IRGC में मुनीर के कितने आदमी! क्यों ट्रंप के लिए अच्छी नहीं पाकिस्तान से इतनी करीबी?
ईरान अमेरिका डायलॉग के बीच IRGC से आसिम मुनीर के रिश्तों ने अमेरिका की चिंता बढ़ाई. जानें क्यों ट्रंप के लिए पाकिस्तान से बढ़ती नजदीकी एक बड़ा रणनीतिक जोखिम मानी जा रही है.
अमेरिका, ईरान और पाकिस्तान के बीच बनता-बिगड़ता समीकरण एक बार फिर ग्लोबल पॉलिटिक्स के केंद्र में है. खासतौर पर पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर और ईरान की शक्तिशाली सैन्य इकाई ईस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प (IRGC) के बीच गहरे रिश्तों ने वॉशिंगटन और पेंटागन को टेंशन में डाल दिया है. चौंकाने वाली बात यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार मुनीर की तारीफ करते नजर आते हैं, जिससे यह सवाल और गहरा हो जाता है - क्या पाकिस्तान के साथ यह नजदीकी अमेरिका के लिए रणनीतिक जोखिम बन सकती है? अब यह मामला अमेरिकन पॉलिटिक्स में चर्चा का विषय बन गया है.
क्या है पूरा मामला, खतरे की घंटी कैसे?
फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी डिफेंस एक्सपर्ट ने ट्रंप प्रशासन से साफ कहा है कि आसिम मुनीर (Asim Munir) के IRGC के साथ पुराने और मजबूत रिश्ते अमेरिका के लिए “रेड फ्लैग” हैं.
IRGC केवल एक सैन्य संगठन नहीं, बल्कि ईरान की रणनीतिक, खुफिया और क्षेत्रीय गतिविधियों का केंद्र है. ऐसे में किसी ऐसे सैन्य नेता का, जो अमेरिका के करीबी सहयोगी देश पाकिस्तान का शीर्ष अधिकारी हो, इस संगठन से गहरे संबंध रखना वॉशिंगटन के लिए चिंता का विषय बनना स्वाभाविक है. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति अमेरिका की सुरक्षा नीतियों और मध्य-पूर्व रणनीति को प्रभावित कर सकती है.
क्या आसिम मुनीर IRGC से लंबे समय से जुड़े हैं?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मुनीर के ईरान से रिश्ते नए नहीं हैं. जब वह 2016–2017 के दौरान पाकिस्तान की मिलिट्री इंटेलिजेंस के प्रमुख थे, उसी समय से उन्होंने ईरान के सैन्य और खुफिया तंत्र के साथ संपर्क विकसित करना शुरू किया. फॉक्स न्यूज ने पाकिस्तान के रिटायर्ड जनरल अहमद सईद के हवाले से कहा है कि पाक आर्मी चीफ मुनीर ने IRGC के अलावा ईरान की नियमित सेना, खुफिया एजेंसियों और राजनीतिक नेतृत्व के साथ भी संबंध बनाएयह भी बताया गया कि उनके संपर्क ईरान के शीर्ष सैन्य चेहरों तक पहुंचे थे, जिनमें Qasem Soleimani और Hossein Salami जैसे नाम शामिल हैं.
मुनीर अमेरिका और ईरान के बीच ‘बैकचैनल’ की भूमिका निभा रहे हैं?
इसका जवाब काफी हद तक हां है. रिपोर्ट्स बताती हैं कि Asim Munir पिछले कुछ महीनों से अमेरिका और ईरान के बीच एक अनौपचारिक “बैकचैनल” (गुप्त संपर्क सूत्र) के रूप में काम कर रहे हैं. खासकर जब वॉशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव बढ़ा. ईरान के परमाणु कार्यक्रम और फारस की खाड़ी में हालात को लेकर बातचीत जरूरी हुई.
इसी संदर्भ में मुनीर का ईरान दौरा भी काफी अहम माना जा रहा है, जहां उन्होंने विदेश मंत्री Abbas Araghchi सहित कई शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात की. यह भूमिका उन्हें एक “डबल कनेक्टर” बनाती है, जो एक साथ अमेरिका और ईरान दोनों से संवाद में है.
Donald Trump क्यों कर रहे हैं मुनीर की तारीफ?
यह इस कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू है. Donald Trump ने कई बार सार्वजनिक रूप से मुनीर की तारीफ की है. उन्हें “बेहतरीन इंसान”, “महान योद्धा” और “मेरे पसंदीदा फील्ड मार्शल” तक कहा है. मई 2025 के भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान कथित तौर पर मुनीर ने तनाव कम कराने में भूमिका निभाई
इसके बाद पाकिस्तान ने ट्रंप को “नोबेल शांति पुरस्कार” के लिए नामित किया, जिसे विश्लेषक मुनीर की रणनीति का हिस्सा मानते हैं. ट्रंप की नजर में मुनीर एक उपयोगी मध्यस्थ हैं, लेकिन यही बात अमेरिकी सुरक्षा तंत्र के लिए चिंता का कारण बन रही है.
पाक आर्मी चीफ से रिश्ते खतरा क्यों?
अमेरिकी थिंक टैंक Foundation for Defense of Democracies के विश्लेषक बिल रोगियो का मानना है कि पाकिस्तान पहले भी “डबल गेम” खेल चुका है. अफगानिस्तान में अमेरिका का सहयोगी होने के बावजूद तालिबान का समर्थन करता रहा. ऐसे में अगर पाकिस्तान का सेना प्रमुख IRGC जैसे संगठन से जुड़ा हो, तो यह अमेरिका के लिए बड़ा रणनीतिक जोखिम बन सकता है.
अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार संवेदनशील जानकारी लीक होने का खतरा है. मध्य-पूर्व में अमेरिकी रणनीति प्रभावित होने का जोखिम और ईरान को अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.
क्या यह ‘रणनीतिक संतुलन’ है या ‘खतरनाक खेल’?
यह सवाल अभी खुला हुआ है. एक तरफ Asim Munir खुद को एक ऐसे नेता के रूप में पेश कर रहे हैं जो दो विरोधी शक्तियों के बीच पुल बना सकते हैं. दूसरी तरफ, अमेरिका के भीतर यह डर भी बढ़ रहा है कि यह “दो नावों पर सवार” होने जैसा है. इतिहास गवाह है कि पाकिस्तान की विदेश नीति अक्सर “संतुलन” और “रणनीतिक लचीलापन” पर आधारित रही है, लेकिन कई बार यही रणनीति उसके सहयोगियों के लिए परेशानी का कारण बनी है.
आसिम मुनीर और आईआरजीसी व Donald Trump के बीच बनता यह त्रिकोणीय समीकरण केवल कूटनीति नहीं, बल्कि एक जटिल रणनीतिक खेल है. ट्रंप के लिए यह एक अवसर हो सकता है. ईरान से संवाद का, लेकिन अमेरिकी सुरक्षा तंत्र के लिए यह वेकअप कॉल भी है. यह बहस इसी सवाल पर टिकी है कि, क्या पाकिस्तान अमेरिका का भरोसेमंद साझेदार है, या फिर एक बार फिर “डबल रोल” निभा रहा है?




