्लानिंग: महीनों की खुफिया तैयारी
इस मिशन की योजना USS Iwo Jima के वेनेजुएला के पास तैनात होते ही शुरू हो गई थी. CIA और NSA ने मादुरो की हर गतिविधि का डेटा इकट्ठा किया, जैसे- वह कहां जाते हैं, क्या खाते हैं, कैसे चलते हैं, किस सुरक्षा घेरे में रहते हैं. डेल्टा फोर्स को ऑपरेशन सौंपा गया, जबकि हेलिकॉप्टर सपोर्ट 160th SOAR (Night Stalkers) ने दिया.
किन हेलिकॉप्टरों का हुआ इस्तेमाल?
- CH-46 चिनूक और HH-60 पावे हॉक
- एस्कॉर्ट में MH-60 DAP गनशिप
- एयर डिफेंस सिस्टम को पहले SEAD स्ट्राइक से तबाह किया गया
- 150+ अमेरिकी एयरक्राफ्ट ऑपरेशन में शामिल
D-Day: मिनटों में सब कुछ
- रात 1:01 बजे हेलिकॉप्टर फुएर्ते टिउना की छत पर उतरे
- कमांडोज़ ने बंकर तोड़ा, भारी गोलीबारी हुई
- ‘Time on Target’ बेहद सीमित रखा गया
- 180 मिनट के अंदर ऑपरेशन पूरा
एक्सफिल्ट्रेशन (निकासी)
राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी को पहले क्यूबा, फिर न्यूयॉर्क ले जाया गया. हेलिकॉप्टरों ने पहाड़ी रास्तों का इस्तेमाल कर रडार से बचते हुए अमेरिका पहुंचे.





