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नॉर्वे का भगोड़ा, पाकिस्तान का हीरो! इस्लामाबाद में वेंस के साथ दिखा उमर जहीर कौन?

इस्लामाबाद में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ दिखे उमर फारूक की मौजूदगी ने विवाद खड़ा कर दिया, क्योंकि वह नॉर्वे में धोखाधड़ी के मामलों में वांछित है. आइये जानते हैं पूरा मामला

नॉर्वे का भगोड़ा, पाकिस्तान का हीरो! इस्लामाबाद में वेंस के साथ दिखा उमर जहीर कौन?
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( Image Source:  X-@ANI and @Theunk5555 )
समी सिद्दीकी
Edited By: समी सिद्दीकी5 Mins Read

Updated on: 21 April 2026 1:50 PM IST

JD Vance meet Umar Farooq Zaheer: 11 अप्रैल को जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ईरान के साथ शांति वार्ता के पहले दौर के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंचे, तो एक वीडियो ने खास ध्यान खींचा. इस वायरल वीडियो में अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ, वेंस को एक शख्स से मिलवाते नजर आए, जिसकी पहचान नॉर्वे के अखबार वेरडेंस गैंग (VG) ने उमर फारूक जहीर के रूप में की. जहीर पाकिस्तान मूल के एक कारोबारी हैं, जिन्हें नॉर्वे में करोड़ों के धोखाधड़ी मामले में लंबे समय से वांछित माना जाता है.

नॉर्वे में फरार माने जाने वाले जहीर को पाकिस्तान में ‘हिलाल-ए-इम्तियाज’ जैसे दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान से नवाजा जा चुका है. उन्हें यह सम्मान देश में विदेशी निवेश लाने के लिए दिया गया था. हालांकि स्विट्जरलैंड में भी उनके कथित संदिग्ध कारोबार को लेकर जांच हो चुकी है. खास बात यह है कि इमरान खान से जुड़े तोशाखाना मामले में व्हिसलब्लोअर के तौर पर भी उसका नाम सामने आया था, जिसने उन्हें पाकिस्तान की सत्ता के करीब ला दिया.

कौन है उमर फारूक जहीर?

उमर फारूक जहीर का जन्म ओस्लो में सियालकोट मूल के माता-पिता के यहां हुआ था. वह खुद को कारोबारी, निवेशक और उद्यमी बताता है और फिलहाल दुबई में रहता है. नॉर्वे की एजेंसियां उन्हें गंभीर वित्तीय अपराधों से जुड़ा भगोड़ा मानती हैं, जबकि पाकिस्तान में उसे विदेशी निवेश लाने और सार्वजनिक भूमिका के लिए सम्मानित किया गया है.

पहली बार कब अपराधिक लिस्ट में शामिल हुआ ?

VG की रिपोर्ट के मुताबिक, जहीर का पहला मामला 2003 का है, जब ओस्लो की एक अदालत ने उन्हें अपने परिवार की ट्रैवल एजेंसी से एयरलाइन टिकट घोटाले में दोषी ठहराते हुए एक साल की सजा सुनाई थी. अदालत ने इसे योजनाबद्ध अपराध बताया था. हालांकि जहीर सजा के दौरान अदालत में पेश नहीं हुए और नॉर्वे छोड़ दिया. 10 साल बाद यह सजा अपने आप खत्म हो गई.

नॉर्वे में क्या है जहीर पर केस?

इसके बाद 2010 से नॉर्वे पुलिस उसे नॉर्डिया बैंक से जुड़े एक बड़े धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तलाश रही है. आरोप है कि इस मामले में करीब 60 मिलियन नॉर्वेजियन क्रोनर की हेराफेरी हुई. अभियोजन पक्ष ने कई बार उनकी गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण की मांग की, लेकिन जहीर ने हमेशा इन आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि वह 2005 के बाद से नॉर्वे नहीं गए.

स्विट्जरलैंड में जहीर के खिलाफ क्या केस है?

स्विट्जरलैंड में भी 2004 में उन पर ज्यूरिख में एक फर्जी बैंक बनाकर करीब 20 मिलियन डॉलर की ठगी का आरोप लगा था. इस मामले में उनके एक कारोबारी सहयोगी को दोषी ठहराया गया, जबकि जहीर की गिरफ्तारी नहीं हुई. बाद में यह मामला समय सीमा खत्म होने के कारण बंद हो गया.

2015 में VG ने उन्हें दुबई की अमेरी ग्रुप से जुड़े 510 मिलियन डॉलर के एक ऊर्जा समझौते से भी जोड़ा था, जो घाना सरकार के साथ हुआ था. हालांकि इस डील में उनकी भूमिका को लेकर विवाद रहा और कोई सीधा आपराधिक दोष साबित नहीं हुआ.

पाकिस्तान में केस फिर कैसे मिली क्लीन चिट?

‘डॉन’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2020 में उनकी पूर्व पत्नी के आरोपों के बाद पाकिस्तान की जांच एजेंसी एफआईए ने उनके खिलाफ मामला दर्ज किया था और इंटरपोल रेड नोटिस भी जारी हुआ था. लेकिन 2022 में पाकिस्तान ने अपना अनुरोध वापस ले लिया, जिसके बाद रेड नोटिस हट गया और जांच भी सबूतों के अभाव में बंद कर दी गई.

पाकिस्तान में क्यों मिली प्राइज?

मार्च 2025 में पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने उन्हें ‘हिलाल-ए-इम्तियाज’ से सम्मानित किया. यह सम्मान उन्हें इंफ्रास्ट्रक्चर, आईटी, लॉजिस्टिक्स और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में करीब 700 मिलियन डॉलर के निवेश लाने के लिए दिया गया. हालांकि ‘एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि उन्हें तोशाखाना केस में व्हिसलब्लोअर की भूमिका के कारण भी यह सम्मान मिला, जिसमें इमरान खान पर सरकारी तोहफों को बेचने का आरोप है.

अप्रैल 2025 में एक पाकिस्तानी अदालत ने VG के संपादक और रिपोर्टर के खिलाफ मानहानि मामले में जहीर के पक्ष में फैसला सुनाया और उन्हें हर्जाना देने का आदेश दिया, हालांकि VG ने इस फैसले को स्वीकार नहीं किया है. इन सभी घटनाओं के बीच 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में जेडी वेंस और स्टीव विटकॉफ के साथ जहीर की मौजूदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. यह स्पष्ट नहीं है कि वह किसी आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे या निजी तौर पर वहां मौजूद थे.

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