Apple Pakistan Plan : क्या सच में पाकिस्तान में iPhone बनाने की तैयारी कर रहा है Apple?
Apple पाकिस्तान में फिलहाल iPhone मैन्युफैक्चरिंग नहीं बल्कि रिफर्बिश और री-एक्सपोर्ट हब बनाने की योजना पर काम कर रहा है. इससे पाकिस्तान को पहले साल करीब 100 मिलियन डॉलर कमाने की उम्मीद है.
अमेरिकी टेक दिग्गज Apple को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, Apple पाकिस्तान में iPhone मैन्युफैक्चरिंग की दिशा में कदम बढ़ाने की योजना बना रहा है. इसके लिए पाकिस्तान सरकार ने कंपनी को विशेष प्रोत्साहन (incentives) देने पर सहमति जताई है.
पाकिस्तान के अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, Apple फिलहाल पाकिस्तान में नए iPhone बनाने के बजाय पुराने iPhone को रिफर्बिश (Refurbish) कर दोबारा एक्सपोर्ट करने की योजना पर काम कर रहा है. यानी शुरुआती चरण में पाकिस्तान को iPhone निर्माण का केंद्र नहीं, बल्कि iPhone रिपेयर और री-एक्सपोर्ट हब बनाया जाएगा.
सरकार को कितना फायदा होगा?
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान सरकार को इस योजना से पहले ही साल में करीब 100 मिलियन डॉलर (लगभग 830 करोड़ रुपये) की कमाई होने की उम्मीद है. यह कमाई रिफर्बिश्ड iPhone को दूसरे देशों में दोबारा बेचने से होगी. इसी मकसद से पाकिस्तान सरकार एक नया Mobile and Electronics Manufacturing Framework तैयार कर रही है, जिसे प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मंजूरी दिलाई जाएगी.
Apple ने क्या शर्तें रखीं?
पाकिस्तान के इंजीनियरिंग डेवलपमेंट बोर्ड (EDB) के CEO हमद अली मंसूर के मुताबिक, Apple ने सरकार के सामने तीन बड़ी शर्तें रखी हैं:
- 8% परफॉर्मेंस इंसेंटिव
- 2-3 साल पुराने iPhone की रिपेयर और रिफर्बिशिंग की अनुमति
- कम कीमत पर जमीन
मंसूर ने कहा कि इन शर्तों को नए मैन्युफैक्चरिंग फ्रेमवर्क में शामिल किया गया है ताकि Apple जैसी बड़ी कंपनी को पाकिस्तान लाया जा सके.
क्या भारत जैसा मॉडल अपनाना चाहता है पाकिस्तान?
EDB प्रमुख के अनुसार, Apple ने पहले भी भारत, इंडोनेशिया और मलेशिया में इसी तरह की रणनीति अपनाई थी. शुरुआत में कंपनी ने वहां पुराने iPhone की मरम्मत और री-एक्सपोर्ट से काम शुरू किया, फिर धीरे-धीरे लोकल वर्कफोर्स को ट्रेनिंग दी, सप्लाई चेन तैयार की और बाद में लोकल मैन्युफैक्चरिंग शुरू की. पाकिस्तान भी अब उसी मॉडल पर आगे बढ़ना चाहता है.
पहले से मिल रहा है इंसेंटिव, अब बढ़ेगा
रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान सरकार अभी मोबाइल मैन्युफैक्चरर्स को 6% परफॉर्मेंस इंसेंटिव देती है. लेकिन Apple और दूसरी ग्लोबल कंपनियों को आकर्षित करने के लिए इसे 8% तक बढ़ाने की तैयारी है. इससे पाकिस्तान को उम्मीद है कि सिर्फ Apple ही नहीं, बल्कि दूसरी विदेशी कंपनियां भी वहां निवेश करेंगी.
चीन से भी निवेश की उम्मीद
Apple के अलावा पाकिस्तान सरकार की नजर चीन की कंपनियों पर भी है. EDB CEO मंसूर ने कहा कि चीन की मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों से करीब 557 मिलियन डॉलर (करीब 4,600 करोड़ रुपये) के निवेश की उम्मीद की जा रही है. उन्होंने बताया कि जब प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ बीजिंग दौरे पर गए थे, तब इस संबंध में एक MoU (समझौता ज्ञापन) पर भी साइन हुआ था.
पाकिस्तान को क्यों चाहिए Apple?
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था इस समय गंभीर संकट से जूझ रही है. देश अभी विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव, बेरोजगारी की समस्या और आयात-निर्यात का असंतुलन जैसी समस्याओं से जूझ रहा है. ऐसे में Apple जैसी कंपनी का आना पाकिस्तान के लिए विदेशी निवेश (FDI) बढ़ा सकता है और युवाओं को रोजगार दे सकता है. साथ ही टेक्नोलॉजी सेक्टर को मजबूती दे सकता है और “Made in Pakistan” मोबाइल इंडस्ट्री को पहचान दिला सकता है.
क्या भारत को चिंता करनी चाहिए?
भारत पहले ही Apple का बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब बन चुका है. iPhone का बड़ा हिस्सा अब भारत में असेंबल हो रहा है. पाकिस्तान की यह कोशिश भारत की बराबरी नहीं, बल्कि अपनी शुरुआती एंट्री मानी जा रही है. विशेषज्ञों के मुताबिक पाकिस्तान में अभी न तो मजबूत सप्लाई चेन है, न ही उतना प्रशिक्षित वर्कफोर्स और न ही Apple जैसा भरोसेमंद इकोसिस्टम. इसलिए फिलहाल यह भारत के लिए सीधी चुनौती नहीं, बल्कि पाकिस्तान की आर्थिक मजबूरी का संकेत है.
पाकिस्तान सरकार Apple को लाने के लिए टैक्स छूट, इंसेंटिव और सस्ती जमीन जैसे बड़े ऑफर दे रही है. शुरुआत में वहां iPhone का निर्माण नहीं, बल्कि रिफर्बिश और री-एक्सपोर्ट होगा. अगर यह मॉडल सफल रहा, तो भविष्य में पाकिस्तान भी भारत की तरह iPhone मैन्युफैक्चरिंग की ओर बढ़ सकता है. लेकिन असली सवाल यही है कि क्या Apple पाकिस्तान के राजनीतिक और आर्थिक जोखिमों के बीच लंबे समय तक टिकेगा, या यह सिर्फ एक सीमित प्रयोग बनकर रह जाएगा?




