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Iran आखिर कैसे दिखा रहा America और Israel को दिन में तारे, कौन कर रहा मिसाइल की सप्लाई- Indepth

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ा सवाल उठ रहा है कि आखिर ईरान अमेरिका के सामने इतना अड़िग क्यों खड़ा है. कई विशेषज्ञ मानते हैं कि इसके पीछे चीन की रणनीतिक दिलचस्पी भी हो सकती है. क्या तेहरान की इस चुनौती के पीछे बीजिंग का बड़ा हाथ है?

Iran आखिर कैसे दिखा रहा America और Israel को दिन में तारे, कौन कर रहा मिसाइल की सप्लाई- Indepth
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( Image Source:  AI GENERATED IMAGE- SORA )
समी सिद्दीकी
Edited By: समी सिद्दीकी6 Mins Read

Updated on: 10 March 2026 12:31 PM IST

Iran News: ईरान और इजराइल-अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध में चीन की भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है. कई विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन और रूस जैसे देश ईरान को राजनीतिक, आर्थिक और खुफिया स्तर पर समर्थन दे रहे हैं. हालांकि इस बारे में किसी भी देश ने खुलकर पुष्टि नहीं की है. लेकिन यह साफ है कि इस युद्ध में चीन के लिए भी बहुत कुछ दांव पर लगा हुआ है.

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पिछले हफ्ते कहा था कि चीन और रूस राजनीतिक और अन्य तरीकों से उनका समर्थन कर रहे हैं. उन्होंने NBC News को दिए इंटरव्यू में यह नहीं बताया कि दोनों देश किस तरह मदद कर रहे हैं. कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि चीन युद्ध के दौरान ईरान को जरूरी रियल-टाइम जानकारी दे सकता है.

क्या चीन कर रहा है ईरान की मदद?

हालांकि चीन की ओर से जानकारी साझा करने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यह माना जा रहा है कि चीन इस युद्ध को चुपचाप देखता नहीं रह सकता. मध्य पूर्व में उसका प्रभाव, ऊर्जा आपूर्ति और ताइवान से जुड़ी रणनीति जैसी कई अहम चीजें इस युद्ध से जुड़ी हुई हैं.

अमेरिकी सुरक्षा विश्लेषक और पूर्व डिप्टी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर जॉन फाइनर ने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा कि यह संभव है कि ईरान को अपने कुछ मित्र देशों से मदद मिली हो. उन्होंने कहा कि यह जरूरी नहीं कि चीन या अन्य मित्र देशों ने खुलकर युद्ध में हिस्सा लिया हो, लेकिन यह संभव है कि उन्होंने कुछ अहम जानकारी ईरान तक पहुंचाई हो.

कई विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान के करीबी सहयोगी चीन और रूस उसे खुफिया जानकारी, सैन्य उपकरण और आर्थिक मदद दी हो सकती है. हालांकि इस तरह की किसी भी मदद की आधिकारिक पुष्टि करना इन देशों के लिए मुश्किल है.

अमेरिका ने इजराइल पर कब किया था हमला?

अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया था. इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई थी. अमेरिका और इजराइल का आरोप था कि ईरान परमाणु हथियार बना रहा था जो इजराइल और अरब देशों के लिए खतरा बन सकता था.

इसके जवाब में ईरान ने इजराइल और अमेरिका पर बड़े स्तर पर पलटवार किया. अब लगभग पूरा मध्य पूर्व युद्ध के माहौल में है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी मान चुके हैं कि ईरान के साथ यह युद्ध कई हफ्तों तक चल सकता है.

ईरान और चीन के रिश्ते कैसे हैं?

ईरान मध्य पूर्व में चीन का सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी और रणनीतिक साझेदार माना जाता है. चीन के लिए यह साझेदारी अमेरिका के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिए भी अहम है. इसके अलावा ईरान चीन की ऊर्जा सुरक्षा और तेल आपूर्ति के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है. साथ ही ताइवान को लेकर चीन की रणनीति में भी ईरान की भूमिका मानी जाती है.

ईरान पर कई तरह के बैन फिर भी चीन ने कैसे की मदद?

ईरान पर लंबे समय से अमेरिका और यूरोपीय संघ के कड़े प्रतिबंध लगे हुए हैं. ये प्रतिबंध मुख्य रूप से उसके परमाणु कार्यक्रम और हथियारों की खरीद से जुड़े आरोपों के कारण लगाए गए हैं. इसके बावजूद चीन ने ईरान के साथ आर्थिक संबंध बनाए रखे हैं. साल 2021 में चीन ने घोषणा की थी कि वह अगले 25 सालों में ईरान के ऊर्जा, बैंकिंग, टेलीकॉम और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों में 400 अरब डॉलर का निवेश करेगा.

चीन की कई कंपनियों ने ईरान के तकनीकी ढांचे में भी निवेश किया है. हुवावेई ईरान में टेलीकॉम उपकरण उपलब्ध कराने वाली सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है. वहीं चीनी कंपनी जेडटीई ने भी ईरान के दूरसंचार नेटवर्क के विकास में अहम भूमिका निभाई है. साल 2010 में जेडटीई ने 130 मिलियन डॉलर का एक समझौता किया था जिसके तहत ईरान के टेलीफोन और इंटरनेट नेटवर्क के लिए निगरानी प्रणाली विकसित की गई थी.

चीन ने ईरान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निगरानी सिस्टम के विकास में भी मदद की है. चीनी कंपनियों टियांडी और हिकविजन ने फेस रिकग्निशन कैमरे उपलब्ध कराए हैं. ईरान का नेशनल इन्फॉर्मेशन नेटवर्क भी काफी हद तक चीन के इंटरनेट मॉडल से प्रभावित माना जाता है.

ईरान के ड्रोन और मिसाइल कार्यक्रम में भी चीन की क्या भूमिका है?

विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान के ड्रोन और मिसाइल कार्यक्रम में भी चीन की तकनीकी मदद का असर देखा जा सकता है. कई दशकों से चीन ईरान को ऐसे उपकरण और तकनीक देता रहा है जिन्हें सैन्य और नागरिक दोनों उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. अमेरिका और इजराइल के हमले से कुछ दिन पहले ईरान चीन से एक सुपरसोनिक एंटी-शिप क्रूज मिसाइल खरीदने की तैयारी कर रहा था. यह कदम उस समय उठाया गया जब अमेरिका ने फारस की खाड़ी में अपने युद्धपोत तैनात किए थे.

ईरान के विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने रॉयटर्स से कहा था कि ईरान के अपने सहयोगी देशों के साथ सैन्य और सुरक्षा समझौते हैं और अब उन समझौतों का इस्तेमाल करने का समय आ गया है. मिडिल ईस्ट से जुड़ी एक रिपोर्ट में बताया गया कि चीन ने ईरान को हथियारों के साथ कुछ रक्षात्मक सैन्य उपकरण भी उपलब्ध कराए हैं. हालांकि ईरान के पास कई घरेलू हथियार भी हैं, लेकिन उनमें इस्तेमाल होने वाले कुछ महत्वपूर्ण पुर्जे चीन से जुड़े बताए जाते हैं.

ईरान इजरायल युद्धवर्ल्‍ड न्‍यूज
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