ट्रंप की चाल से हिला तेल बाजार: वेनेजुएला पर कब्जा, OPEC-रूस की उड़ी नींद! क्या कौड़ियों के भाव बिकेगा काला सोना?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वेनेजुएला पर सख्त एक्शन ने वैश्विक तेल बाजार में भूचाल मचा दिया है. OPEC, सऊदी अरब और रूस की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह से प्रभावित करेगा. वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन से सऊदी अरब और ईरान में तेल के उत्पादन फैसले और काला सोने की कीमतों में भारी गिरावट की संभावना है. इससे तेल निर्यातक देशों का नुकसान होगा.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक्शन ने एक बार फिर वैश्विक तेल राजनीति में भूचाल ला दिया है. वेनेजुएला पर अमेरिका की कड़ी रणनीति और निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी ने न सिर्फ ओपेक और रूस की नींद उड़ा दी है, बल्कि तेल की कीमतों को भी अप्रत्याशित उछाल ला दिया है. अब सवाल ये है - क्या काला सोना यानी Crude Oil कौड़ियों के भाव बिकेगा या डॉलर के बाजार में तूफान मचेगा? प्रमुख तेल उत्पादक देश जैसे वेनेजुएला, सऊदी अरब, ईरान और रूस पर अमेरिका के इस रणनीति से कितना असर पड़ेगा, क्या ये देश अपने तेल उत्पादन नीतियों नस सिरे से तय करेंगे?
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1. सऊदी अरब और रूस पर असर
वेनेजुएला पर अमेरिका की कार्रवाई से OPEC देशों, खासकर सऊदी अरब और ईरान के अतिरिक्त रूस को अपनी उत्पादन रणनीति बदलने पर मजबूर होना पड़ सकता है. सऊदी अरब को उत्पादन बढ़ाने या घटाने के विकल्प पर विचार करना होगा ताकि कीमतों में संतुलन बना रहे.
2. दुनिया भर में तेल के दाम कम होंगे या बढ़ेंगे
वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता के चलते, आने वाले हफ्तों में Crude Oil की कीमतों में तेजी की संभावना है. यूरोप और एशिया के रिफाइनरी हब्स में आपूर्ति दबाव के कारण कीमतें बढ़ सकती हैं.
3. अमेरिका का फायदा
अमेरिका वेनेजुएला पर नियंत्रण बढ़ाकर अपने तेल आयात और रणनीतिक भंडार पर पकड़ मजबूत कर सकता है. इससे अमेरिका को वैश्विक तेल की कीमतों में प्रभाव डालने का मौका मिलेगा और स्थानीय ऊर्जा कंपनियों को लाभ होगा.
4. वेनेजुएला का नुकसान
वेनेजुएला की तेल कंपनियों और आर्थिक ढांचे पर भारी असर पड़ेगा. वेनेजुएला में अमेरिकी निवेश बढ़ने से उत्पादन और निर्यात आने वाले समय में बढ़ेगा, लेकिन उसका हित साधने की उम्मीद कम है. ऐसा इसलिए तेल उत्पादन का अधिकांश हिस्सा अमेरिका वसूल करेगा. दूसरे देशों का निवेश वेनेजुएला में कम हो सकता है. इससे वहां की पहले से खराब अर्थव्यवस्था और ज्यादा कमजोर होने की उम्मीद है.
अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल उद्योग में 'बहुत मजबूत भागीदारी' की घोषणा की है. यह कदम वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार पर अमेरिकी नियंत्रण और वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर इसके संभावित प्रभाव को दिखाता है. अमेरिकी तेल कंपनियां वेनेजुएला के तेल बुनियादी ढांचे की मरम्मत और उत्पादन को फिर से शुरू करने के लिए अरबों डॉलर का निवेश करेंगी. तेल बिक्री से होने वाली आय से इन खर्चों की भरपाई करेगी. सऊदी अरब और रूस जैसे प्रमुख उत्पादकों का राजनीतिक कैलकुलेशन बदल सकता है.
5. वेनेजुएला में निवेश का भविष्य
हालांकि, अमेरिका की कार्रवाई निवेशकों को सतर्क कर सकती है, लेकिन अगर अमेरिकी कंपनियों के साथ साझेदारी बढ़ी, तो कुछ क्षेत्रों में निवेश का अवसर भी बन सकता है यह पूरी तरह से राजनीतिक और आर्थिक संतुलन पर निर्भर करेगा.
अमेरिकी निवेशकों का कहना है कि निकोलस मादुरो को हटाना तेल की कीमतों को कम करेगा, जो अमेरिका के लिए अच्छा है और रूस के लिए बहुत बुरा है. एक कमजोर रूसी अर्थव्यवस्था से यूक्रेन में युद्ध के जल्द समाप्त होने और यूक्रेन के लिए अधिक अनुकूल शर्तों पर समाप्त होने की संभावना बढ़ जाएगी.
6. वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे ज्यादा तेल
बता दें कि वेनेजुएला दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल भंडार का केंद्र है. एक अनुमान के अनुसार वेनेजुएला के पास लगभग 303 अरब बैरल तेल का भंडार है. वर्तमान में लगभग 57 डॉलर प्रति बैरल की कीमत पर इन भंडार का मूल्य लगभग 17.3 ट्रिलियन डॉलर है. यहां तक कि अगर प्रचलित बाजार दर से आधे पर भी बेचा जाए तो भी ये भंडार लगभग 8.7 ट्रिलियन डॉलर के होंगे. यह आंकड़ा अमेरिका और चीन को छोड़कर दुनिया के हर देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) से ज्यादा है.





